• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 20 June, 2019 05:56 PM | Total Read Count 30
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उच्च शिक्षण संस्थानों में दो करोड़ अतिरिक्त सीटें होंगी: राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 2024 तक सीटों की संख्या डेढ़ गुना करने के लिए प्रयास कर रही है। इस पहल से युवाओं के लिए दो करोड़ अतिरिक्त सीटें उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए, उचित अवसर एवं वातावरण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।

सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को ऐतिहासिक केन्द्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने वर्तमान सरकार के पांच वर्षों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा पेश की। उन्होंने इस क्रम में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस प्रयास को और सशक्त बनाने के लिए ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ स्थापित करने का प्रस्ताव है।  

कोविंद ने कहा कि यह प्रस्तावित फाउंडेशन, केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों, विज्ञान प्रयोगशालाओं, उच्च शिक्षण संस्थानों और औद्योगिक संस्थानों के बीच सेतु का काम करेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए, उचित अवसर एवं वातावरण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए ‘प्रधानमंत्री इनोवेटिव लर्निंग प्रोग्राम’ की शुरुआत की जाएगी।

कोविंद ने कहा कि स्कूली स्तर पर ही बच्चों में टेक्नॉलॉजी के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। ‘अटल इनोवेशन मिशन’ के माध्यम से देशभर के लगभग नौ हज़ार स्कूलों में ‘अटल टिंकरिंग लैब’की स्थापना का कार्य तेज़ी से प्रगति पर है। इसी प्रकार, 102 विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों में ‘अटल इंक्यूबेशन सेंटर’बनाए जा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि विश्व के शीर्ष 500 शैक्षणिक संस्थानों में भारत के कई संस्थान अपना स्थान बना सकें, इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता तथा वित्तीय योगदान के जरिए प्रेरित किया जा रहा है।

कोविंद ने कहा कि सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इससे उन्हें नियुक्ति तथा शिक्षा के क्षेत्र में और अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण में हमारी युवा पीढ़ी की प्रभावी भागीदारी होनी ही चाहिए। बीते पांच वर्षों में, युवाओं के कौशल विकास से लेकर उन्हें स्टार्ट-अप एवं स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद देने और उच्च-शिक्षा के लिए पर्याप्त सीटें उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही स्कॉलरशिप की राशि में भी 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

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