• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 05 July, 2019 06:03 AM | Total Read Count 170
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नए अध्यक्ष की चुनौतियां

यूरोपीय परिषद को अध्यक्ष मिल गया है, लेकिन क्या इससे उसके संकट का हल निकलेगा। इस संस्था की लोकतांत्रिक साख पर अब यूरोप के लगभग सभी देशों से सवाल उठ रहे हैं। उग्र वाम एवं दक्षिणपंथी ताकतें अपने-अपने देशों को यूरोपीय संघ से निकालने का अभियान चला रही हैं। ब्रेग्जिट के बाद ऐसे रूझानों में तेजी आई है। फिलहाल यूरोपीय परिषद ने यूरोपीय आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए उर्सुला फॉन डेय लाएन के नाम का प्रस्ताव किया है। फॉन डेय लाएन जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयू पार्टी की सदस्य हैं। अगर यूरोपीय संसद उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा देती है, तो वह इस पद को संभालने वाली पहली महिला होंगी। उनकी नियुक्ति को मंजूरी तभी मिलेगी, जब 751 सदस्यों वाली यूरोपीय संसद में उनके नाम को बहुमत का समर्थन मिलेगा। 

मुद्दा यह है कि ग्रीन पार्टी से जुड़े और उग्र दक्षिणपंथी सदस्य उनका समर्थन करेंगे। हालांकि उसके बिना भी लाएन जीत सकती हैं, मगर तब वो बिना आम सहमति के अध्यक्ष बनेंगी। कहा गया है कि परिषद के पदाधिकारियों के नामांकन की प्रक्रिया में लैंगिक संतुलन बनाया गया है। चार अहम पदों के लिए दो महिला और दो पुरुषों को चुना गया है। इन चार पदों में यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के अलावा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष पद के लिए चार्ल्स मिशेल को नामांकित किया गया है, जो अभी बेल्जियम के प्रधानमंत्री हैं। वहीं क्रिस्टीने लागार्द को यूरोपीय केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष पद के लिए नामजद किया गया है। वे फ्रांस की वित्त मंत्री रह चुकी हैं और अभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक हैं। वहीं जोसेप बोरेल फोंटेलेस को विदेश और सुरक्षा नीति का उच्च प्रतिनिधि बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। अभी वह स्पेन के विदेश मंत्री हैं। इन चारों पदों पर नियुक्ति की पुष्टि यूरोपीय संसद को करनी होगी। यूरोपीय संसद के कई सदस्यों ने यूरोपीय परिषद के इस फैसले की आलोचना की है। चयन लीड कैंडिडेट सिस्टम के तहत किया गया है, जिसमें हर पार्टी समूह एक लीड उम्मीदवार के साथ चुनाव लड़ता है, जो उनका नेता होता है। सबसे बड़ी पार्टी बनने वाला पार्टी समूह इसी उम्मीदवार को आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पेश करता है। ग्रीन संसदीय समूह का कहना है कि जो डील हुई है उसमें "लीड कैंडिडेट प्रक्रिया और यूरोपीय संसद के चुनाव नतीजों का सम्मान नहीं किया गया है। हमें यूरोप में एक राजनीतिक बदलाव की जरूरत है। ऐसी भावनाएं अन्य सदस्यों की भी हैं, और यही परिषद के लिए चिंता की बात है।

 

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