• [EDITED BY : श्रीशचन्द्र मिश्र] PUBLISH DATE: ; 22 July, 2018 09:35 AM | Total Read Count 914
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सुपारी का कैसा खतरनाक खेल?

सुपारी-आकार में भी और नाम से भी निरीह लेकिन अंडरवर्ल्ड में इसका खौफ गजब का है। अपराध जगत में सुपारी लेने या देने का मतलब सिर्फ डराने धमकाने तक ही सीमित नहीं है। भाड़े के हत्यारों से हत्या कराने की परंपरा तो हर देश में काफी पुरानी है। लेकिन सुपारी हत्या यानी सुपारी लेकर हत्या करने की व्यवस्था को एक संगठित अपराध की शक्ल देने की पहल मुंबई ने की है। यह सुपारी सांकेतिक है और इसे लेकर किसी  को डराने या मारने की कीमत लाखों करोड़ों में वसूली जाती है। 

धार्मिक अनुष्ठानों में घर-घर में इस्तेमाल होने वाली और पान के शौकीनों का जायका बदलने वाली निरीह सी सुपारी कैसे हत्या जैसे जघन्य अपराध के शब्दकोष का अहम हिस्सा बन गई? इसकी एक दिलचस्प कहानी है। मुंबई के अंडरवर्ल्ड इतिहास को लिपिबद्ध करने वाले हुसैन जैदी ने अपनी किताब ‘डोंगरी टू दुबई’ में बताया है कि सुपारी को सांकेतिक रूप से हत्या का ठेका मिलने की शुरुआत भीम ने की जो माहिम इलाके का राजा और माहिमी समुदाय का एक छत्र नेता था। उसने एक दिलचस्प रिवाज अपना रखा था। जब भी उसे किसी को कोई मुश्किल काम देना होता था तो वह माहिम किले में बुला कर बैठक करता और खास योद्धाओं को विशेष दावत देता। दावत के बाद एक बड़े थाल के बीचो बीच सुपारी रख दी जाती थी। जो सुपारी उठाता था उसे ही वह काम करना पड़ता था।

हत्या के लिए आज के दौर में सुपारी देने की शुरुआत गैंगस्टर हाजी मस्तान ने 1969 में की जब उसने प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टर यूसुफ पटेल को मरवाने के लिए पाकिस्तान के दो नागरिकों को दस हजार रुपए दिए जो उन दिनों अचछी खासी रकम मानी जाती थी। बहरहाल पटेल के अंग रक्षकों ने इस अभियान को नाकाम कर दिया।

सुपारी देकर किसी की हत्या कराने या उसे डराने धमकाने के कुछ नियम हैं जिनका दोनों पक्षों को पालन करना होता है। सुपारी किलर एक पक्ष है और सुपारी देने वाला दूसरा। सुपारी देने वाला अक्सर बिचौलिए की मदद लेता है। बिचौलिया सुपारी किलर की व्यवस्था करता है। सुपारी देने वाले के लिए शिकार का फोटो देना तो अनिवार्य है ही, साथ ही उसे यह जानकारी भी देनी होती है कि शिकार की दिनचर्या क्या है और वह कहां उपलब्ध हो सकता है।  ज्यादातर मामलों में कुछ दिन तक शिकार की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। 12 अगस्त 1997 को टी सीरिज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या करने वालों ने एक महीने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और पता किया कि किस दिन वे अकेले शिव मंदिर जाएंगे। एक बार सुपारी दिए जाने के बाद उसे वापस नहीं लिया जाता। शुरू में तस्कर और गैंगस्टर अपने विरोधियों का खात्मा करने के लिए ही अमूमन सुपारी हत्या का सहारा लिया करते थे। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया। उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और बिल्डरों से वसूली के लिए इस औजार का इस्तेमाल होने लगा। सुपारी सिर्फ हत्या के लिए ही नहीं, डराने धमकाने के लिए भी इस्तेमाल की गई। इस चलन में औद्योगिक नगरी मुंबई में तो अपना जाल फैलाया ही, इसे कई हिंदी फिल्मों का आकर्षण भी बना दिया। आमतौर पर भाड़े पर हत्या करने वाले बालीवुड, रियल एस्टेट व होटल या केबल नेटवर्क से जुड़े उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो अंडरवर्ल्ड तक पैसा नहीं पहुंचाते। इसके लिए माफिया की तरफ से उन्हें सुपारी दी जाती है। 

