• [POSTED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 06 September, 2019 08:07 PM | Total Read Count 19
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कुण्डली के बाहरवें भाव में शनि के फल और उपाये

शनि ग्रह

शनि ऐसा ग्रह है जिसके प्रति सभी का डर सदैव बना रहता है।  किसी भी मनुष्‍य की कुंडली में शनि किस भाव में है, इससे मनुष्‍य के जीवन की दिशा, सुख, दुख आदि सभी बात निर्धारित हो जाती है।  शनि को कष्टप्रदाता के रूप में अधिक जाना जाता है।  शनि कुंडली के त्रिक (6, 8, 12) भावों का कारक है। शनि ग्रह के सम्बन्ध मे अनेक भ्रान्तियां और इस लिये उसे मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है।  लेकिन शनि उतना अशुभ और मारक नही है, जितना उसे माना जाता है।  इसलिये वह शत्रु नही मित्र है।  मोक्ष को देने वाला एक मात्र शनि ग्रह ही है।

सत्य तो यह ही है कि शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है, और हर प्राणी के साथ न्याय करता है।  जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्ही को प्रताडित करता है।  शास्त्रों में वर्णन है कि शनि वृद्ध, तीक्ष्ण, आलसी, वायु प्रधान, नपुंसक, तमोगुणी और पुरुष प्रधान ग्रह है।  

कुण्डली के बाहरवें भाव में शनि के फल और उपाये

कुण्डली का 12वा भाव जो कि खर्च से संबंधित है, स्त्री सुख से संबंधित है , बाहरी संबंधों से संबंधित है , मानहानि से संबंधित है , दुनिया से कट जाना, जेलयात्रा, विदेश यात्रा, जीवन के किसी भी विषय में मान हानि इस भाव से संबंधित होती है । कुण्डली के इस भाव में शनि अपनी अशुभता देता है, खास कर कार्यो में निपुणता ना होने के कारण जातक को सम्मान की कमी बनी रहती है, नोकरी मिलने में देरी होती है । खास कर शनि टैक्नोलॉजी का कारक है, बिजली की चीज़ों का कारक है , जब शनि अशुभता देता है तो बिजली के उपकरण सही ना होने से ( शार्ट सर्किट ) से नुकसान होते हैं , कम्प्यूटर में ही रखी हुई काम की चीज़ें वायरस आने से खराब हो जाती हैं , जब भी कोई ज़रूरी कार्य कम्प्यूटर पर करना होता है वो सॉफ्टवेयर ही खराबी देता है । अगर शनि उच्च राशि का है, अपनी राशि का है या मित्र राशि का है तो इस तरह की समस्याये नही होती , बल्कि 2, 6, 9, 12वे भावो का संबंध पहले से चले आ रहे पारिवारिक व्यवसाय में अच्छी सफलता देता है, अगर घर का कोई व्यवसाय नही है तो नोकरी में ही सफलता मिलती है । ऐसे जातक को आटोमोबाइल इंजीनियरिंग से कैरियर बनाने पर भी अच्छी सफलता मिलती है , हैकर , टेलीकॉम सेवाओं में , स्पेस में, एयरहोस्टेस के कार्य भी इनको सफलता देते हैं । 12वे भाव मे शनि अशुभ हो तो कर्ज़ और रोग 48 वर्ष के बाद परेशान करते हैं । ऐसे जातक के व्यवसायक शत्रु बहुत होते हैं जो नुकसान भी तभी करते हैं जब कार्य बिल्कुल आखिरी पड़ाव पर हो , अपने कोई प्रोजेक्ट या deal final करनी है लेकिन बिल्कुल एक दिन पहले आपका शत्रु आपका कार्य खराब करेगा । ऐसे जातक का मन पूजा पाठ में नही लगता , सर, आंख, गले, कंधे और पैर के रोग परेशान करते हैं । मंगल , राहु या केतु 11वे भाव में हो तो क्रोध में आकर बात मारपीट तक पहुंच जाती है , जिसकी वजह से इनको कोट कचहरी से भी परेशानी होती है । 11वे भाव में चन्द्र, गुरु या शुक्र हो तो यह अच्छे हीलर भी हो सकते हैं , अच्छे व्यपारी भी होते हैं , पैतृक संपति इन्हें कभी नही बेचनी चाहिए ।

बाहरवें भाव में विराजमान शनि की अशुभता दू रकरने के उपाये

* घर के बुजुर्गों से कोई वाद विवाद ना करें ।

* घर की छत पर सफाई रखें, सम्भव हो तो पानी की टँकी सफेद रंग की हो ।

* काले वस्त्र में 12 बादाम लेकर किसी डिब्बे में रखकर उनको घर के किसी कमरे में छुपा कर रखें ।

* नियमित गणेश जी की पूजा आराधना करें ।

* बिस्तर के सामने पक्षियों का सुंदर जोड़े का चित्र लगाएं ।

* सम्भव हो तो किसी भी रूप में शीशा शयन कक्ष में ना लगाए, अगर हो तो रात के समय उसको कपड़े से ढक दें ।

* धर्म स्थल में पंखे, कूलर , हरे रंग की चद्दर , जो भी सम्भव हो दान करें ।

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