• [WRITTEN BY : Mohan Kumar] PUBLISH DATE: ; 06 September, 2019 09:03 PM | Total Read Count 282
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शेहला रशीद देशद्रोह और सच्चाई !

नई दिल्ली। शेहला रशीद पर दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। देशद्रोह का मामला इसलिए दर्ज किया गया क्योंकि शेहला रशीद ने आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद 18 अगस्त को कई टवीट किए थे। शेहला ने सेना पर कश्मीरियों के ऊपर अत्याचार करने का आरोप लगाया था। सेना ने इन आरोपों को झूठा करार दिया था। सेना ने शेहला के आरोपों को जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए इन्हें निराधार बताया था। शेहला ने अपने बचाव में कहा है कि उन्होंने जो टवीट किये थे वह सच है और उनके सबूत भी उनके पास है। सेना कहेगी तो वह दिखा भी सकती है। 

शेहला रशीद जेएनयू की छात्रा रही है और अभी वह जेएनयू से पीएचडी कर रही है। जेएनयू ऐसी जगह है जो पढ़ाई की वजह से कम देश विरोधी हरकतों के लिए ज्यादा चर्चा में रहती है। जैसे ही संसद से धारा 370 हटाने का फैसला हुआ तो उसका विरोध कश्मीर से ज्याद जेएनयू में दिखाई दिया। जहां के स्टूडेंट ढोल—ढपली लेकर मोदी होश में आओ, धारा 370 वापस लाओ जैसे नारे लगाने लगे। इसके पहले भी जेएनयू उस समय सुर्खियों में आया था जब वहां भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्साअल्लाह जैसे नारे लगे थे। जिसके बाद कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का आरोप भी लगा था हालांकि यह आरोप उन पर साबित नहीं हुए है। हाल ही में केजरीवाल सरकार ने देशद्रोह के आरोप से उन्हें क्लीन चिट भी दे दी है। कन्हैया कुमार के विचार भी काफी क्रांतिकारी है जब वह अपने बयान में फंस जाते हैं तो इन सारे भड़काऊ बयान को वह देश के विकास या मोदी विरोध से जोड़ देते हैं। 

शेहला रशीद, कन्हैया कुमार और भी इनके कुछ साथी है जिन्हें कि कई लोग टुकड़े गैंग के नाम से भी संबोधित करते हैं। देश के कई लोगों को लग रहा होगा कि एक जेएनयू की छात्रा ने अगर कुछ टवीट गलत कर दिये या नासमझी में कर दिए तो उस पर देशद्रोह का आरोप लगाना ठीक नहीं है। लेकिन ​इसके लिए आपको शेहला रशीद की पालिटिक्स पर नजर डालनी होगी। वह जम्मू कश्मीर के चुनिंदा लोगों में शामिल है जो कि कश्मीर की आवाज बनकर देश और दुनिया को बता रहे है कि कश्मीर के लोग क्या सोचते हैं। कश्मीर के लोग जो भी सोचते हो लेकिन शहला रशीद में अलगाववादी सोच कूट—कूटकर भरी है।

आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद शेहला रशीद का गुस्सा देखने लायक था।  तब से लेकर आप उनके वीडियो देखिए जो उन्होने छोटे—मोटे चैनलों और कुछ विदेशी चैनलों को इंटरव्यू दिए हैं। उसमें आपको लगेगा कि कश्मीर कोई अलग देश है जिसकी निवासी शेहला रशीद है और वह हमारे देश की संसद के द्वारा आर्टिकल 370 हटाने का विरोध कर रही है। वह इसे इंटरनेशनल लेवल पर उठाने तक की धमकी दे रही है। उनकी काफी बातें भड़काउ होती है।  प्रधानमंत्री से लेकर पूरे देश की जनता तक को वह सांप्रदायिक करार देती है और जबकि हकीकत यह है कि जो शेहला रशीद यह आरोप लगाती है कि कश्मीर की आवाज को दबाया जा रहा है वह दिल्ली के जेएनयू में रहकर आराम से पढ़ाई कर रही है जो उसका मन करता है वह कश्मीरी होने के नाम पर बोलती है। उसे रोकने वाला कोई नही है। लेकिन इस आजादी को शेहला ने इतना बढ़ा लिया कि अब वह देशद्रोह में तब्दील हो गई है। हालांकि यह मामला कोर्ट में जाएगा तब ही पता चलेगा कि शेहला रशीद ने देशद्रोह लायक कुछ किया भी है या इस तरह की नई राजनीति को देश को हजम करने के लिए तैयार होना होगा। 

शेहला रशीद अपने भाषणों में आजादी का जिक्र बहुत करती है। शेहला को जातिवाद से आजादी चाहिए, ब्राहम्णवाद से आजादी चाहिए, राष्ट्रवाद से आजादी चाहिए लेकिन उन्हें बुर्के से आजादी नहीं चाहिए। तीन तलाक से भी आजादी नहीं चाहिए, कश्मीर में अलगाववाद से आजादी नहीं चाहिए और न ही आतंकवाद से आजादी चाहिए। जिस सोशल मीडिया पर उन्हें इन सबके लिए गालियां पड़ती है वह उन्हें असभ्य बताती है लेकिन जब एक खास जगह का सोशल मीडिया अलगाववाद, आतंकवाद की तरफदारी करते मिलेगा तो शेहला इसे जनता की आवाज बताएंगी।

ऐसे ही कई भड़काउ वीडियो शेहला रशीद के मिल जाएगे जिन्हें सुनकर लगता है कि वह अलगाववादियों के काफी करीब है। पाकिस्तान से लेकर विदेशी मीडिया इस कोशिश में है कि उसे कश्मीर से कहीं ऐसे फुटेज मिले जिसमें हिंसा हो। लेकिन जब नहीं मिल पाए तो शेहला रशीद जैसे लोग आगे आए जो जानबूझकर पाकिस्तान प्रोपेगेंडा का शिकार हुए  या अनजाने में पता नहीं लेकिन सीधे सेना पर शेहला ने आरोप जड़ दिए। दिल्ली पुलिस ने भी ऐसे ही देशद्रोह का आरोप नहीं जड़ा होगा शेहला सेना के खिलाफ टिप्पणी करने के बाद भी काफी एक्टिव है और भड़काऊ बातें वह अलग—अलग छोटे न्यूज चैनलों पर लगातार कर ही रही है। शेहला रशीद की बात सुनकर ऐसा लगता है कि वह भारत के खिलाफ कोई प्रोपेगेंडा चला रही है भारत की जनता को सांप्रदायिक करार देते हुए पाकिस्तान की मदद से और अंतराष्ट्रीय बिरादरी को मानवाधिकार के नाम पर इकट्ठा कर कश्मीर के मामले को भड़काना चाहती है। 

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