अक्सर सुपारी एक माफिया दूसरे माफिया के खिलाफ भी देता रहा है। मुंबई में हाजी मस्तान के पराभव के बाद जब दाऊद इब्राहीम का अंडरवर्ल्ड में दबदबा बढ़ने लगा तो उसने गैंगस्टर छोटा राजन के गुरू बड़ा राजन से अमीरजादा नवाब खान को मारने में मदद मांगी। दाऊद के बड़े भाई की हत्या में उसका हाथ था। बड़ा राजन ने 24 साल के बेरोजगार डेविड परदेसी को सुपारी दी। डेविड परदेसी ने मुंबई सेशन कोर्ट में नवाब खान को गोली मार कर सननसी मचा दी। उसे इस काम के लिए पचास हजार रुपए दिए गए थे। 
पत्रकार भी माफिया के निशाने पर रहे। उन्नीस सौ सत्तर के दशक में पत्रकार एमपी अय्यर को रास्ते से हटाने के लिए अंडरवर्ल्ड एक जुट हुआ। अयूब खान लाला को उसे मारने की सुपारी दी गई। लाला ने अय्यर की कार में तकनीकी छेड़छाड़ कर दी। पनवेल जाते हुए अय्यर की गाड़ी पेड़ से टकरा गई और वह हादसा जानलेवा साबित हुआ। 

सुपारी देकर हत्या करने के कुछ नियम हैं जिनका पालन किया जाता है। सुपारी लेने वाला कभी यह नहीं पूछता कि उसे जिस आदमी के लिए सुपारी दी गई है, उसे क्यों मरवाया जा रहा है। अब सुपारी लेकर हत्या कराना सस्ता भी हो गया है। उन्नीस सौ अस्सी के दशक में जो काम पचास हजार रुपए में होता था वह अब कम में होने लगा है। गैंगस्टर और उनके शार्पशूटर पर मुंबई पुलिस का शिकंजा कसने के बाद बिहार व उत्तर प्रदेश के छोटे इलाकों से आए बेरोजगार युवकों से यह काम कराया जा रहा है। 
मुंबई पुलिस का मानना है कि भाड़े पर हत्या करने के लिए आजमगढ़ से दो हजार से पचास हजार रुपए तक में शार्प शूटर मिल जाते हैं। आजमगढ़  के सराय मीर गांव के अबु सलेम को भी दाऊद इब्राहीम ने इस्तेमाल किया था। बाद में उसने अंडरवर्ल्ड में अपने खुद के लिए जमीन तैयार कर ली। वह अपने काम के लिए आजमगढ़ से युवकों को बुलाता, काम का पैसा देता और काम होते ही उन्हें वापस लौटा देता। ये लोग कम पैसे में मिल जाते थे और उनका कोई पुलिस रिकार्ड न होने की वजह से उन्हें पकड़ना मुश्किल होता था। भाड़े पर हत्या कराने के लिए दाऊद भी उत्तर भारत के लोगों को चुनता था। 

तरह-तरह से चलती रही सुपारी
सुपारी यानी पैसा देकर हत्या कराने का सिलसिला अलग-अलग रूप में दुनिया भर में सदियों से चलता रहा है। वजह भले ही बदलती रही हो। आपराधिक कारणों से सुपारी का इस्तेमाल तो होता ही है, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित करने को भी सुपारी का एक वैध रूप माना जाता है। यह बेशक कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है। स्वाभाविक है कि जब कोई डकैत या आंतकवादी अथवा खतरनाक अपराधी पकड़ में नहीं आता तो उसका सुराग देने के लिए या उसे जिंदा अथवा

