• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 03 August, 2019 06:04 AM | Total Read Count 257
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हर सेक्टर की कंपनियां परेशान

भारत में घरेलू मांग हर सेक्टर में कम हो रही है। पहले ऑटोमोबाइल सेक्टर में मांग घटनी शुरू हुई। फिर व्हाइट गुड्स के सेक्टर में मंदी दिखी और अब रिपोर्ट है कि एफएमसीजी यानी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स के बाजार में भी मंदी आ गई है। साबुन, शैंपू और तेल की बिक्री कम हो गई है। जो लोग टेलीविजन देखते हैं उन्होंने मार्क किया होगा कि बाबा रामदेव की पतंजलि के विज्ञापन एकदम से कम हो गए हैं या आने बंद हो गए हैं। खबर है कि पतंजलि की विकास दर, जो देश और दुनिया की सारी कंपनियों के लिए ईर्ष्या का विषय थी उसमें भी गिरावट है। यह भी खबर है कि पिछले साल पतंजलि की एक्सपायरी इन्वेंट्री चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई थी। हिंदुस्तान यूनिलीवर के उत्पादों की बिक्री में भी कमी आई है। 

भारत के वाहन उद्योग को लेकर चौतरफा चिंता जताई जा रही है। पिछले आठ महीने से लगातार खुदरा वाहन उद्योग में गिरावट हो रही है। ऑटोमोबाइल कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों के संगठन का अनुमान है कि यहीं स्थिति रही तो अगले कुछ दिन में अकेले वाहन उद्योग से दस लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी। ये नौकरियां सिर्फ मैन्यूफैक्चरिंग लाइन की होंगी। सोचें, बाकी खुदरा बिक्री, शोरूम और सर्विसिंग सेक्टर से कितनी नौकरियां जाएंगी। बहरहाल, पिछले साल नवंबर से वाहन उद्योग में लगातार गिरावट आ रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आधार पर वाहन उद्योग में जुलाई महीने में 8.2 फीसदी की गिरावट हुई है। देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी मारूति की बिक्री में सात साल में सबसी बड़ी गिरावट हुई है। 

मारूति सुजुकी की बिक्री में जुलाई महीने में 33 फीसदी से ज्यादा गिरावट हुई है। पिछले साल जुलाई में कंपनी ने एक लाख 63 हजार से ज्यादा गाड़ियां बेची थीं, जबकि इस साल जुलाई में उसने एक लाख नौ हजार गाड़ी बेची है। मिनी सेगमेंट में यानी जिसकी गाड़ी मध्य वर्ग के लोग खरीदते हैं उसमें गिरावट 69 फीसदी की है। उसकी घरेलू बिक्री में 36 फीसदी की गिरावट हुई है और यह 2012 के बाद की सबसे बडी गिरावट है।

दोपहिया वाहनों की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की जा रही है। सोचें साइकिल से मोटर साइकिल की ओर बढ़ रहा वर्ग इस समय की मंदी का सबसे बड़ा शिकार हुआ है। मोटर साइकिल बनाने वाली बजाज मोटर्स का कहना है कि दो साल में पहली बार उसकी बिक्री में गिरावट हुई है। कंपनी की घरेलू बिक्री में 13 फीसदी की गिरावट आई है। 

संचार का क्षेत्र कुछ समय पहले तक सबसे तेज बढ़ता क्षेत्र था। पर पिछले कुछ समय में इस सेक्टर की ज्यादातर कंपनियां या तो बंद हो गईं या उनका विलय दूसरी बड़ी कंपनी में हो गया। तीन-चार साल पहले संचार के बाजार में उतरी रिलायंस जियो इस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बन गई। पर इस प्रोसेस में एमटीएस, यूनिनॉर, डोकोमो, एयरसेल, आइडिया, जैसी अनेक कंपनियां बंद हो गईं या विलय करके अपने को खत्म किया। इसके बावजूद जियो को छोड़ कर इस समय बाजार में मौजूद बाकी कंपनियों की हालत खराब है। भारत सरकार की दो कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए वेतन के पैसे कम पड़ रहे हैं। इन दोनों कंपनियों के विलय की बात हो रही है। कैसे व्यवस्थित तरीके से एक निजी कंपनी को बढ़ाने के लिए वीएसएनएल को खत्म किया गया, वह एक अलग कहानी है। 

बहरहाल, जियो के टक्कर में दो कंपनियां खड़ी हैं। एक एयरटेल है और दूसरी वोडाफोन है, जिसमें आइडिया का विलय हुआ है। इन दोनों कंपनियों की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। जियो के आने के बाद सरकारी नियमों में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे इन कंपनियों को घाटा शुरू हो गया। चालू वित्त वर्ष 2019-20 में भारती एयरटेल को 2886 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। पिछले साल की पहली तिमाही में कंपनी को करीब सौ करोड़ का मुनाफा हुआ था। पिछले 14 साल में पहली बार एयरटेल को घाटा हुआ है। संचार कंपनियों के विलय या बंद होने से हजारों की संख्या में नौकरियां गई हैं। 

विमानन क्षेत्र की गिरावट अलग हैरान करने वाली है। कहां तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हवाई चप्पल वाला भी हवाई जहाज से उड़ेगा पर आज स्थिति यह है कि हवाई अड्डे निजी हाथों में दिए जा रहे हैं कि निजी विमानन कंपनिया दिवालिया हो रही हैं। डेक्कन एविएशन से लेकर किंगफिशर और जेट एयरवेज खत्म हो चुके हैं। अब भारत सरकार अपनी कंपनी एयर इंडिया को बेचने की तैयारी में है पर खरीददार नहीं मिल रहे हैं। 

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