• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 03 August, 2019 05:55 AM | Total Read Count 266
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घोटालों की तो चर्चा ही नहीं

कंपनियां डूब रही हैं, घाटा बढ़ रहा है, विकास दर कम हो रही है, रोजगार का संकट है, बाजार में मांग घट रही है, कारोबारी आत्महत्या कर रहे हैं पर डंका इस बात का बज रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था पांच साल में पांच खरब डॉलर की हो जाएगी। अभी भारत की अर्थव्यवस्था 27 सौ अरब डॉलर की है, जिसके पांच-छह साल में पांच हजार अरब डॉलर होने की बात कही जा रही है। इस पर पी चिदंबरम का कहना है कि मैजिक ऑफ कंपाउंडिंग से ऐसा अपने आप हो जाएगा। पिछले तीस साल से इसी तरह पांच से आठ साल के भीतर अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना होता रहा है। 

तभी ऐसा लग रहा है कि यह गुब्बारा इसलिए फुलाया जा रहा है ताकि आर्थिक क्षेत्र में हो रहे घोटालों और मंदी पर से लोगों का ध्यान हटाया जाए। वित्तीय व बैंकिंग सेक्टर में एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं पर उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है क्योंकि उसकी चर्चा ही नहीं हो रही है। भारत की सबसे बड़ी हाउसिंग कंपनी दिवान हाउसिंग दिवालिया होने की कगार पर है। कंपनी ने 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज दिया है, जिसमे से बताया जा रहा है कि 31 हजार करोड़ रुपए का कर्ज उसने मुखौटा यानी फर्जी कंपनियों को दिया है। यह घोटाला किसकी मिलीभगत से हुआ है? इससे पहले ऐसे ही आईएलएंडएफएस के साथ हुआ था। उसने एक लाख करोड़ रुपए डूबाए हैं। इस मामले में रिजर्व बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं पर कहीं इस बात की चर्चा नहीं है। 

कुछ दिन पहले तक माना जाता था कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक को जो चूना लगाया है पर बैंकिंग का सबसे बड़ा घाटा है। वह घाटा 14 हजार करोड़ रुपए का है।  पर अब भूषण स्टील एंड पावर का 20 हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि उसको कंपनी ने साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है और इलाहाबाद बैंक ने कहा है कि उसके साथ 17 सौ करोड़ रुपए की ठगी हुई है। इनके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक से भी धोखाधड़ी की खबर है। गंभीर अपराध की छानबीन करने वाली संस्था एसएफआईओ ने इस मामले में 70 हजार पन्नों का आरोपपत्र तैयार किया है। 

पिछले दिनों एक खबर आई कि रिलायंस जियो ने सरकार को साढ़े चार हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है। कंपनी ने तीन साल पहले जब सर्विस लांच की तो उसने उपयोक्ताओं से 15 सौ रुपए जमा कराए और उनको हैंडसेट दिया। कहा गया कि बाद में ये पैसे लौटा दिए जाएंगे। लेकिन पैसे नहीं लौटाए गए। खबर के मुताबिक अगर कंपनी उपयोक्ताओं को ऐसे हैंडसेट देने की बजाय इनकी बिक्री करती तो साढ़े 12 फीसदी की दर से करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपए का टैक्स देना होता, जो कंपनी ने नहीं दिया है। मुंबई विधानसभा में विपक्ष के नेता ने यह रकम वसूलने की मांग की है।

 

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