• [WRITTEN BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 12 August, 2019 05:24 AM | Total Read Count 138
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प्रोत्साहन पैकेज पर उम्मीद

भारत में आर्थिक मंदी गहराती जा रही है। उद्योगपतियों ने इससे निपटने के लिए सरकार से प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने इस पर विचार करने का भरोसा दिया है। लेकिन समस्या जितनी गंभीर है, उसके मद्देनजर फिलहाल उम्मीद बंधती नहीं दिखी। समस्या कितनी गहरी है, इसकी एक मिसाल ऑटोमोबाइल सेक्टर है। इस क्षेत्र में पिछले चार महीनों में उत्पादन में भारी कमी आई है। इसलिए कि खरीदार भी कम हुए हैं। नतीजतन, इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के मुताबिक कार और बाइक की बिक्री में गिरावट के चलते एजेंसियों और डीलरों ने ही करीब दो लाख कर्मचारियों की छंटनी की है। पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में ये संख्या और भी ज्यादा है। ताजा संकट के चलते करीब चार लाख लोगों का रोजगार दांव पर लगा हुआ है। कई कंपनियों ने अपना उत्पादन रोक दिया है। गौरतलब है कि ऑटोमोबाइल उद्योग क्षेत्र में नौकरियां न सिर्फ वाहनों के निर्माण और उनकी बिक्री के क्षेत्र में मिलती हैं, बल्कि इस उद्योग में छोटे-बड़े कलपुर्जों का निर्माण भी है। इस क्षेत्र में कंपनियों ने अपने यहां पंद्रह हजार से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाला है। इसकी बिक्री और तमाम दूसरी चीजों से जुड़े क्षेत्र में बेरोजगार होने वालों की संख्या तीन लाख से ऊपर है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान देश भर के 271 शहरों में वाहनों के 286 शोरूम बंद हुए हैं, जिसमें हजारों लोगों की नौकरियां गई हैं। इसके अलावा इन सेक्टरों में करीब दो लाख नौकरियों की कटौती की गई है।

ये हालत इसलिए पैदा हुई क्योंकि मारुति की बिक्री 33.5 फीसद और महिंद्रा की बिक्री 15 फीसदी गिर गई। इस वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सभी श्रेणियों में वाहनों की बिक्री में करीब साढ़े बारह फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। फेडरेशन ऑफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस स्थिति में सुधार की गुंजाइश भी कम ही दिख रही है। एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति में वाहनों के और शो रूप बंद हो सकते हैं, जिसकी वजह से जाहिर तौर पर और नौकरियां जाएंगी। तो यह कुल मिलाकर देश में घटती आमदनी और ढहते उपभोग का परिणाम है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था के व्यापक संकट के कारण बनी है। क्या प्रोत्साहन पैकेज से इस हालत को सुधारा जा सकता है। 

 

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