• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 31 August, 2019 06:24 AM | Total Read Count 321
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दुनिया लड़ने देगी क्या भारत-पाक को?

भारत और पाकिस्तान को युद्ध की जितनी चिंता है उससे ज्यादा चिंता दुनिया के देशों को है। आज से नहीं बहुत पहले से अमेरिका मानता रहा है कि कश्मीर बहुत बड़ा फ्लैश प्वाइंट है। उसका मानना है कि इसे कभी भी इतना नहीं बढ़ने देना है कि परमाणु युद्ध की नौबत आ जाए। आखिर भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार वाले देश हैं। इसलिए दुनिया नहीं चाहेगी कि इन दोनों के बीच जंग छिड़े। सीमित युद्ध और सीमा पर फायरिंग आदि से आगे बढ़ने पर दुनिया के देश सक्रिय हो जाएंगे।

परमाणु हथियार के अलावा एक बड़ी चिंता इस उप महाद्वीप में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा भड़कने की भी है। पाकिस्तान इसके प्रयास में लगा है। उसके नेता कश्मीर समस्या को हिंदू बनाम मुस्लिम का रंग देने में लगे हैं। इस तरह वे भारत के मुसलमानों और पड़ोसी देश बांग्लादेश को भी उकसा रहे हैं। हालांकि उन्हें अभी इसमें कतई कामयाबी नहीं मिली है पर यह जोखिम नहीं लिया जा सकता है कि वह ऐसे हालात पैदा करे, जिससे एक साथ कई मोर्चे खुल जाएं। 

पाकिस्तान के सबसे करीबी सहयोगी चीन को भी इसका अंदाजा है। हालांकि अंदर अंदर चीन खुद बहुत बौखलाया है। लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करके उसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने के फैसले से वह परेशान हुआ है। तभी उसने पाकिस्तान के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र संघ में जम्मू कश्मीर के ऊपर चर्चा कराई। पर उसका कोई नतीजा नहीं निकला। चीन को भी इसका अंदाजा था पर पाकिस्तान को खुश करने के लिए उसने यह काम किया। उसे अपने वन बेल्ट, वन रोड की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पाकिस्तान के मदद की दरकार है। पर उसके लिए सबसे पहली जरूरत इलाके में शांति बने रहने की है। तभी चीन भी नहीं चाहेगा कि भारत और पाकिस्तान पूर्ण युद्ध में उलझें। 

अमेरिका तो लगातार दोनों देशों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए और दोनों देशों को नसीहत दे रहा है। माना जा रहा है कि सितंबर के अंत तक तनाव घटाने वाले कुछ उपाय हो सकते हैं। ध्यान रहे सितंबर के अंत में दोनों देशों के प्रधानमंत्री अमेरिका जा रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की बैठक में हिस्सा लेने। वहां दोनों की अमेरिकी राष्ट्रपति और दुनिया के दूसरे देशों के प्रमुखों के साथ दोपक्षीय वार्ता होगी। हालांकि 27 सितंबर को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और उसके दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषण में एक दूसरे पर हमले करेंगे। पाकिस्तान अपने लोगों को दिखाने के लिए करेगा तो भारत उसका जवाब देने के लिए। 

यह सही है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और वहां की सेना के लिए यह करो या मरो वाली स्थिति है। लोगों के बीच उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उसके आर्थिक हालात और अंतरराष्ट्रीय दबाव उसको भारत के साथ लड़ने की इजाजत नहीं देंगे। यह भी अनायास नहीं है कि जम्मू कश्मीर पर फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन का दौरा किया। ये दोनों इस्लामिक देश भारत के साथ हैं। सऊदी अरब के शासकों से भी मोदी ने भारत के रिश्ते बेहतर किए हैं और वहां के हुक्मरान भारत में बड़ा निवेश करने जा रहे हैं। वे भी पाकिस्तान पर इस बात का दबाव डालेंगे कि वह भारत के साथ युद्ध से बचे। सो, कई किस्म के अंतरराष्ट्रीय दबाव होंगे। दुनिया दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों को लड़ने से रोकने के सारे प्रयास करेगी।  

 

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