• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 12 July, 2019 12:59 PM | Total Read Count 247
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हांगकांग में साख का संकट

हांगकांग के बीजिंग समर्थक नेता कैरी लाम ने कह दिया है कि चीन प्रत्यर्पण बिल का प्रकरण अब "समाप्त" हो चुका है। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनके बयान को खारिज कर दिया है। उन्होंने और भी बड़े स्तर पर रैली करने की धमकी दी है। हांगकांग में हाल एक बड़ा सियासी संकट देखने को मिला है। एक महीने से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मारपीट और छिटपुट हिंसक घटनाएं हो रही हैं। जन प्रदर्शनों का सिलसिला चलता रहा है। इसकी शुरुआत एक कानून के मसौदे को लेकर हुई। उसमें मु्कदमे का सामना करने के लिए आरोपी को चीन भेजे जाने का प्रावधान था। लेकिन इसके खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू हो गया। पूरे शहर में उथल-पुथल मची रही है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाई हैं। संसद तक में प्रदर्शनकारियों ने तोड़-फोड़ की। हांगकांग को 1997 में चीन को वापस सौंपा गया था। उसके बाद से यहां की सियासी व्यवस्था अब तक की सबसे गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। बीते मंगलवार को शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरी लाम ने बिल पेश करने के अपने प्रशासन के प्रयास को "पूरी तरह समाप्त" बता दिया। कहा कि उनकी सरकार संसद में इसे फिर से लाने की कोशिश नहीं करेगी। लेकिन उन्होंने विधायी एजेंडे से बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग को मानने से इनकार कर दिया। इसी बिल की वजह से लोग सड़कों पर उतरे थे। 2014 में विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में जेल भेजे गए एक्टिविस्ट जाशिवा वोंग हाल ही में छूटे हैं। उन्होंने बिल को लेकर लाम के बयान को झूठ करार दिया। कहा कि बिल अभी भी अगले साल जुलाई तक विधायी कार्यक्रम में मौजूद है।

बिल के विरोध में रैलियों का आयोजन करने वाले नागरिक मानवाधिकार मोर्चा ने कहा कि वह आने वाले दिनों में नए विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करेगा। विश्लेषकों का कहना है कि लाम के ताजा बयान से आंदोलन दबने वाला नहीं है। सरकार पर भरोसा इस तरह से टूट गया है कि अगर आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को नहीं माना जाता है तो हांगकांग की जनता सरकार की साख खतरे में पड़ जाएगी। 1997 में ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के अनुसार चीन ने हांगकांग को अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अधिकारों की अनुमति देने का वादा किया था।  लेकिन लोग मानते हैं कि अब भी पाबंदी लगी हुई है। अब इसी का विरोध हो रहा है। 

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