• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 26 July, 2019 06:21 PM | Total Read Count 60
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जानें मानव रक्त के बारे में

रक्त हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अवयवों में से एक है, जिसके बिना मानव जीवन संभव नहीं है। रक्त में मैट्रिक्स तरल दशा में होते हैं जिसे प्लाज्मा कहते हैं। इसी प्लाज्मा में श्वेत रक्त कणिकाऍ एवं लाल रंक्त कणिकाऍ पाये जाते हैं। रक्त में प्लाज्मा 55% तथा कणिकाऍ 45% तक उपस्थित होते हैं।

रक्त प्लाज्मा

रक्त प्लाज्मा हल्के पीले रंग का क्षारीय द्रव है। जिसमें 90% जल तथा 10% अन्य पदार्थ होते हैं। इसमें प्रोटीन की सबसे अधिक मात्रा होती है। प्रोटीन के कारण ही रक्त चिपचिपा होता है। इसमें एल्ब्यूमिन, ग्लोव्यूमिन, तथा फाइब्रिनोजन पाया जाता है जो प्रोटीन के ही रूप हैं। फाइब्रिनोजन रक्त के थक्का जमने में काम करता है तथा रक्त को बहने से रोकता है। प्लाज्मा में कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं पोटेशियम के कार्बोनेट, फास्फेट एवं क्लोराइड उपस्थित रहते हैं। इसके अलावा इसमें प्रोथौम्बिन, विटामिन, एन्जाइम तथा एन्टीबॉटीज होते हैं।

रक्त कणिकाएं

श्वेत रक्त कणिकाएं ये संख्या में लाल रक्त कणिकाओं से काफी कम होती हैं। लगभग 625 लाल रक्त कणिकाओं के पीछे मात्र एक श्वेत रक्त कणिकाएं होती हैं। इसका निर्माण अस्थि मज्जा एवं लसीका ग्रंथियों में होता है। श्वेत रक्त कणिकाओं में भक्षण की क्षमता होती है। ये बाहरी बस्तुओं, जीवाणुओं, विषाणुओं आदि का भक्षण कर लेते हैं। इस प्रकार ये शरीर को रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।

लाल रक्त कणिकाऍ रक्त में इनकी संख्या सर्वाधिक होती है। ये नन्ही-नन्ही गोल व चपटी टिकियों के समान होती हैं। इनका मुख्य कार्य ऑक्सीजन और कार्वन डाइ ऑक्साइड का परिवहन करना है। इनमें हीमोग्लोबिन उपस्थित रहता है जो गैसों को आदान-प्रदान में मदद करता है। इनका निर्माण अस्थि मज्जा में एवं विनाश प्लीहा में तथा अल्प मात्रा में यकृत में होता है।

बिम्बाणु इन्हें थ्रोम्बोसाइटस भी कहते हैं। इनका आकार लाल रक्त कणिकाऍ से भी छोटा होता है। ये रक्त को जमने में सहायता करते हैं। किसी-किसी रोग की स्थिति में इनकी संख्या अत्यधिक कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में त्वचा में से रक्त का निस्रवण होने लगता है जिसके कारण त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते पड जाते हैं।

रक्त (blood) के बारे में रोचक तथ्य!!

  • मानव के शरीर में खून की मात्रा, कुल वजन का 7% होता है। खून की एक बूंद में 250 मिलियन कोशिकाएं होती हैं।
  • एक मनुष्य के शरीर में लगभग 05-06 लीटर रक्त रहता है।
  • हमारे शरीर में पाए जाने वाला रक्त का 70% भाग शरीर में लाल रक्त कणिकाऍ के अंदर मौज़ूद होता है।
  • भारत में हर 5 सेकेंड में किसी न किसी को खून की आवश्यकता होती है। दुनिया ने हर तीसरे व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी खून की आवश्यकता पड़ती है।
  • स्वस्थ शरीर में खून 400 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ता है, अगर पूरे दिन की औसत निकाले, तो खून लगभग 96,500 km की दूरी तय करता है।
  • जानवरों में पाया जाने वाला रक्त कई प्रकार का हो सकता है, जैसे कि गायों में लगभग 800, कुत्तो में 13 और बिल्लियों में 11 तरह का रक्त पाया जाता हैं। जबकि मनुष्य के शरीर में रक्त केवल 4 तरह (O, A, B, AB) का होता हैं।
  • अगर मच्छरों की बात करें, तो केवल सिर्फ मादा मच्छर ही खून चूसती है और वह अपने वजन से 3 गुना ज़्यादा खून पी सकती है। लेकिन नर मच्छर शाकाहारी होते है, ये सिर्फ फूलों का रस ही पीते हैं।
  • बच्चों के शरीर में सिर्फ 1 कप यानी 250 मिलीमीटर खून होता है और एक जवान आदमी में लगभग 5 लीटर खून हो सकता है।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं खून नहीं दे सकती है।
  • जापान में लोग ब्लड ग्रुप के माध्यम से ही आदमी के व्यक्तित्व का अंदाज़ा लगा लेते है।
  • बोरोरो प्रजाति, ब्राजील में पाई जाती है और इस प्रजाति की खास बात यह है कि यहाँ के सभी लोगों का रक्त ग्रुप ‘O’ है।
  • जब हम आसमान की तरफ देखते है, तो हमारी आँखो के सामने सफेद-सफेद से डॉट्स घूमने लगते है। ये हमारे श्वेत रक्त कणिकाएं होते है।

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