• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 24 August, 2019 06:35 AM | Total Read Count 726
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उस इंद्राणी की गवाही... पाकिस्तान...

उफ! इंद्राणी मुखर्जी! वह महिला, जिसने अपनी बेटी का खून किया। जिस जघन्यता से वह हत्या थी और परिवार-समाज के रिश्तों में घिनौने आचरण की जो किस्सागोई 2015 में हिंदू समाज ने उनकी सुनी उसके बाद हिसाब से न्याय तुरंत हो उसे फांसी पर लटकाया जाना चाहिए था। लेकिन भारत राष्ट्र-राज्य और हिंदू समाज का कमाल है जो वह आज के नैरेटिव में नायिका है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की! उसके कहे को सत्य वचन मान भारत का पूर्व गृह-वित्त मंत्री हवालात में है। उसने कहा और हाई कोर्ट ने कहा यह बहुत गंभीर बात। यहीं वह बात है, जिससे अपने को लगता है कि भारत का लोकतंत्र अब पाकिस्तान की राजनीति, वहां जैसी पक्ष-विपक्ष की लड़ाई और न्याय प्रक्रिया के नक्शेकदम पर है। पाकिस्तान में ऐसे ही भ्रष्टाचारी चिन्हित होते हैं। आज के भारत की तरह वहां भी भ्रष्टाचारी सत्ता में रहते हुए चिन्हित नहीं होता है लेकिन सत्ता से हटा और उसने यदि नए सत्तावान को तंग करने का रिकार्ड छोड़ा है  तो फिर वह जेल में या दुबई, लंदन में निर्वासित।  

चिदंबरम, उनकी पत्नी उनके बेटे के क्या किस्से हैं और संपत्ति में क्या कुछ है इस सबमें जा कर चिदंबरम के भ्रष्टाचार पर आप चाहे जो राय बना सकते हैं मगर अपने लिए उस नीच महिला इंद्राणी मुखर्जी की जुबान कतई सत्यवादी नहीं है। इस महिला ने इतनी तरह के ऐसे-ऐसे झूठ खुद की बेटी की जघन्य हत्या की जांच में बोले हैं कि उस पर यह विश्वास कि भारत राष्ट्र-राज्य का पूर्व गृह मंत्री या वित्त मंत्री चोर है! 

भले उसे मोदी-अमित शाह और उनकी सीबीआई-ईडी एजेंसियां राजा हरिशचंद्र जैसा सत्यवादी माने और मीडिया पर नैरेटिव बनवाए अपने लिए तो यह शर्मनाक है। ध्यान रहे सरकार में कैबिनेट मंत्री के विदेशी पूंजी निवेश में अनियमितताओं पर एफआईपीबी के जरिए फैसला सचिवों-आईएएस की जमात के दस्तखतों से आगे बढ़ते हुए होता है। मतलब यदि गड़बड़ है तो आईएएस भी पकड़ में आना चाहिए था। उसके साक्ष्य या गवाही होनी थी लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप का सत्य वचन एक आरोपी हत्यारी की जुबानी! और गजब देश और गजब मीडिया और गजब दर्शक जो पूरी गंभीरता से यह सुन रहा है कि कैसे इंद्राणी ने चिदंबरम को हवालात पहुंचवा दिया। जिस महिला ने अपनी बेटी को ऊपर पहुंचाया वह चिदंबरम तो क्या किसी को कहीं भी पहुंचा सकती है, क्या इतना भी नहीं समझा जा सकता है!

क्या अर्थ निकालें इस सबका? जैसी करनी वैसी भरनी या भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत में शुरू महाअभियान। मतलब भारत के सार्वजनिक जीवन की गंगा होने लगी साफ और शुद्व! सब नपेंगे, सब जेल में जाएंगे और सबको किए का फल मिलेगा।

मुझे याद है पाकिस्तान के जिया उल हक ने या परवेज मुशरर्फ ने क्रमशः जुल्फिकार अली भुट्टो और नवाज शरीफ को फांसी या विदेश निर्वासित किया तब उनकी सरकारों की जांच एजेंसियों भी ऐसे ही काम करती थी। जुल्फिकार भुट्टो के खिलाफ नवाब अहमद खान की हत्या का आरोप तो गजब का ही किस्सा था। बावजूद इसके मैंने कभी यह नहीं पढ़ा कि पाकिस्तान के किसी शासक ने किसी आरोपी हत्यारी महिला की गवाही करवा कर देश के किसी आला नेता या मंत्री को हवालात में पहुंचाया। यदि किसी पाठक को इस तरह का कहीं कोई किस्सा मिले, राजनीति का ऐसा अंदाज मिले तो जरूर बताएं!

 

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