• [EDITED BY : Mohan Kumar] PUBLISH DATE: ; 25 June, 2019 10:17 PM | Total Read Count 86
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अरब देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है योग
नई दिल्ली। शरीर और मन में सामंजस्य बिठाकर जीवन को सुसंगत तरीके से जीने की कला सिखाने वाला योग अब अरब जगत में तेजी से पांव पसार रहा है। हाल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हुए आयोजन इसी की बानगी पेश कर रहे हैं। यही नहीं अरब देशों में योग के कार्यक्रम 21 जून के बाद भी जारी हैं।
 
भारत की हजारों साल पुरानी परंपरा योग को सिखाने वाले केंद्र अरब के देशों में, विशेषकर सऊदी अरब में तेजी से सामने आए हैं। अरब देशों के साथ-साथ उत्तरी अफ्रीका के अरबी संस्कृति वाले मिस्र जैसे देशों में भी योग लोगों के बीच पकड़ बना रहा है।
 
अरब क्षेत्र में योग को लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ी भूमिका सऊदी अरब की नऊफ मारवाई ने निभाई है। उनके इस योगदान को भारत सरकार ने भी सराहा और 2018 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा। अरब योगा फाउंडेशन की संस्थापक और सऊदी अरब में कई योग संस्थानों की प्रमुख नऊफ मारवाई ने ई-मेल और फोन के जरिए आईएएनएस को बताया कि बड़ी संख्या में अरबी लोग योग की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को सऊदी अरब के बड़े शहरों में कई बड़े आयोजन हुए, जिनमें रियाद स्थित भारतीय दूतावास, जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ सऊदी प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा।"
 
उन्होंने बताया, "अकेले जेद्दा में तीन योग सत्र किए गए। अरब योग फाउंडेशन के इस आयोजन में दो में भारतीय वाणिज्य दूतावास का सहयोग रहा और एक में सऊदी अरब में सक्रिय इंडियन ओवरसीज फोरम ने योगदान दिया। जेद्दा के इंडियन इंटरनेशनल स्कूल में हुए आयोजन में एक हजार लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजसी परिषद की सदस्य लीना अलमाईना थीं। दुनिया के सबसे बड़े फव्वारे 'किंग फहद फाउंटेन' के पास भी योग सत्र किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर इन आयोजनों के लिए सऊदी योग साधकों को बधाई दी।"
 
मारवाई ने बताया, "ऐसे ही आयोजन सऊदी अरब की राजधानी रियाद और प्रमुख शहर दम्माम में भी हुए। यहां योग सत्रों का नेतृत्व सऊदी अरब में सक्रिय योग स्कूलों के सऊदी योगाचार्यों ने किया।"
 
उन्होंने बताया कि अबु धाबी में 21 जून को आयोजन किया गया था और 28 जून को एक बार फिर यहां योग उत्सव-2019 मनाया जाएगा, जिसमें वह खुद भी हिस्सा लेंगी।
 
मारवाई ने बताया कि पूरे अरब जगत में योग लोगों के बीच तेजी से जड़ जमा रहा है। वह खुद सऊदी अरब के मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का, मदीना और रियाद व जेद्दा में सात सौ योग शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं।
 
उन्होंने बताया कि सऊदी सरकार ने योग को वैधानिक दर्जा दिया हुआ है। नवंबर 2017 से योग को खेल गतिविधियों की सूची में डाला गया और समूचे सऊदी अरब में योग केंद्र और स्टूडियो खुल रहे हैं।
 
योग और धर्म के बीच के कथित टकराव का सामना तो उन्हें नहीं करना पड़ता? मारवाई ने कहा, "नहीं, कभी नहीं। योग को किसी भी धर्म-पंथ का व्यक्ति अपना सकता है। यह एक विज्ञान है, शरीर और स्वास्थ्य को फिट रखने का। इसे लोग समझते हैं।"
 
उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) बहरीन, कुवैत, ओमान में भी स्थानीय अरब समुदाय के लोगों में योग को लेकर जानकारी बढ़ी है। विशेषकर यूएई में इसे लेकर स्थिति बेहतर हो रही है। उन्होंने बताया, "मिस्र में अरब योग फाउंडेशन के चार प्रतिनिधियों ने योग के प्रसार का काम शुरू किया है और यहां अलेक्जेंड्रिया शहर में जुलाई में हम स्थानीय लोगों के लिए ट्रेनिंग कोर्स शुरू करने जा रहे हैं।" मारवाई ने कहा कि सीरिया, लेबनान, फिलिस्तीन, जार्डन जैसे अरब देशों और उत्तरी अफ्रीका के ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मोरक्को जैसे अरबी संस्कृति वाले देशों में भी कई स्थानीय लोग सामने आए हैं और इन सभी जगहों पर स्थानीय लोगों ने योग केंद्र खोले हैं।

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