• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 03 August, 2019 06:14 AM | Total Read Count 244
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भूल जाएं सात फीसदी विकास

मनमोहन सिंह की सरकार में जब देश की औसत विकास दर आठ फीसदी थी तब की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा आरोप लगाती थी कि यूपीए सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश की विकास दर दहाई में नहीं जा पा रही है। भाजपा कहती रही थी कि भारत की अर्थव्यवस्था में वह क्षमता है कि विकास दर दहाई में पहुंचे। पर अब पांच साल के भाजपा राज के बाद विकास दर सात फीसदी पहुंचने के भी लाले पड़ रहे हैं। 

भारत सरकार ने जो आम बजट पेश किया उसमें सात फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान कई फैक्टर पर विचार के बाद लगाया गया है। पर इस विकास दर तक पहुंचना भी मुश्किल दिख रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने में आर्थिकी की हालत बुरी तरह से बिगड़ी है। शेयर बाजार पिछले पांच महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कहां तो बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 40 हजार के ऊपर जा रहा था और अब कहा 37 हजार के आसपास झूल रहा है। जुलाई महीने में शेयर बाजार का कारोबार पिछले 17 साल में सबसे बुरा रहा है। 

दुनिया की मशहूर रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 0.2 फीसदी कर कर 6.9 फीसदी कर दिया है। पहले इसक अनुमान 7.1 फीसदी का था। पर अब एजेंसी ने कहा है कि भारत में घरेलू बाजार की स्थिति को देखते हुए उसने अनुमान घटाया है। उसके मुताबिक भारत में घरेलू मांग में बहुत भारी गिरावट आ रही है इसलिए उसे अपने अनुमान में संशोधन करना पड़ा है। 

क्रिसिल से दस दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आईएमएफ ने भी अपने अनुमान में संशोधन किया। भारत सरकार का बजट पेश होने के दो हफ्ते बाद आईएमएफ ने अपने अनुमान में 0.3 फीसदी की कटौती की और कहा कि भारत की विकास दर सात फीसदी रहेगी। पर इसमें आगे और संशोधन की उम्मीद है। आईएमएफ ने अप्रैल में 7.3 फीसदी की विकास दर का अनुमान जताया था। पर चार ही महीने बाद उसमें कमी कर दी है। इतना ही नहीं आईएमएफ ने अगले वित्त वर्ष के अनुमान में भी 0.3 फीसदी की कटौती की है। पहले आईएमएफ ने 2020-21 के लिए साढ़े सात फीसदी का अनुमान जताया था पर अब उसे घटा कर 7.2 कर दिया है। उसका भी मानना है कि घरेलू मांग में कमी को देखते हुए उनको विकास दर का अनुमान कम करना पड़ रहा है। 

पिछले वित्त वर्ष यानी 2018-19 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.81 फीसदी की दर से बढ़ी है। जबकि उससे पहले 2017-18 में विकास दर 7.17 फीसदी पर पहुंच गई है। तभी अंदाजा लगाया जा रहा था कि 2018-19 में इसमें बढ़ोतरी आएगी। पर घरेलू मांग में कमी की वजह से बढ़ने की बजाय विकास दर घट गई। भारत के विकास दर का अनुमान जाहिर करने वाली क्रिसिल हो या आईएमएफ हो सबका कहना है कि भारत को अपनी मौद्रिक नीति पर ध्यान देना चाहिए तभी मांग में तेजी आएगी और मांग बढ़ेगी तभी विकास दर बढ़ेगी।

हम भारत के लोग विकास दर में लगातार गिरावट का ट्रेंड होने के बावजूद इस प्रचार से खुश हो जाते हैं कि हमारी विकास दर चीन से बेहतर है। अब भी बताया जा रहा है कि भारत की विकास दर सात फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि चीन की विकास दर 6.2 फीसदी है। यह खुशी बिना इस बात पर विचार किए है कि चीन की आर्थिकी का आकार भारत की आर्थिकी के आकार के लगभग चार गुने के बराबर है। भारत अगले पांच-छह साल में पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख रहा है पर उसकी मौजूदा अर्थव्यस्था अभी ही दस खरब डॉलर से ज्यादा की है। वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसलिए उसका छह फीसदी का विकास दर भी भारत के 12 फीसदी के विकास दर से ज्यादा है। 

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