• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 07 August, 2019 05:56 AM | Total Read Count 119
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स्वैच्छिक बनेगी बीमा योजना?

क्या‍ केंद्र सरकार अपनी महत्त्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) से हाथ खींच लेगी? हाल में संसद में एक सवाल पर सरकार की तरफ से दिए गए जवाब से ये अंदेशा पैदा हुआ है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लॉन्च किया था।  17 साल पुरानी राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) की जगह लाई गई नई योजना में किसानों को आठ से 12 फीसदी प्रीमियम के बजाय डेढ़ से पांच फीसदी देने का प्रावधान किया गया। इस बीमा के प्रीमियम में 50-50 फीसदी केन्द्र और राज्य की सरकारें अनुदान देती हैं। अब केंद्र ने इसे स्वैच्छिक बनाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन जानकारों के मुताबिक इसे किसानों के लिए वैकल्पिक बनाने से बीमा वाले किसानों की संख्या घटेगी और जोखिम बढ़ेगा। कुल प्रीमियम घटने से प्रति किसान प्रीमियम बढ़ सकता है।

बैंकों या अन्य संस्थाओं से ऋण लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए फिलहाल पीएमएफबीवाई के तहत बीमा करवाना अनिवार्य है। साल 2016 की खरीफ की फसल से लेकर 2018 की रबी की फसल के बीच कुल 19,1152 लाख किसानों ने पीएमएफबीवाई योजना के तहत फसल बीमा लिया। इनमें 73 फीसदी ऋण लेकर खेती करने वाले किसान हैं। यानी करीब तीन-चौथाई किसानों ने अनिवार्य रूप से इस योजना के तहत खुद को पंजीकृत करवाया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में पीएमएफबीवाई को किसानों के लिए ऐच्छिक बनाये जाने की चर्चा हुई। गौरतलब है कि बीजेपी ने आम चुनाव में इस योजना को किसानों के लिए ऐच्छिक बनाने का वादा किया था। एक राय यह है कि बीमा योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों और केंद्र सरकार के पास कोष की कमी की वजह से सरकार इसे वैकल्पिक बनाने पर विचार कर रही है। 2015 से साल 2019 के बीच केन्द्र सरकार बीमा योजना के लिए अनुदान के रूप में 36,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी है। आलोचकों का दावा है कि जितनी रकम खर्च हुई, उसके मुकाबले किसानों को फायदा नहीं हो पाया। देश के कई हिस्सों में शर्तों पर खरा नहीं उतरने या जानकारी के अभाव में किसान फसल क्षतिपूर्ति के लिए दावा नहीं कर पाए हैं या उन्हें तकनीकी कारणों से मुआवजा नहीं मिल पाया है। लेकिन योजना को वैकल्पिक बना देने से किसानों को क्या लाभ होगा, यह साफ नहीं है। क्या यह लौट कर वहीं से पहुंच जाना नहीं है, जहां से यात्रा शुरू हुई थी? 

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