• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 10 September, 2019 08:45 AM | Total Read Count 146
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हादसों की ठोस वजहें हैं

पिछले हफ्ते पंजाब में भयानक हादसा हुआ। एक फैक्टरी में धमाका इतना भयावह था कि फैक्टरी जिस इमारत में चल रही थी वो ढह गई। आस-पास की कई इमारतें हिल गईं और बाहर खड़ी गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। बटाला-जालंधर रोड पर हंसली इलाके में स्थित इस पटाखा फैक्टरी में धमाका हुआ। गुरदासपुर पुलिस ने बताया कि फैक्टरी रिहायशी इलाके में थी और अवैध तरीके से चल रही थी। इस फैक्टरी में करीब दो साल पहले भी धमाका हुआ था। पंजाब सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी पटाखा कारखाने में हादसा और लोगों के मरने की घटना हुई हो। 2012 में तमिलनाडु के शिवकाशी की एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ था। तब 34 लोगों की मौत हो गई थी। 2008 में राजस्थान के भरतपुर में पटाखा फैक्टरी में धमाका हुआ था और कम से कम 26 लोग मारे गए थे। उसी साल ओडिशा में भी पटाखा बनाने वाले एक कारखाने में धमाका हुआ था, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई थी। इसी साल दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र बवाना में एक पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई थी, तो पिछले दिनों उज्जैन की पटाखा फैक्टरी में भी धमाके से 16 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। आए दिन होने वाले ऐसे हादसों के पीछे अवैध तरीके से चल रहे कारखाने, नियमों को धता बताते लोग और सरकारी लापरवाही और उपेक्षा ही मुख्य कारण होते हैं। अकेले राजधानी दिल्ली में धमाकों और आग की घटनाओं में औसतन हर रोज एक व्यक्ति की मौत होती है, जबकि छह लोग घायल होते हैं।

दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में आग लगने की औसतन 33 घटनाएं हर रोज होती हैं। आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में आग की घटनाओं में पिछले कुछ समय से करीब 12 फीसदी की दर से तेज गति से इजाफा भी हुआ है, वहीं दूसरी ओर आग लगने के बाद उसे बुझाने वाले फायर ब्रिगेड विभाग में संसाधनों की कमी के अलावा दर्जनों पद खाली पड़े हुए हैं। देश के दूसरे हिस्सों में स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। देश के कई इलाकों में अवैध रूप से इस तरह के कारखाने प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे हैं। हाल ही में सूरत में कोचिंग सेंटर में हुए हादसे में कई बच्चों की जलकर मौत हो चुकी है। इस हाल में पंजाब का हादसा भले दुखद हो, लेकिन हैरतअंगेज नहीं था। 

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