• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 28 June, 2019 06:45 AM | Total Read Count 191
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डीएनए बिल पर अंदेशे

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों डीएनए टेक्नॉलजी रेगुलेशन बिल 2018 को मंजूरी दे दी। अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने इस बिल को लोकसभा में पास करा लिया था, लेकिन राज्यसभा में ये पास नहीं हो पाया था। मतलब इस बिल पर गहरे मतभेद हैं। इसलिए उचित होगा कि बिना सार्वजनिक बहस के इस बिल को पारित ना कराया जाए। विपक्षी दल, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निजता के अधिकार के समर्थक संगठनों को इस बिल को लेकर कई आशंकाएं हैं। इन्हें अवश्य दूर किया जाना चाहिए। डीएनए प्रोफाइलिंग पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुफीद और कारगर बताई गई है। लेकिन दुनिया भर में ये भी माना गया है कि डीएनए प्रोफाइलिंग पर्याप्त अभ्यास, परिश्रम, पारदर्शिता और प्रशिक्षण की मांग करती है। इसमें यह अनिवार्य है कि घटनास्थल यानी क्राइम सीन का उचित परीक्षण किया जाए, पुलिस टीम और डेटा जुटाने वाले उपकरण प्रामाणिक और विश्वसनीय हों। आकलन का काम भी उतना ही भरोसेमंद और असंदिग्ध होना चाहिए, अन्यथा डीएनए डेटा मामला सुलझाने के बजाय उसे खराब कर देगा। उस हाल में न्याय प्रक्रिया सवालों के घेरे में आएगी और जुटाए गए साक्ष्यों के गलत इस्तेमाल का खतरा भी रहेगा। ये कहना कि छेड़छाड़ असंभव है, सही नहीं होगा। इस तरह के बहुत से सवाल हैं, जिन्हें खारिज करने के बजाय स्वाभाविक मानते हुए संतोषजनक उत्तर मिलना चाहिए। संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच प्रस्तावित डीएनए रेगुलेटरी बोर्ड की संरचना और रूपरेखा भी विश्वसनीय, मजबूत और निष्पक्ष होनी चाहिए।

डीएनए प्रोफाइलिंग से जुड़ी और भी विसंगतियां और पेंचीदगियां सामने आई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक निजी विशेषताओं को रेखांकित करने वाले डीएनए सैंपल को इस काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। निर्दोष लोगों के सैंपल मिटा देने का प्रावधान है, लेकिन ये कब साबित होगा कि वे निर्दोष हैं। मुद्दा यह है कि ये कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका डीएनए सैंपल किसी अन्य देसी या विदेशी एजेंसी के साथ साझा नहीं हुआ है। डेटा लीकेज की चिंता भी अपनी जगह है। सरकार को बताना चाहिए कि आखिर इस बिल की देश को क्या और कितनी जरूरत है। जब तक इस तरह की बहुत सारी आशंकाओं, संदेहों और सवालों के जवाब नहीं मिल जाते या उनके निस्तारण के उपाय नहीं कर लिए जाते, तब तक इस तरह के बिल को कानूनी जामा पहनाने की हड़बड़ी से सरकार को नहीं करनी चाहिए।

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