• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 14 August, 2019 06:06 PM | Total Read Count 20
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भाकपा (माले) लिबरेशन ने सीबीएसई से फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की

पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने सीबीएसई की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के लिए शुल्क में की गई भारी वृद्धि को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की और फैसला वापस लेने की मांग की। पार्टी ने कहा कि यह सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत है कि वह शिक्षा और रोजगार का पूरी तरह से निजीकरण करना चाहती है।

भाकपा (माले) लिबरेशन ने मंगलवार को राज्यस्तरीय स्थायी समिति की बैठक के बाद जारी बयान में कहा, सरकार की प्राथमिकता सबसे निचले तबके को नुकसान पहुंचाना है। सरकार दलित हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन कमजोर वर्ग को अच्छी शिक्षा से वंचित करने की साजिश रच रही है।

उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा शुल्क में दोगुनी वृद्धि की है और उन्हें अब इसके लिए 750 रुपए की जगह 1,500 रुपए देने होंगे। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को अब 350 रुपए की जगह 1,200 रुपए देने होंगे। धुर वामपंथी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद -370 और 35ए को हटाने के केंद्र के फैसले की आलोचना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया।

 

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