मुर्दा पकड़वाने के लिए इनाम घोषित कर दिया जाता है। लेकिन इसी के समानांतर कुछ और चलन रहे हैं।
 यह है सामाजिक या धार्मिक संगठन द्वारा किसी व्यक्ति को जान से मार देने के लिए इनाम घोषित करने का। सलमान रुशदी को मारने के लिए इनाम की रकम बार बार संशोधित हो रही है। इस्लाम विरोधी फिल्म बनाने वाले का सिर कलम के लिए इनाम घोषित है। इस तरह के इनामों के बीच कुछ विचित्र किस्म के काम कराने के लिए भारी भरकम इनाम उछालने की प्रवृत्ति भी जोर पकड़ती रहीं है। चीन के एक अरबपति की समलैगिंक बेटी से प्रेम जताने वाले की हत्या के लिए साढ़े छह करोड़ डालर की पेशकश कर दी। ऐसे नमूनों में भारत भला कहां पीछे रहने वाला है। वरिष्ठ न्यायविद रामजेठमलानी ने चार साल पहले भगवान राम को खराब पति बता कर अच्छा खासा बवाल बचा दिया। जबलपुर के महामंडलेश्वर स्वामी श्यामदास महाराज ने उस व्यक्ति को पांच लाख रुपए देने का एलान कर दिया है जो राम जेठमलानी के मुंह पर थूकेगा। 

धर्म विरोधी टिप्पणी के लिए किसी की जान ले लेने का फतवा जारी करने का चलन इस्लामी धर्मगुरुओं में आम रहा है। लेकिन अन्य कारणों में भी इसका इस्तेमाल होता रहा है। इसका इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प रहा है। 1695 में समुद्री डकैत हेनरी एवरी ने अन्य डकैतों के साथ मिल कर मक्का जा रहे दो जहाजों- गंज-ए-सवाई व फथ मोहम्मद से करीब छह लाख पौंड के जेवरात लूट लिए। यात्रियों में एक मुगल बादशाह औरंगजेब की रिश्तेदार थी। नाराज औरंगजेब ने पूरे देश में ईस्ट इंडिया कंपनी के कारोबार पर पाबंदी लगा दी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपराधियों पर एक हजार पौंड का इनाम घोषित कर दिया। यह अलग बात है कि हेनरी एवरी को कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। 

1718 में वर्जीनिया आइलैंड के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने ब्लैक बियर्ड के नाम से कुख्यात डकैत एडवर्ड टीच और उसके गिरोह को पकड़वाने के लिए इनाम घोषित किया। टीच पर सौ पौंड का इनाम था। उसके गिरोह के हर कमांडर पर 40-40 पौंड का और अन्य सदस्यों पर 20-20 पौंड का इनाम रखा गया। टीच जब पकड़ा गया तो उसका सिर काट कर नाव पर लटका दिया गया।
विद्रोह दबाने के लिए इनाम घोषित करने का इतिहास भी काफी पुराना है। 1835 से 1837 के बीच मैक्सिकों के सोनोरा व चिहुआहुआ राज्यों में हर अपाचे योद्धा या उस समुदाय के बच्चे अथवा महिला को मारने पर 25 से सौ पीसो (मैक्सिको की मुद्रा) दिए जाते थे।

अमेरिका ने तो अति वांछित अपराधियों को पकड़वाने के लिए इनाम घोषित करने के कई रिकार्ड कायम किए। 1870 के दशक में बुच कैसिडी के गिरोह ने ट्रेनों और बैंकों में लूटपाट कर पूरे अमेरिका में दशहत फैला दी थी। बुच और उसके गिरोह के सदस्यों को मारने के लिए अमेरिकी सरकार ने दस हजार डालर का इनाम घोषित कर दिया था। 1903 से 1934 के बीच बैंकों को लूटने वाले जॉन डिलीगर के हैरत अंग्रेज कारनामों पर हालीवुड में कई फिल्में भी बनीं। पर जिन दिनों उसका आतंक चरम पर था एफबीआई ने जान को जिंदा या मुर्दा पकड़वाने के लिए दस हजार डालर का इनाम रखा हुआ था। 

इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का सिर कलम करने पर अमेरिका ने ढाई करोड़ डालर का इनाम रख छोड़ा था। यह पुरस्कार हालांकि किसी को मिल नहीं पाया क्योंकि सद्दाम पकड़ा गया और अदालती नाटक के बाद उसे मार दिया गया। लेकिन उसके दो बेटों कुसय और उदय को सुराग देने वालों को तीन करोड़ डालर मिल गए। उसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए घोषित ढाई करोड़ डालर का इनाम भी बेकार गया। छापामार अभियान में अमेरिकी कमांडों ने उसे पाकिस्तान से उठा कर मार दिया। 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले की साजिश रचने वाला रमजी यूसुफ जब पाकिस्तान में गिरफ्तार हुआ तो उसका सुराग देने वाले को बीस लाख डालर दिए गए।

