• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 13 August, 2019 05:30 PM | Total Read Count 40
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तामेश्वर नाथ धाम में श्रद्धालुओं का रेला

संतकबीरनगर। पूर्वी उत्तर प्रदेश की ‘काशी’ के रूप में विख्यात संतकबीरनगर के तामेश्वरनाथ धाम में सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जिला मुख्यालय से नौ किमी दक्षिण में स्थित ताम्रेश्वर महादेव पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था का जल चढ़ाकर पूजा अर्चना की। यह स्थान पूर्वांचल के धार्मिक स्थलों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

ताम्रेश्वर नाथ की ज्योतिर्लिंगों के समान मान्यता है। यह ‘स्वयंभू’ शिवलिंग है। इस कारण इस शिवलिंग को श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ताम्रेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी ब्रह्मशंकर भारती बताते हैं कि द्वापर युग में जब पाण्डव माता कुंती के साथ अज्ञात वास का दण्ड भोग रहे थे तब इसी स्थान पर जहां घना वन क्षेत्र था रुके थे। माता कुंती ने ही इस स्वयंभू शिवलिंग का प्रथम बार अभिषेक किया।

इसके बाद लोगों को इस शिवलिंग की जानकारी हुई और तभी से इस स्थान को ज्योतिर्लिंगों के समान माना जाने लगा। यहां दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं और मनौती मानते हैं। बड़ी संख्या में आस्थावान यहां रुद्राभिषेक कराते हैं। यद्यपि यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है लेकिन सोमवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

महाशिवरात्रि पर्व एवं सावन में यहां का दृश्य विहंगम होता। इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और विशाल मेला लगता है।

 

 

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