• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 31 August, 2019 06:30 AM | Total Read Count 298
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देश के आर्थिक हालात से चिंता

कई जानकार युद्ध होने की स्थिति में आर्थिक स्थिति बिगड़ने की चिंता में हैं। इसका कारण यह है कि इस समय देश की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। सरकार को अपनी जरूरतों के लिए रिजर्व बैंक के आरक्षित कोष से पैसा लेना पड़ा है। पिछले 70 साल में यह पहली बार हुआ है। सरकार विनिवेश के जरिए पैसा जुटाने में लगी है। बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं की स्थिति खराब है। हर तिमाही में विकास दर घटती जा रही है। अगर युद्ध हुआ तो विकास दर और कम होगी। सरकार इस प्रयास में लगी है कि लोग खर्च करें ताकि बाजार में मांग बढ़े। पर युद्ध होने की स्थिति में कौन खर्च करेगा? सरकार की अपनी जो खर्च की प्रतिबद्धताएं हैं उनमें भी कटौती होगी। क्योंकि सरकार को और ज्यादा मात्रा में गोला बारूद खरीदना होगा। उसके लिए अतिरिक्त बजट की मंजूरी देनी होगी। तभी यह अंदेशा जताया जा रहा है कि युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत भारी पड़ेगा। 

पर दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि युद्ध किस तरह का होता है इस पर आर्थिक स्थिति निर्भर करेगी। भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध ऐसा नहीं हो सकता है, जो महीनों या बरसों तक चले। अभी दोनों देशों की सेनाएं अपनी अपनी सीमा में हैं। कारगिल जैसा भी कोई मामला नहीं है कि भारत को अपनी कोई चौकी या अपना इलाका खाली कराना है। हां, अगर भारत यह सोचे कि युद्ध में वह पाक अधिकृत कश्मीर तक जाए और उसे वापस हासिल करे तब अलग बात है। अगर ऐसा नहीं होता है तो दोनों देशों की सेनाएं अपनी अपनी सीमा में रह कर ही लड़ेंगी। 

भले भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत कह रहे हैं कि भारतीय सेना पाकिस्तान की सीमा में जाकर उसकी सरजमीं पर लड़ने को तैयार है पर असल में भारत अपने को हमलावर दिखाना पसंद नहीं करेगा। तभी माना जा रहा है कि दोनों देशों में युद्ध बहुत बड़े पैमाने पर नहीं होगा। यह पहले लड़े गए तीन या चार युद्धों की तरह नहीं होगा, बल्कि अभी होने वाले संघर्षविराम उल्लंघन से थोड़ा ज्यादा तीव्रता वाला होगा। ध्यान रहे अगस्त महीने में पाकिस्तान ने ढाई सौ बार से ज्यादा संघर्षविराम का उल्लंघन किया है और भारतीय चौकियों पर फायरिंग की है, जिनका भारतीय सेना ने जोरदार तरीके से जवाब दिया। अगर दोनों देशों में युद्ध होता है तो इस तरह की फायरिंग की इंटेन्सिटी और फ्रीक्वेंसी यानी तीव्रता और आवृत्ति बढ़ जाएगी। इससे देश की आर्थिक स्थिति पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सेना की तैयारी उसके लिए पहले से है। 

भारत के सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी कुछ दिन पहले यह अंदेशा जताया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित युद्ध हो सकता है। दरअसल पाकिस्तान को अपने लोगों को दिखाना है कि उसने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के भारत के फैसले का सिर्फ मुंहजबानी विरोध नहीं किया, बल्कि उसके साथ युद्ध किया। ध्यान रहे पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों और आर्थिक हालात दोनों के आधार पर ही भारत के साथ लड़ने में सक्षम नहीं है। 

भारत को अंदाजा है कि जंग कहां तक बढ़ानी है। पारंपरिक और सीमित युद्ध तक तो ठीक है लेकिन अगर भारत इससे आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान कोई भी दुस्साहस कर सकता है। तभी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उसे चेतावनी दी है कि परमाणु हथियार पहले नहीं इस्तेमाल करने की भारत की नीति परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यानी भारत को लगा कि पाकिस्तान ऐसा कोई दुस्साहस करने की सोच रहा है तो भारत चुप नहीं बैठेगा। तभी यह भी सवाल है कि क्या दुनिया के देश इस उप महाद्वीप में लड़ाई में होने देंगे?

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