• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 27 July, 2019 07:29 AM | Total Read Count 405
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राजनीतिक एजेंडे पर बना फोकस

नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में गृह मंत्रालय का कामकाज जैसे चल रहा है उसे देख कर लग रहा है कि इसकी पटकथा लोकसभा चुनाव से पहले ही लिखी जा चुकी थी। ऐसा लग रहा है कि चुनाव के पहले से तय था कि केंद्र में फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी, अमित शाह गृह मंत्री बनेंगे और भाजपा व संघ के दशकों पुराने एजेंडे पर अमल होगा। 

नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में गृह मंत्रालय के जरिए कोई राजनीतिक एजेंडा पूरा करने का प्रयास नहीं किया गया। यह समझना जरा मुश्किल है कि ऐसा राजनीतिक कारणों से हुआ या राजनाथ सिंह वहां बैठे थे इसलिए नहीं हुआ। पर इस बार अमित शाह ने गृह मंत्री बनते ही राजनीतिक एजेंडे पर अमल शुरू कर दिया है, जिसका जिक्र वे चुनाव प्रचार के दौरान करते रहे थे। तभी अब वे पूरी शिद्दत से राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मजबूत करने, गैरकानूनी गतिविधियों पर रोकथाम के लिए बने कानून में बदलाव करने, नागरिकता कानून पर अमल करने, असम के एनआरसी को पूरे देश में लागू करने जैसे एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

अमित शाह ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए को और ताकत देने का बिल संसद से पास कराया है। उन्होंने लोकसभा में इस बिल को पेश किया तो एमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी से उनकी बहस हुई। ओवैसी ने उनकी ओर इशारा करके कहा कि वे डराने की कोशिश न करें। इस पर शाह ने कहा कि वे डरा नहीं रहे हैं पर जेहन में डर बैठा है तो क्या किया जा सकता है। इस तरह उन्होंने खुद ही माना कि ओवैसी के मन में और प्रकारांतर से देश की बड़ी अल्पसंख्यक आबादी में उनको लेकर डर बैठा हुआ है। उनकी पार्टी इस डर को अच्छा मानती है। उनके इस भाषण के बाद सोशल मीडिया में प्रचार हुआ कि यह डर अच्छा है। 

इसके बाद अमित शाह ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून, यूएपीए में संशोधन का बिल पेश किया। इस पर भी उनकी ओवैसी से बहस हुई। बिल पेश करने की अनुमति के लिए ओवैसी ने वोटिंग की मांग की तो शाह खुश हो गए। उन्होंने भी वोटिंग के लिए जोर दिया, जिसके बाद कांग्रेस ने सदन से वाकआउट किया। कांग्रेस के वाकआउट पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि उनको पता है कि कांग्रेस क्यों बाहर जा रही है। उन्होंने कहा- आप अपना वोट बैंक बचाने के लिए सदन से बाहर जा रहे हैं। इस तरह उन्होंने अपने समर्थकों को बताया कि इस बिल से अल्पसंख्यकों को परेशानी हैं और वे ही कांग्रेस का वोट बैंक हैं। इस बिल के कानून बन जाने के बाद सरकार किसी व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है। अब तक संगठनों को ही आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान था। तभी किसी संगठन के आतंकवादी घोषित होने के बाद उससे जुड़े लोग दूसरा संगठन बना लेते थे। 

बहरहाल, इन दो विधेयकों के जरिए अमित शाह यह मैसेज देने में कामयाब हो गए हैं कि पांच साल के राज में भाजपा और संघ के जिन पुराने एजेंडे पर नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह अमल नहीं कर पाए थे वे उन पर अमल कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के मसले पर कहा हुआ है कि इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है। उन्होंने संसद में कहा कि देश की इंच इंच जमीन घुसपैठियों से खाली कराई जाएगी। वे चुनाव प्रचार में भी यह बात कहते थे। उन्होंने प्रचार में कहा था कि पड़ोसी देशों से आने वाले हिंदू, बौद्ध और सिख शरणार्थियों को छोड़ कर बाकी सब देश से निकाले जाएंगे। 

कहा जा रहा है कि सरकार ने संसद सत्र की जो अवधि बढ़ाई है, उसमें नागरिकता कानून का बिल भी संसद में लाया जा सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले असम की अपनी सहयोगी पार्टी असम गण परिषद के दबाव में सरकार ने इसे छोड़ दिया था। पर सरकार इस सत्र में संसद में यह बिल लाकर सबको चौंका सकती है। यह अमित शाह का पसंदीदा बिल है। मोदी और शाह दोनों ने चुनाव प्रचार में कहा था कि मां भारती की संतानों को भारत की नागरिकता मिलेगी। इस बिल में यह प्रावधान होगा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि से प्रताड़ित होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिम लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इसके बाद वे जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को खत्म कराने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। ये सारे राजनीतिक एजेंडे हैं, जो अमित शाह की कट्टरपंथी छवि को मजबूत करने वाले हैं। 

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