• [WRITTEN BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 11 September, 2019 06:36 AM | Total Read Count 185
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नाकामी में छिपी कामयाबी

शुरुआती निराशा के बाद भारत के लोगों को ढाढस बंधाने वाली खबर आई। ये बात संतोष की है कि चंद्रयान-2 अभियान को अब काफी हद तक- 95 फीसदी तक सफल बताया गया है। 7 सितंबर को चंद्रयान-2 के साथ भेजे गए विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर उतरना था। ऐसा होता तो रोवर प्रज्ञान विक्रम से अलग होकर चांद की जानकारी जुटाता। लेकिन यह इसरो की योजना के मुताबिक नहीं हुआ। चांद पर उतरने से महज 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर का संपर्क इसरो से टूट गया। लेकिन एक दिन बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने विक्रम के कुछ संकेत पा लिए। तभी ये राय बनी कि ये अभियान पूरी तरह नाकाम नहीं है। विक्रम लैंडर के संपर्क टूटने के बाद यह आम धारणा बनी थी कि भारत का मिशन चंद्रयान-2 विफल हो गया। मगर सच यह है कि अंतरिक्ष मिशन किसी एक बात पर निर्भर नहीं करते। इनके अलग- अलग चरण होते हैं। हर चरण के पूरा होने पर नई जानकारियां मिलती हैं। चंद्रयान-2 के साथ भी ऐसा ही है। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर चंद्रयान मिशन का पांच प्रतिशत हिस्सा थे। 95 प्रतिशत हिस्सा चंद्रयान-2 ऑर्बिटर का है, जो अभी भी सुरक्षित है और चांद का चक्कर लगा रहा है। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर चांद की सतह की तस्वीरों की मदद से जानकारी भेजता रहेगा। यह एक साल के लिए सक्रिय रहेगा। प्रज्ञान रोवर का काम जीवनसमय सिर्फ 14 दिन का था। लेकिन चंद्रयान-2 ऑर्बिटर एक साल तक के लिए है जो अपना काम करता रहेगा। यह चांद का एक नक्शा तैयार करेगा जो आगे के मिशनों में बहुत काम आएगा। वैसे भी माना जाता है कि विज्ञान में असफलता नहीं होती।

दरअसल हर नाकामी कामयाबी की राह तैयार करता है। ताजा मामले में यह गौरतलब है कि जीएसएलवी मार्क 3 लॉन्च ह्विकल से भेजे गए चंद्रयान-2 ऑर्बिटर का चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित होना एक बड़ी कामयाबी है। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान लैंडर का काम चांद की सतह के बारे में जानकारी लेना, उसके वातावरण का पता लगाना, तापमान और ताप चालकता के बारे में पता करना और चंद्रमा पर होने वाली सीस्मिक गतिविधियों यानी भूकंप से जुड़ी हुई गतिविधियों की जानकारी इकट्ठा करना था। चंद्रयान-2 चांद पर भेजे गए दुनिया के किसी भी ऑर्बिटर की तुलना में सबसे कम खर्च में भेजा गया ऑर्बिटर है। भारत ने चंद्रयान-2 पर करीब 950 करोड़ रुपये खर्च किए। यह खर्च किसी और देश द्वारा चांद पर भेजे गए किसी भी मिशन से कम है। यह भी कम बड़ी बात नहीं है।

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