• [EDITED BY : Editorial Team] PUBLISH DATE: ; 05 August, 2019 06:29 AM | Total Read Count 152
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ज्यादा खतरनाक होता प्लास्टिक

एक ताजा अनुसंधान के मुताबिक महासागरों में ज्यादातर प्लास्टिक एशिया और अफ्रीका की 10 नदियों से पहुंचता है। जॉर्जिया यूनिवर्सिटी के जैमबेक रिसर्च ग्रुप के शोध में कहा गया है कि प्लास्टिक के जिस कचरे का प्रबंधन नहीं किया जाता है, वह देर सबेर महासागरों तक पहुंच जाता है। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यूरोप और उत्तर अमेरिका प्लास्टिक कचरे में कितनी कटौती करें। महासागरों में प्लास्टिक का कचरा बीयर या सॉफ्ट ड्रिंक के सिक्स पैक के कवरों से जमा होता है। यह कछुओं को फंसा सकते हैं। शॉपिंग बैग्स ह्वेल मछली के पेट में जाकर उन्हें भूखा मार सकते हैं। इसके बावजूद हर साल करोड़ों टन प्लास्टिक महासागरों में समाता है। माना जाता है कि 2017 में प्रकाशित हेल्महोल्स शोध को मीडिया के ज्यादातर हिस्से ने गलत ढंग से प्रसारित किया गया। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि महासागरों में 90 फीसदी प्लास्टिक एशिया की आठ और अफ्रीका की दो नदियों से पहुंचता है। ये सिर्फ नदियों के जरिए समंदर तक पहुंचने वाले प्लास्टिक का अनुमान है। इसमें सूनामी या मछली पकड़ने के दौरान फैलने वाले कचरे का आकलन नहीं किया गया है। महासागरों में मिलने वाला प्लास्टिक का कचरा जमीन से आने वाले कचरे के मुकाबले काफी विविध है। तो सवाल उठता है कि महासागरों में प्लास्टिक के कचरे के लिए कौन जिम्मेदार है? मछलियों और समुद्री जीवन को मार रहे इस कचरे के जिम्मेदार पर अंगुली उठाना इतना आसान नहीं है। अमीर देश, गरीब राष्ट्रों की तुलना में ज्यादा प्लास्टिक बर्बाद करते हैं। जर्मन और अमेरिकी नागरिक, केन्या और भारत के लोगों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा प्लास्टिक फेंकते हैं।

यूरोप, उत्तरी अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पूर्वी एशिया में रिसाइक्लिंग के लिए इतना कचरा भेज चुके हैं कि वहां कचरे का अंबार लग गया। इसी साल मलेशिया और वियतनाम ने प्लास्टिक के कचरे के आयात पर रोक लगा दी। चीन 2018 में ही ऐसा कर चुका है। लेकिन जब महासागरों में कचरे की बात आती है, तो कुछ शोध चुनिंदा एशियाई देशों की ओर अंगुली उठाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जहाजों और समुद्र में गैरकानूनी डंपिंग जैसे ऐसे कई मामले हैं जिनके बारे में हम ज्यादा नहीं जानते हैं। एक शोध 2015 में प्रकाशित हुआ था। उसमें चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम को महासागरों में पहुंचने वाले 50 फीसदी प्लास्टिक कचरे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। बहरहाल, सवाल है कि इस मसले का हल क्या है? क्या दुनिया इस बारे में सतर्क है?

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