• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 09 July, 2019 07:34 PM | Total Read Count 14
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मरीन इंजीनियरिंग कोर्स

मरीन इंजीनियरिंग पेशे का अपना आकर्षण है। इसमें देश-विदेश में घूमने की सहूलियत और इंजीनियरिंग की दूसरी ब्रांचेस के मुकाबले अच्छी तनख्वाह और बहुत अच्छी जि़ंदगी मिलती है। साल के छह महीने जहाज पर रहना और बाकी महीने अपनी जिंदगी जीना। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस क्षेत्र में आ रहे हैं। खासकर वे युवा, जो थोड़े वक्त में अच्छा पैसा कमाने की चाह रखते हैं, जल्द से जल्द अपना करियर स्थापित करना चाहते हैं।

मूल योग्यता:

  • डिप्लोमा कोर्स के लिए - डिप्लोमा प्रोग्राम में प्रवेश पाने के लिए आपको 10 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
  • यूजी पाठ्यक्रमों के लिए - इस पाठ्यक्रम के लिए अनिवार्य विषयों के रूप में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित के साथ 10 + 2 की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता आवश्यक है। यदि आपने मरीन इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा किया है, तो आप मरीन इंजीनियरिंग में यूजी कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपकी आयु 17-25 वर्ष होनी चाहिए।
  • प्रवेश परीक्षा - JEE Main 2019, IMU CET 2019
  • पीजी कोर्सेस के लिए - एम.टेक के लिए निर्धारित योग्यता परीक्षा मरीन इंजीनियरिंग में बी.टेक उत्तीर्ण होगी।

समुद्री इंजीनियरों की भूमिका:

  • मरीन इंजीनियर एक कुशल पेशेवर हैं, जो वाहनों और संरचनाओं के डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में संलग्न हैं, उदाहरण के लिए पानी के आसपास या आसपास उपयोग की जाने वाली संरचनाएँ - जहाज और नावें।
  • उनके पास जहाजों की मशीनरी के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदारियां हैं जिनमें भाप टरबाइन, गैस टर्बाइन और इंजन रूम शामिल हैं।
  • समुद्री अभियंता जहाज के कप्तान और किनारे के कर्मियों के बीच संपर्क का काम करते हैं ताकि जहाज की दक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, जहाज के अन्य इंजीनियरों, यांत्रिकी और चालक दल के सदस्यों की निगरानी और निगरानी करता है।
  • मरीन इंजीनियर बिजली उत्पादन, गैस और तेल उद्योग पर भी काम करते हैं। आजकल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां ज्वारीय बिजली जनरेटर और अधिक के उपयोग से बिजली उत्पादन में अपनी रुचि दिखा सकती हैं।

प्रमुख संस्थान:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), मद्रास
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), खड़गपुर
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), कर्नाटक
  • महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ नेवल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (MANET), पुणे
  • मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता
  • वी. रमन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, भुवनेश्वर
  • इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, दिल्ली
  • इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, मुंबई
  • इंडियन मेरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई
  • कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
  • सीसीईटी, चंडीगढ़
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पोर्ट मैनेजमैंट, कोलकाता

जॉब के अवसर:

मरीन इंजीनियर अपना करियर शिप पर फोर्थ इंजीनियर या थर्ड असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा इंजन प्रोडक्शन फर्म्स, शिप बिल्डिंग फर्म्स, रिसर्च बॉडीज, शिप डिजाइन फर्म्स या भारतीय नौसेना में भी काम करने के मौके मिल सकते हैं। बंदरगाहों पर स्थित मरीन वर्कशॉप्स में भी मरीन इंजीनियर्स की जरूरत होती है। अनुभवी मरीन इंजीनियर्स की आईटी सेक्टर, कंसल्टेंसी फर्म्स, कंस्ट्रक्शन कंपनीज, पावर सेक्टर, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में भी अच्छी मांग है।

चुनौतियां:

  • इस प्रोफेशन का कड़वा सच यह है कि मरीन इंजीनियर्स को अपने घर-परिवार से महीनों दूर रहना पड़ता है।
  • कई बार तो ये छह महीने से ज्यादा वक्त तक घर से बाहर रहते हैं।
  • आम तौर पर मरीन इंजीनियरों की शिकायत रहती है कि वे अपने परिवार को समय नहीं दे पाते। खासकर शादीशुदा लोगों को काम और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने में दिक्कतें पेश आती हैं।
  • इसके लिए जरूरी है कि आपका परिवार सपोर्टिव हो। चूंकि मरीन इंजीनियर का जलपोतों से जुड़ा काम है, इसलिए वे हर समय जलपोत पर ही रहते हैं।
  • वैसे तो इंजीनियरों के काम की अवधि आठ घंटे की ही होती है लेकिन इन्हें तमाम मौकों पर शिफ्ट-वाइज भी काम करना पड़ता है।

वेतन:

इस क्षेत्र में प्रारंभिक रूप में भी काफी अच्छा वेतन पैकेज होता है। मर्चेंट नेवी में बतौर जूनियर इंजीनियर काम करने वाला व्यक्ति भी 25000 से 30000 रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है। एक मरीन इंजीनियर शुरुआती स्तर पर भी 7.5 से 10 लाख रुपए प्रतिवर्ष अर्जन करता है। रैंक बढ़ने पर यह कमाई डेढ़ लाख से बढ़कर छह लाख या फिर उससे अधिक भी हो सकती है। अनुभव के बाद दूसरे सेक्टर्स में भी अच्छे पैसे मिलते हैं।

 

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