• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 06 July, 2019 07:17 AM | Total Read Count 332
  • Tweet
अखिलेश का सियासी एजेंडा खत्म!

समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव लड़ कर 2014 की नरेंद्र मोदी की सुनामी में पांच सीटों पर जीती थी और बाद में दो सीटों पर उपचुनाव जीती थी। इस तरह सात सीटें लेकर 2019 के चुनाव में उतरी सपा को इस बार सिर्फ पांच सीटें मिलीं। संदेह नहीं है कि नई पीढ़ी के नेताओं में अखिलेश यादव सबसे गंभीर राजनेता हैं। वे अपने पिता मुलायम सिंह यादव की बनाई पूंजी को बनाए रखते हुए भाजपा को रोकने की राजनीति में गंभीरता से प्रयास करते हैं। तभी 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ तालमेल करके एक प्रयोग किया था और 2019 में बसपा और रालोद से तालमेल का प्रयोग किया। उनके दोनों प्रयोग विफल हो गए हैं। सो, अब वे क्या करेंगे? 

लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद पिछले डेढ़ महीने की राजनीति से तो उनका एजेंडा कुछ समझ में नहीं आ रहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की करीब एक दर्जन सीटों के लिए उपचुनाव होने वाले हैं। उन्होंने और बसपा दोनों ने अकेले चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस भी लड़ेगी ही क्योंकि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में मेहनत कर रही हैं। 

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपना रोडमैप बना रखा है। उसका एजेंडा तय है। मोदी, शाह और योगी का चेहरा ही उत्तर प्रदेश भाजपा का एजेंडा है। सो, सवाल है कि अखिलेश के पास इसकी क्या काट है? उनके यहां तो परिवार ही एकजुट नहीं है। अभी सपा के कोर वोट में और आम लोगों के बीच यह मैसेज है कि परिवार बिखरा हुआ है। यह भी मैसेज है कि शिवपाल ने भाजपा की मदद की है तो मुलायम के दूसरे बेटे बहू यानी प्रतीक और अपर्णा यादव ने भी भाजपा की मदद की है। इस धारणा को खत्म करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। 

इसके बाद अखिलेश यादव को नए समीकरण पर विचार करना होगा। वह स्पष्ट तालमेल के जरिए बने या परोक्ष तालमेल से हो, इसका रोडमैप उनको तैयार करना होगा। अपनी सरकार के पांच साल के कामकाज की तुलना योगी सरकार के कामकाज से करते हुए लोगों को सकारात्मक एजेंडे पर ले आने का प्रयास करना होगा ताकि भावनात्मक आधार पर होने वाले ध्रुवीकरण को रोका जा सके। उन्हें समझना होगा कि इतनी भारी जीत के बाद भी भाजपा चुप नहीं बैठी है। उसकी 24 घंटे की राजनीति चल रही है। तभी योगी सरकार ने अति पिछड़ी 17 जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा। जाहिर है वह यादव, मुस्लिम और दलित के बरक्स अपना जातीय समीकरण मजबूत कर रही है। 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories