• [EDITED BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 27 June, 2019 06:14 AM | Total Read Count 129
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क्या अब खुलेंगे पेच?

भारत- अमेरिका संबंधों में इस समय कई पेच हैं। क्या अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान ये पेच खुलेंगे? अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और भारत सरकार के बीच दिल्ली मुलाकात में आतंकवाद, अफगानिस्तान, ईरान, व्यापारिक मुद्दे, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और दोनों देशों के द्विपक्षीय रक्षा संबंध सर्वोच्च प्राथमिकता पर हैं। यह मुलाक़ात अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच हो रही है। पोम्पियो की मुलाकात पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात तय थी। मुलाकात के बाद माइक पोम्पियो जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए ओसाका के लिए रवाना होंगे। बीते कुछ समय से भारत और का ध्यान द्विपक्षीय व्यापारिक मुद्दों पर केंद्रित रहा है। अपेक्षा थी कि दोनों देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इस दिशा में सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ेंगे। लेकिन हाल में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद खड़े हो गए। पोम्पियो के आने से पहले बताया गया था कि उनके साथ बातचीत में मुख्य मुद्दा आतंकवाद होगा। माना जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम ना उठाने और अफगानिस्तान को अस्थिर करने में उसकी भूमिका पर चर्चा होगी। मुंबई, पठानकोट, उरी और पुलवामा में आतंकवादी हमले की जांच की पहल नहीं करने और दाऊद इब्राहिम को इस्लामाबाद में पनाह देने के बारे में भी पोम्पियो के सामने बात रखी गई।

जहां तक अफगानिस्तान की बात है, भारत अफगान लोगों के नेतृत्व वाली नियंत्रित शांति प्रक्रिया में साथ है। इस तरह की शांति प्रक्रिया सबको साथ लेकर चलने वाली है और संविधान या अफगान सरकार के रूप में पिछले 18 सालों की राजनीतिक उपलब्धियों की उपेक्षा नहीं करती। उधर भारतीय तेल कंपनियों ने ईरान के साथ कोई नया समझौता नहीं किया है। भारत हाइड्रोकार्बन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए विकल्प के लिए तैयार है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। यह भी कहा जा रहा है कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से चिंतित है। इससे खाड़ी देशों में रह रहे 90 लाख भारतीयों को परेशानी हो सकती है। साथ ही तेल के आयात में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। देश में 60 फीसदी तेल पश्चिमी एशिया से आयात होता है। अधिकारियों के मुताबिक भारत अमेरिका के साथ अपने रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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