भारत में पुलिस या विभिन्न राज्य सरकारों ने आम तौर पर डाकुओं को पकड़ने के लिए ही इनाम घोषित किया। चंबल का शेर कहे जाने वाले डाकू मानसिंह पर सबसे ज्यादा एक हजार रुपए का इनाम रखा गया। 1955 में गोरखा सैनिकों ने उसे मार डाला। एथलीट से डाकू बना पान सिंह तोमर 1981 में जब मुठभेड़ में मारा गया, उस पर दस हजार रुपए का इनाम था। अपहरण और चंदन की तस्करी के लिए कुख्यात वीरप्पन पर चालीस लाख रुपए का इनाम था। सुदेश पटेल उर्फ बालखड़िया पर मध्यप्रदेश सरकार ने इनाम 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपया कर दिया। स्थानीय पुलिस ने भी उसे पकड़वाने के लिए इनाम की राशि बढ़ा कर पांच लाख रुपए कर दी। फिर भी वह गिरफ्त से बाहर ही रहा।

इस तरह के इनाम घोषित करने का तो फिर भी कोई आधार समझ में आता है। अपराधियों को पकड़ने के लिए सरकार या पुलिस द्वारा इनाम देना स्वाभाविक लगता है। लेकिन इस चलन का दायरा बढ़ा कर कुछ लोगों और संगठनों ने इसे रोचक भी बना दिया है। सोमालिया स्थित आतंकवादी संगठन अल शबाब के खिलाफ जब अमेरिकी सरकार ने इनाम की घोषणा की तो उसे उम्मीद भी नहीं रही होगी कि इसका उसे जवाब मिलेगा। जून, 2012 में अल शबाब के फवाद मोहम्मद खलफ ने घोषणा की कि जो ‘मूर्ख’ ओबामा का ठिकाना बताएगा उसे दस ऊंट और ‘बुढ़िया’ हिलेरी क्लिटंन का पता बताने वालों को दस चूजे और दस मुर्गे इनाम के रूप में दिए जाएंगे। बेल्जियम में 2012 में साल बुर्के पर रोक लगाई गई है। 
बेल्जियम की एक राजनीतिक पार्टी ब्लाम्स बेलांग ने उस व्यक्ति को ढाई सौ पौंड देने का एलान किया जो किसी महिला को बुर्का पहने देखेगा। 2009 के शुरू में माइक्रोसाफ्ट ने काफिकर वार्म की रचना करने वाले के लिए ढाई लाख डालर का इनाम रखा। जार्ज बुश और बराक ओबामा को पकड़ने के लिए एक करोड़ डालर का इनाम घोषित करने वाले लार्ड अहमद को अप्रैल 2012 में लेबर पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया। पोर्न प्रकाशक लैरी फिंट ने 2012 में ‘वाशिंगटन पोस्ट’ और ‘यूएसए टुडे’ में पूरे पेज का विज्ञापन देकर एलान किया कि जो भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिट रोमनी के टैक्स रिटर्न और दूसरे देशों में उनकी संपत्ति का ब्योरा देगा उसे दस लाख डालर का इनाम दिया जाएगा।

इंसान ही नहीं जानवर भी इस बीमारी से नहीं बच पाए हैं। जुलाई 2012 में चीन के शहर लियूझोऊ में आदमखोर पिरान्हा मछली को मारने के लिए 157 डालर का इनाम तय किया गया। इनाम के लालच में लोगों ने हजारों मछलियों को मार डाला जिनमें ज्यादातर पिरान्हा नहीं थी। लिहाजा इनाम की घोषणा वापस ले ली गई। तमिलनाडु के धर्मपुरी में कुछ समय पहले स्थानीय नेताओं ने एक नर पिशाच को खत्म करने के लिए एक लाख रुपए देने का उस समय एलान किया जब पूरे इलाके में अफवाह फैल गई कि कोई शैतान पशुओं का खून पी रहा है।
 

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