• [EDITED BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 01 August, 2019 06:53 AM | Total Read Count 112
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बाघ संरक्षण में उपलब्धि

इस खबर पर स्वाभाविक हर्ष व्यक्त किया गया है कि भारत में बाघों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस पर भारत सरकार के आंकड़ों को जारी करने के लिए खुद प्रधानमंत्री सामने आए। जाहिर है, संदेश यह था कि यह वर्तमान सरकार की सफलता है। लेकिन आंकड़ों पर गौर करें, तो 2006 से जिस दर से बाघों की संख्या बढ़ी है, अभी भी वही दर कायम है। फिलहाल, भारत में बाघों की संख्या 2,967 हो गई है। 2008 में संख्या 1,411 रह गई थी। भारत में हर चार साल पर बाघों की गणना होती है। 2014 में हुई पिछली बाघ गणना के मुताबिक भारत में 2,226 बाघ थे। 2018 की बाघगणना में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। भारत में बाघ के संरक्षण के लिए नियम बने हुए हैं। बाघ खतरे में इस लिए पड़े क्योंकि 1970 के बाद से इंसानों और बाघों के बीच में टकराव के मामले आम होने लगे। इस गिरावट को रोकने के लिए सरकार ने बाघ के शिकार को अपराध बना दिया। नौ साल पहले रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में तय किया गया था कि 2022 तक बाघों की संख्या को दोगुना करना है। अब साफ है कि भारत ने यह लक्ष्य चार साल पहले ही पूरा कर लिया है। बेशक भारत के लिए यह गर्व की बात है। मगर यह भी साफ है कि अभी रास्ता बहुत लंबा है। बाघों का दूरगामी भविष्य भी भारत को सुरक्षित करना होगा, क्योंकि बाघों और इंसानी टकरावों के मामले आज भी बहुत आम हैं। जनसंख्या में वृद्धि इसका बड़ा कारण है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रोज एक इंसान हाथी या बाघ के हमले में अपनी जान गंवाता है। भारत में बाघ और हाथी का शिकार सबसे ज्यादा किया जाता है। इनकी हड्डियों और दांतों का इस्तेमाल दवाई बनाने में किया जाता है। बाघ की खाल की तस्करी भी की जाती है। 

फिलहाल भारत में दुनिया के 70 प्रतिशत से भी ज्यादा बाघ रहते हैं। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में 3,900 बाघ हैं। पिछले दशकों में दुनियाभर के 95 प्रतिशत बाघ गायब हो चुके हैं। इसकी वजहें उनके रहने की जगह ना बचना और इंसानों के साथ लगातार हो रही मुठभेड़ें शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत की उपलब्धि काबिल-ए-गौर है। 

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