• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 07 September, 2019 07:35 AM | Total Read Count 345
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रोजगार, रुपया, शेयर बाजार सबका संकट

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों का आर्थिकी पर ध्यान बनने लगा है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने या परमाणु युद्ध छेड़ देने या पी चिदंबरम और डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी जैसा कोई मुद्दा लोगों का ध्यान नहीं भटका पा रहा है। इन पर चर्चा के बाद घूम फिर कर लोग फिर आर्थिकी की बात करने लग रहे हैं। रोजगार खत्म हो गया है, 2018 से हर तिमाही में विकास दर का जो गिरना शुरू हुआ है वह थम नहीं रहा है। बजट के बाद शेयर बाजार में जो गिरावट शुरू हुई वह नहीं रूक रही है और रुपया तो इतना गिरा है कि डॉलर की कीमत फिर 72 रुपए के पास पहुंच गई है। अगर लोगों को ध्यान हो तो 2014 से पहले रुपए की गिरती कीमत पर भाजपा के नेता कहा करते थे कि जैसे जैसे रुपए की कीमत गिरती है वैसे वैसे देश की इज्जत गिरती है। पर अब उलटा होने लगा है। अब रुपए की कीमत गिर रही है और देश की इज्जत बढ़ रही है। 

बहरहाल, आर्थिकी की हालत को समझने के लिए कुछ छोटे छोटे तथ्यों पर नजर डालें तो बिना व्याख्या के सब समझ में आ जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में मुंबई में मंगल प्रभात लोढ़ा को अपनी पार्टी का अध्यक्ष बनाया है। उनकी बड़ी रियल इस्टेट की कंपनी है। उनकी कंपनी मैक्रोटेक डेवलपर्स ने अपने चार सौ कर्मचारियों को हटा दिया है। कंपनी के ऊपर साढ़े 25 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। 

देश की सबसे बडी ऑटोमोबाइल कंपनी मारूति ने सात और नौ सितंबर को दो दिन के लिए अपने प्लांट बंद करने और नो प्रोडक्शन का ऐलान किया है क्योंकि उसकी गाड़ियों की बिक्री में 30 फीसदी से ज्यादा तक की गिरावट आ गई है। देश में 270 से ज्यादा गाड़ियों के शोरूम बंद हो गए हैं और ऑटोमोबाइल के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के संगठन का कहना है कि सिर्फ गाड़ियों की मैन्यूफैक्चरिंग लाइन में दस लाख लोगों के रोजगार जाने वाले हैं। ढाई लाख लोगों का रोजगार खत्म हो गया है। बड़े मालवाहक ट्रक और दूसरे वाहन बनाने वाली कंपनियां अपनी गाड़ियों पर बड़ी छूट दे रही हैं फिर भी उनको खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इस बीच ट्रांसपोर्टर्स के एसोसिएशन ने नई गाड़ियां नहीं खरीदने का ऐलान किया है। टाटा मोटर्स, वोल्वो, अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों की बिक्री में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट है। एक तरफ बड़े मालवाहक वाहनों की खरीद कम हो रही है तो दूसरी ओर कारोबार में ऐसी मंदी है कि इन गाड़ियों का किरए पर चलना भी कम हो गया है। 

रियल इस्टेट पिछले तीन साल से लगातार गिरावट झेल रहा है। आम्रपाली कंपनी दिवालिया हो गई और उसके मालिक जेल में हैं। यूनिटेक दिवालिया हो गई और उसके मालिकों को भी जेल की हवा खानी पड़ी। जेपी समूह के प्रोजेक्ट अब जैसे तैसे एनबीसीसी को पूरा करने के लिए दिया जा रहा है। इस सेक्टर की एक बहुत बड़ी कंपनी एचडीआईएल भी दिवालिया होने की कगार पर है। सिक्का समूह की हालत खराब है और बताया जा रहा है कि इस सेक्टर की छह और बड़ी कंपनियां दिवालिया होने की स्थिति में हैं। देश के 30 बड़े शहरों में करीब 13 लाख अनबिके मकान हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, जहां डीडीए के एक फ्लैट के लिए सौ-सौ लोग खरीददार होते थे वहां कई बार बेचने की कोशिश के बावजूद डीडीए के फ्लैट्स नहीं बिके हैं। 

भारत का कपड़ा उद्योग सीधे या परोक्ष रूप से करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। पर नोटबंदी के बाद से इसकी हालत लगातार बिगड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक सूरत में भारत के कुल कपड़ा निर्माण का 40 फीसदी बनता था पर वहां इसका उत्पादन आधा रह गया है। नोटबंदी से ठीक पहले सूरत में चार करोड़ मीटर कपड़ा रोज बनता था, जो नोटबंदी के बाद घट कर ढाई करोड़ मीटर रह गया है। नोटबंदी से पहले सूरत के कपड़ा उद्योग में 15 लाख से ज्यादा लोग काम करते थे पर अब वहां कामगारों की संख्या चार से साढ़े चार लाख के बीच रह गई है। 

यह सिर्फ कुछ सेक्टर्स की बात नहीं है, जहां कारोबार में मंदी आई है और रोजगार खत्म हुआ है। लगभग हर सेक्टर में यहीं स्थिति है। आठ कोर सेक्टर में विकास दर पिछले साल की जुलाई के सात फीसदी के मुकाबले इस साल जुलाई में दो फीसदी रहा। सरकार की अपनी कंपनियों की हालत खराब है। बीएसएनएल के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं है। कंपनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। एयर इंडिया की ऐसी हालत है कि उसने तेल का भुगतान नहीं किया तो छह हवाईअड्डों पर उसे तेल मिलना बंद हो गया। दो और हवाईअड्डों ने भी उसे नोटिस दे दिया है। सरकार इसे बेचने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है पर अभी तक कामयाबी नही मिली है। रेलवे से भारत सरकार करीब तीन लाख लोगों को हटाने वाली है इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। 

अगर शेयर बाजार को आर्थिकी की सेहत को एक छोटा सा ही पैमाना माना जाए तो उससे भी हालात का अंदाजा लगता है। आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर बाजार में 770 अंक की गिरावट हुई। जो शेयर बाजार कुछ समय पहले 40 हजार से ऊपर चला गया था वह 36 से 37 हजार के बीच झूल रहा है। इसमें दस फीसदी की गिरावट आई है और निवेशकों को लाखों करोड़ रुपए डूबे हैं। पोर्टफोलियो निवेशकों को सरचार्ज से राहत देने के वित्त मंत्री की घोषणा के बाद भी निवेशकों का भागना रूका नहीं है। शेयर बाजार के साथ साथ रुपए की सेहत भी लगातार खराब हो रही है। कई घरेलू और बाहरी कारणों से प्रभावित होकर रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे डॉलर के दाम 72 रुपए तक पहुंच गए हैं। 

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