• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 09 July, 2019 08:29 PM | Total Read Count 24
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वैवाहिक बलात्कार को तलाक का आधार बनाने से इंकार

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया जिसमें दाम्पत्य जीवन के भीतर बलात्कार करने पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने और इसे तलाक का आधार मानने वाला कानून बनाने के लिये केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने याचिका को निस्तारण करते हुए कहा कि अदालत इस संबंध में कानून बनाने का आदेश नहीं दे सकती क्योंकि यह विधायिका का काम है, न कि न्यायालय का।

जनहित याचिका में मांग की गई थी कि कानूनों और दिये गये दिशा-निर्देशों के तहत विवाह संस्था के भीतर बलात्कार से संबंधित मामलों के पंजीकरण के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश होना चाहिए, ताकि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही, जिम्मेदारी और दायित्व तय हो सके। यह याचिका उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले पर सुनवाई से इंकार करने के बाद उच्च न्यायालय में दायर की गई थी।

याचिकाकर्ता और वकील अनुजा कपूर को इस मामले में राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा गया था। याचिका में कहा गया था कि मौजूद समय में पति के द्वारा पत्नी का बलात्कार करने को अपराध नहीं माना जाता। इसलिए ऐसे मामलों में पत्नी, पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करा सकती है।

 

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