• [EDITED BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 07 August, 2019 05:50 AM | Total Read Count 261
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निवेश का सूखा स्रोत

कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जब अर्थव्यवस्था के लगातार बदहाल होने की कोई खबर नहीं आती। लेकिन उससे हमारे राजनीतिक आकाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं। इसलिए इस खबर से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि भारत में घरेलू क्षेत्र की बचत गिरकर चिंताजनक स्तर  पर पहुंच गई है। इस समय ये 10 साल के निम्नतम स्तर पर है। भारतीय अर्थव्यवस्था में घरेलू क्षेत्र की बचत निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है। विशेषज्ञों के मुताबिक घरेलू स्तर पर लगातार बढ़ती देनदारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। 2018 में देश की बचत दर या सकल घरेलू बचत साल 2008 के 37 फीसदी की जगह 30.5 फीसदी पर आ गई। खपत में बढ़ोतरी या अन्य वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री में होने वाली वृद्धि का कारण घरेलू स्तर पर लिया जाने वाला खुदरा कर्ज है।

ये कर्ज इस समय सालाना 17 फीसदी की तेज दर से बढ़ रहा है। घरेलू स्तर पर लिए जाने वाले कर्ज में तेजी का कारण उद्योगों की ओर जाने वाले कर्ज में कमी होना भी है। बीते पांच सालों से लगातार एनपीए में बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते बैंक इस क्षेत्र को कर्ज देने में बहुत सावधानी बरत रहे हैं। इस तरह से उद्योगों की ओर जाने वाला कर्ज घरेलू क्षेत्र की ओर जा रहा है। इससे घरेलू क्षेत्र पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया है। घरेलू बचत अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए सबसे बड़ा स्रोत है। इसका कारण ये है कि घरेलू बचत का प्रवाह सरकारी और कॉरपोरेट दोनों क्षेत्रों की ओर होता है। किसी भी अर्थव्यवस्था में निवेश को बचत के बराबर माना जाता है, क्योंकि जो आय खर्च नहीं होती है वो बचत के रुप में इकट्ठा होती है, जिसे बाद में निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भारत के लिहाज से घरेलू बचत निवेश के लिए पर्याप्त नहीं होती है। इसकी पूर्ति के लिए महंगी विदेशी बचत का उपयोग होता है। इससे देश के चालू खाते के घाटे में इजाफा होता है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कम बचत देश में आर्थिक सुस्ती के पीछे एक बड़ा कारण है। गौरतलब है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 5.8 फीसदी के साथ पांच साल के निम्नतम स्तर पर थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू बचतों में सबसे ज्यादा कमी परिवार के स्तर पर होने वाली बचत में हुई है। यानी निवेश का एक बड़ा स्रोत सूख गया है। मगर इसकी फिक्र किसे है? 

 

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