• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 06 August, 2019 06:49 AM | Total Read Count 109
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खतरे में है अरावली

अरावली पर्वत शृंखला के पहाड़ धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। इसका दूरगामी असर हो सकता है। अरावली को बचाना पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद जरूरी है। लेकिन इस तरफ पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दिल्ली से लेकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई अरावली पर्वत शृंखला करीब 800 किलोमीटर लंबी है। ये पहाड़ियां करीब 35 करोड़ साल पुरानी हैं। माना जाता है कि अरावली की पहाड़ियां हिमालय पर्वत से भी पुरानी हैं। ये पहाड़ियां ना सिर्फ थार के मरुस्थल को फैलने से रोकती हैं, बल्कि भूजल को फिर से जमीन में भेजती हैं। इसके अलावा यहां जैव विविधता का भंडार है। इन पहाड़ियों के जंगलों में 20 पशु अभ्यारण्य हैं। लेकिन अब ये पहाड़ियां खतरे में हैं। इसका प्रमुख कारण है खनन। राजधानी दिल्ली से महज 40 किलोमीटर दूरी पर अरावली में खनन का काम चल रहा है। स्टोन क्रशर, ट्रक, ट्रेक्टर-ट्रॉली और बड़ी-बड़ी मशीनें इन पहाड़ियों को छलनी कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में ही पहाड़ी के इस 10 किलोमीटर लंबे इलाके में खनन पर रोक लगा दी थी, लेकिन अभी भी खनन जारी है। यानी सुप्रीम कोर्ट की रोक का पर्याप्त असर नहीं हुआ। कई जगहों पर जहां तीन-चार साल पहले यहां हरियाली से भरा पूरा एक पहाड़ हुआ करता था, जिसका अब बस उनका नामोनिशान ही बचा है। बढ़ रही जनसंख्या और शहरीकरण को भी अरावली के क्षरण का कारण माना जाता है। इस कारण वन्य जीवों, पौधों की प्रजातियों को खत्म हो रही हैं। ग्रामीणों के लिए पशुओं को चराने के चारागाह गायब होते जा रहे हैं। पहाड़ियों का खत्म होना जैव विविधता के लिए एक बड़ा नुकसान है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत की वर्तमान स्थिति को जानने के लिए एक केंद्रीय समिति का गठन किया था। समिति ने पाया कि अवैध खनन के चलते पिछले 50 सालों में 128 में से 31 पहाड़ियों का नामोनिशान खत्म हो चुका है। जानकारों के मुताबिक अरावली की पहाड़ियां दिल्ली-एनसीआर के इलाके को रेगिस्तान से बचाती रही हैं। अगर पहाड़ खत्म हो गए तो रेगिस्तान का फैलना तय है। ये पहाड़ियां दिल्ली की ओर आते प्रदूषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में पहले से ही हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। कहा जाता है कि अरावली आसपास के इलाकों के लिए फेंफड़ों का काम करती है। वह हवा से प्रदूषण को सोख लेती है। अब समझा जा सकता है कि इनके विनाश का क्या असर होगा। 

 

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