• [WRITTEN BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 14 August, 2019 06:05 AM | Total Read Count 159
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आर्थिक संकट चौतरफा है

आज मांग की ऐसी कमी है, वैसी हमारी अर्थव्यवस्था में शायद ही पहले कभी देखी गई हो। इसकी एक वजह है कि भारतीय उपभोक्ता गले तक कर्ज में डूबे हैं। फिर मुद्रास्फीति की कम दर के प्रभावों पर भी विचार करना चाहिए। इसका यह भी मतलब है कि वेतनवृद्धि कम हो रही है। इसलिए उपभोग बढ़ने की संभावना नहीं है। फिर जमीन-जायदाद के दाम 25 फीसदी से ज्यादा गिर गए हैं। शेयर बाज़ार सूचकांक भी पिछले साल के मुक़ाबले गिर गया है। कई म्यूचुअल फंड मामूली लाभ ही दे रहे हैं। इन स्थितियों में लोग खर्च कम कर देते हैं। यह भी गौरतलब है कि रोजगार का ढांचा बदल गया है, क्योंकि कामगारों में महिलाओं का अनुपात घट गया है। परिवारों में रोजगार में लगे वयस्कों की संख्या घट गई है। इससे परिवार की आमदनी निश्चित ही घटी है। 

नतीजतन परिवारों पर मकान, वाहन, उपभोक्ता सामान, शिक्षा आदि से इतर कारणों से लिए जाने वाले कर्ज़ में तेजी से वृद्धि हुई है। 2017-18 तक के पिछले चार वर्षों में इसमें 154 फीसदी की वृद्धि हुई थी। सामान और सेवाओं की ज़्यादातर मांग छोटे-से ऊपरी तबके में से ही उठती है। लेकिन वह तबका उतना छोटा भी नहीं है। यह उपभोक्ता तबका कुल आबादी का 30-35 प्रतिशत है। 2011 की जनगणना के मुताबिक 24.6 करोड़ घरों में से 21 फीसदी के पास ही दोपहिया वाहन हैं। यह प्रतिशत आज और बढ़ ही गया होगा क्योंकि हर साल 6 फीसदी घरों में- 2017-18 में इनकी संख्या 1.7 करोड़ थी। फिर भी सच यही है कि उपभोक्ता तबका पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा है। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि सरकार श्रम-आधारित मैनुफैक्चरिंग निम्न-मध्यवर्ग में खर्च करने वाला बड़ा तबका नहीं पैदा कर सकी है। कृषि क्षेत्र में बदलाव आया है। किसान घरेलू बाज़ार में होने वाली खपत से ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं। अतिरिक्त उत्पादों के लिए निर्यात की गुंजाइश ना होने से घरेलू मांग और सप्लाई में आ रहे असंतुलन के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इसके कारण कृषि से आय सीमित हुई है, बावजूद इसके कि उत्पादन बढ़ा है। अगर श्रम-आधारित मैनुफैक्चरिंग कामयाब होती और वह लोगों को खेतों से कारखानों की तरफ खींचती तो कृषि पर निर्भर लोगों की संख्या कम होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। यानी अर्थव्यवस्था के संकट के पहलू चौतरफा हैं। इनका मुकाबला इसी स्तर पर करना होगा। लेकिन उसके लिए जो तैयारी चाहिए, वह कहीं नजर नहीं आती।

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