• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 27 July, 2019 07:33 AM | Total Read Count 633
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संघ के सच्चे पटेल तो हो गए शाह

और यह बात हर हिंदू राष्ट्रवादी के जहन, दिल-दिमाग का आज कोर है। साठ दिनों में अमित शाह ने लोकसभा-राज्यसभा याकि संसद में जो भाषण दिए उससे अमित शाह अब तक के गृह मंत्रियों से सबसे अलग माने जाने लगे हैं। सेंट्रल हॉल में किसी ने कहा अमित शाह का कश्मीर और एनआईए, आंतक का भाषण-जवाब जिसने भी सुना वह सोचने को मजबूर हुआ कि खम ठोक संसद में ऐसे पहले कौन गृह मंत्री बोला? नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह ने कश्मीर पर ऐसा कभी भाषण नहीं दिया, जैसा अमित शाह ने दिया है। देश-दुनिया को बता दिया कि हमें किसी की परवाह नहीं हम जो सोचते हैं करेंगे। कश्मीर को ठीक करके दिखाएंगे। लोगों को फर्क समझ आया है कि नरेंद्र मोदी के भाषणों में लफ्फाजी होती है, झांसेबाजी होती है जबकि अमित शाह तो जो बोलते हैं वह दो टूक और एक्शन प्लान से बोलते हैं।

जाहिर है आरएसएस, भाजपा और हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए अमित शाह के भाषण हिट हैं। साठ दिनों के कार्यकाल में अमित शाह ने बताया है कि वे जम्मू-कश्मीर, आंतकवाद और अर्बन नक्सलवाद जैसे मामलों में पुराना ढर्रा रत्ती भर लिए हुए नहीं हैं। एप्रोच एकदम बदली हुई। मैं इन दिनों टीवी चैनल और भाषण सुनने में समय जाया नहीं करता हूं। लेकिन जब मुझे सेंट्रल हॉल में भाई लोगों ने अमित शाह के भाषण पर प्रतिक्रिया सुनाई और गूगल में सर्च किया तो यह देख आश्चर्य हुआ कि यू ट्यूब में अमित शाह के भाषणों के वीडियो की लगभग बाढ़ सी आई हुई है। 

ओवैसी को धमकाते हुए अमित शाह, नेहरू को सत्यानाश के लिए जिम्मेवार ठहराते गृह मंत्री अमित शाह, अर्बन नक्सलवाद जैसे मामलों में दया न करने की बात कहते अमित शाह के भाषणों, जुमलों के वीडियो, सोशल मीडिया हल्ले का सीधा निष्कर्ष है कि अमित शाह कथनी और करनी दोनों में बतौर गृह मंत्री लोगों में इमेज बना चुके हैं। इसकी बानगी में डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी का यह ट्विट गौरतलब है कि राज्यसभा में कल दिए अमित शाह के भाषण की रिकॉर्डिंग सुननी चाहिए। यह तथ्यात्मक रूप से शानदार बहस थी। लंबे समय के बाद मैंने भाजपा के एक मंत्री को भाजपा नेता की तरह बोलते हुए सुना। जो लोग कश्मीर मुद्दे को स्पष्ट समझना चाहते हैं उन्हें यह भाषण सुनना चाहिए।

डॉ. स्वामी का यह कहना कि अरसे बाद लगा कि कोई बीजेपी नेता बोल रहा है तो यह अपने आप में हिंदू मानस की इस चाहना को बताना भी है कि लोग कश्मीर पर जो सुनना या एक्शन चाहते थे वह गृह मंत्री अमित शाह से प्राप्त है। इस बात को आगे खींचते हुए कह सकते हैं कि अमित शाह भाजपा-संघ के असली गृह मंत्री या उसकी असली सरकार की कल्पना को साकार करने वाले सरदार पटेल हो गए हैं। 

और सोचें आने वाले महीनों में अमित शाह के हाथों क्या-क्या होगा? जम्मू-कश्मीर से 35ए, धारा 370 खत्म हुई, अय़ोध्या में राम मंदिर बना और बांग्लादेशियों को सांकेतिक तौर पर भी बाहर निकालने का काम शुरू हुआ तो अमित शाह लोगों में क्या हवा लिए हुए होंगे!

मतलब साठ दिनों में लक्षण अमित शाह के हिंदू मनोविश्व में सुपर महानायक बनने के दिखे हैं। यह भी नोट रखें कि अमित शाह ने हिंदू राष्ट्रवाद के मामले में ज्यादा सोचा हुआ है और उसमें कैसे एक्शन हो, इसका भी खाका बनाया हुआ है। इस सबसे आगे क्या राजनीति होगी, देश और समाज का क्या होगा, यह अपनी जगह अलग बात है मगर अमित शाह चैन से, ढर्रे में बंध कर गृह मंत्रालय चलाने वाले नहीं हैं।

 

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