• [EDITED BY : Mohan Kumar] PUBLISH DATE: ; 16 August, 2019 08:34 PM | Total Read Count 244
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रिसर्च: बहु-पति प्रथा महिलाओं के लिए फायदेमंद

न्यूयार्क। यह बात कई लोगों को अजीब लग सकती है कि अगर किसी महिला के एक से ज्यादा पति हो तो वह ज्यादा खुश रहेगी और आर्थिक रुप से मजबूत बनी रहेगी। हालांकि पुरुषों में बहुपत्नी प्रथा का चलन प्राचीन काल से रहा है। बहुपति प्रथा कोई नई बात नही है। हिमालय के कुछ इलाको में कहा जाता है कि वहां बहुपति प्रथा अभी भी कायम है। कई कबीलो मे यह रिवाज रहा है कि बड़ा भाई शादी करता है और उसकी पत्नी उसके सारे भाइयों की भी पत्नी बन जाती है। 

ऐसा ही एक दिलचस्प शोध हुआ है जिसमें बताया गया है ​कि बहु-पति प्रथा महिलाओं के लिए फायदेमंद है। यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया, डेविस (यूसी डेविस), द्वारा किए गए अध्ययन में महिलाओं और पुरुषों के बारे में क्रमिक विकास से सामने आए सेक्युअल स्टीरियोटाइप को चुनौती दी गई है। 

यह एक जाना माना तथ्य है कि कई सारी पत्नियां रखने का पुरुषों को प्रजनन में लाभ होता है। लेकिन महिलाओं को इस बहुविवाह से क्या लाभ होता है, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। महिलाएं गर्भावस्था और स्तनपान के कारण पुरुषों के जितना प्रजनन नहीं कर सकती है। 

प्रमुख शोधार्थी और एंथ्रोपोलॉजी के प्रोफेसर मोनिक बोर्जरहोफ का कहना है, "हमारा निष्कर्षो (दूसरों के निष्कर्षो के साथ मिलकर) से यह पता चलता है कि बहु-विवाह करना उन महिलाओं के लिए एक बुद्धिमान रणनीति हो सकती है जहां जीवन की आवश्यकताएं कठिन हैं, और जहां चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण पुरुषों का स्वास्थ्य और उनकी आर्थिक उत्पादकता उनके जीवनकाल में मौलिक रूप से भिन्न हो सकते हैं।" शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि बहुत सारे पतियों के साथ महिलाएं खुद को आर्थिक और सामाजिक संकट से बचा सकती हैं, और अधिक प्रभावी ढंग से अपने बच्चों को जीवित रख सकती हैं। 

प्रोसिडिंग्स ऑफ रॉयल सोसाइटी बी जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया कि इसके विपरीत, विवाहित वर्षो की संख्या को नियंत्रित करने वाले पुरुषों में, अपने जीवन में उन्होंने जिन महिलाओं से शादी की है, उनसे कम बच्चे (जीवित बचे) पैदा करने की प्रवृत्ति होती है। बोर्जरहॉप मल्टर ने कहा, "क्रमिक विकास के जीव विज्ञानी होने के नाते हम फायदों को पैदा किए गए बच्चों में कितने जिन्दा हैं, इस पैमाने से नापते हैं। यह अभी भी ग्रामीण अफ्रीका में एक प्रमुख मुद्दा है।"

उन्होंने कहा, "ग्रामीण अफ्रीका के कई हिस्सों में, महिलाओं के बीच प्रजनन असमानता प्रजनन दमन से नहीं निकलती है, जैसा कि कुछ अन्य अत्यधिक सामाजिक स्तनधारियों में होता है .. लेकिन संसाधनों तक पहुंच के लिए महिलाओं के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा की अधिक संभावना है।" उन्होंने कहा कि इन संसाधनों में उच्च गुणवत्ता वाले पतियों, कई सारे सहायक जो घर और खेती में मदद करे, और (कम से कम इस विशेष सांस्कृतिक संदर्भ में) मददगार सास-ससुर है।

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