• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 27 August, 2019 09:13 AM | Total Read Count 186
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आईएस क्या चाहता है?

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि वो अपने देश से इस्लामिक स्टेट (आईएस) का सफाया कर देंगे। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि आईएस अफगानिस्तान में और मजबूत हो रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अब इसके साथ कई सारे तालिबान लड़ाके भी जुड़ सकते हैं। इसलिए कि कई सारे तालिबानी जिहादी दोहा में अमेरिका के साथ चल रही तालिबान की शांति वार्ता से खुश नहीं हैं। अफगानिस्तान में अभी तक आईएस में शामिल लोग पहले पाकिस्तानी तालिबान में रह चुके हैं। ये लोग तालिबान छोड़कर आईएस में भर्ती हो रहे हैं। तालिबान और आईएस के बीच अफगानिस्तान में 2014 के आखिर से ही लड़ाई जारी है। आईएस ने जनवरी 2015 में अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में अपना दबदबा बना लिया था। आईएस और तालिबान दोनों ही अफगान सरकार के विरोधी हैं। लेकिन इन दोनों की विचारधारा और नेतृत्व में मतभेद हैं। इसी के चलते दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़पें होती रहती हैं। दोनों ही गुट सरकार को हटाकर अफगानिस्तान की सत्ता पर नियंत्रण करना चाहते हैं।

अगर अफगानिस्तान में देखा जाए तो तालिबान आईएस से ज्यादा ताकतवर है। तालिबान अपने आप को मुख्य विपक्षी इस्लामिक समूह बताता है। तालिबान का लक्ष्य पश्चिमी देशों की कथित समर्थक सरकार को बर्खास्त कर अफगानिस्तान में इस्लामिक राज्य की स्थापना करना है। जबकि आईएस का लक्ष्य अफगानिस्तान को दक्षिण एशिया के लिए अपना आधार बनाने का है, जिससे वो इस इलाके के बाकी देशों में अपना विस्तार कर सके। विश्लेषकों का कहना है कि आईएस की करतूतें इतनी हिंसक हैं कि दोनों की तुलना करने पर लोग तालिबान को बेहतर समझते हैं। अफगानिस्तान में आईएस ने शियाओं पर 2017 और 2018 में कई बार हमले किए हैं। अधिकांश हमले शियाओं के धार्मिक स्थलों पर किए गए जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए। माना जाता है कि आईएस अफगानिस्तान के लोगों के बीच सांप्रदायिक बंटवारा करना चाहता है। मगर अफगानिस्तान में पैर जमाने में आईएस को तालिबान से कड़ी चुनौती मिल रही है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान फिलहाल आईएस को अपना सहयोगी नहीं मानता। वो नहीं मानता कि आईएस दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की कोई मदद कर सकता है। लेकिन हो सकता है भविष्य में चीजें बदल जाएं, क्योंकि सऊदी की वहाबी विचारधारा दोनों को एकजुट करने का काम कर सकती है। आईएस का पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रभुत्व बढ़ना भारत के लिए भी खतरा हो सकता है।

 

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