• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 08 August, 2019 06:44 AM | Total Read Count 135
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मानवाधिकारों की कहां चिंता?

यूरोप को कभी मानवाधिकारों का पैरोकार माना जाता था। लेकिन आज खुद यूरोपीय संघ के कई देश इस मामले में कठघरे में हैं। आरोप यह है कि यूरोपीय संघ के कई देशों में आप्रवासियों के साथ अमानवीय तरीके से पेश आया जा रहा है। ऐसे मामलों में वहां की पुलिस चुपचाप देखती रहती है। यूरोपीय आयोग ने भी सिर्फ आरोपों की जांच कराने की बात ही कही है। मगर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यूरोपीय सीमा सुरक्षा एजेंसी फ्रंटेक्स ने ग्रीस, बुल्गारिया और हंगरी की सीमाओं पर राष्ट्रीय अधिकारियों के हाथों मानवाधिकारों के हनन को चुपचाप स्वीकार करती रही है। मीडिया रिपोर्टों में विदेशियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग, शरणार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और कुत्तों के साथ उन्हें खदेड़ने की बात कही गई है। इन आरोपों के लिए सीमा सुरक्षा बल के अपने दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि कि फ्रंटेक्स के अधिकारी स्वयं भी शरणार्थियों को विमानों से वापस भेजे जाने के दौरान मानवाधिकारों के हनन में शामिल थे। विमान यात्रा के दौरान शरणार्थियों को दवा देकर शांत कर दिया गया या हथकड़ियों का इस्तेमाल जरूरत नहीं होने पर भी किया गया। 

यूरोपीय आयोग ने कहा है कि आरोप की फ्रंटेक्स के साथ मिलकर जांच कराई जाएगी। मगर फ्रंटेक्स जब खुद आरोपों के घेरे में है, तो उसके सहयोग से जांच कराना कितना माफिक होगा, यह सवाल लाजिमी है। इस यूरोपीय सीमा सुरक्षा एजेंसी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है फ्रंटेक्स के कर्मचारियों को गलतियों के लिए सजा दी जाएगी। लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं दर्ज की गई है। एजेंसी ने कहा है कि उसके हर अधिकारी मानवाधिकारों के हनन के मामलों की रिपोर्ट करने के लिए बाध्य हैं, लेकिन राष्ट्रीय अधिकारियों के बर्ताव पर उनका कोई अधिकार नहीं है। ना ही वे सदस्य देशों में जांच कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों में जिन देशों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी लंबे समय से सर्बिया की सीमा पर पकड़े जाने वाले शरणार्थियों के साथ व्यवहार के लिए आलोचना हो रही है। फ्रंटेक्स यूरोपीय देशों की सीमा की सुरक्षा में मदद करता है और सदस्य देशों के पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर काम करता है। यूरोपीय संसद और सदस्य देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार 2027 तक फ्रंटेक्स के अधिकारियों की संख्या बढ़ाकर 10,000 कर दी जाएगी। साथ ही उनके अधिकारों को भी बढ़ाया जाएगा। मानवाधिकार की रक्षा बात इस योजना में कहीं शामिल नहीं है।

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