• [WRITTEN BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 12 August, 2019 05:19 AM | Total Read Count 143
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स्किल इंडिया का सच

कौशल विकास को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार के ऊंचे दावे हैं। इस बार के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्किल इंडिया का खूब बखान किया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार युवाओं को उद्योग आधारित ट्रेनिंग दे रही है, ताकि उनके लिए नौकरी के अवसर बढ़ें। लेकिन सरकार नौकरी के आंकड़े देने से सरकार अब तक बचती नजर आई है। मगर पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के आंकड़ों पर गौर करें तो जाहिर होता है कि सरकार के ऊंचे दावे सच्चाई से कहीं दूर हैं। युवाओं का सिर्फ एक सीमित तबका ही व्यावसायिक प्रशिक्षण पा रहा है। जो पार रहे हैं, उनमें से अधिकतर या तो बेरोजगार हैं। अगर समूचे देश में स्किल इंडिया के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण की बात करें, तो 2017-18 में केवल 1.8 फीसदी जनसंख्या को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिला। जबकि 5.6 फीसदी ने अनौपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस तरह से देश की 93 फीसदी जनसंख्या ऐसी है, जिसे किसी तरह का कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है।

जिन लोगों को किसी तरह की ट्रेनिंग मिली है उनमें आधे से अधिक युवा है। सवाल ये है कि जिन लोगों को किसी तरह का प्रशिक्षण मिल भी गया है वे श्रम बल में शामिल क्यों नहीं हुए? इसका सीधा सा जवाब है कि उन्हें नौकरी खोजने में कठिनाई हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में व्यावसायिक प्रशिक्षण पा चुके 33 फीसदी युवा बेरोजगार थे। इसके अलावा एक तिहाई पुरुष तथा इससे कुछ अधिक महिलाएं, जिन्होंने किसी तरह का प्रशिक्षण पाया था, बेरोजगार थे। इसमें जिन्होंने हाल ही में ट्रेनिंग पाई थी उनमें बेरोजगारी की दर ज्यादा थी। इनमें से 40 फीसदी युवा बेरोजगार थे। बेरोजगारी की दर अधिक होने और लगातार खोजने पर भी रोजगार ना मिलने के चलते अधिकतर युवा श्रम बल से बाहर चले जाते हैं। सरकार रोजगार परक ट्रेनिंग देने के दावे करती है, लेकिन ये ट्रेनिंग किस तरह की होती है इस पर भी गौर किया जाए। इसके लिए पीएसएफएस ने आंकड़े जुटाए हैं। ये स्किल ट्रेनिंग 22 खंडों में बांटी गई है। इनमें से ज्यादातर प्रशिक्षु सूचना तकनीकी, परिधान और मकैनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में थे। इसमें भी महिला और पुरुष के स्तर पर काफी बंटवारा देखने को मिलता है। तो कुल मिलाकर यह सरकार के बहुचर्चित स्किल इंडिया कार्यक्रम की सच्चाई है। 

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