• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 09 July, 2019 06:36 PM | Total Read Count 31
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श्रावणी मेला 2019

श्रावणी मेला इस बार 17 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 अगस्त तक चलने वाला है। एक महीने तक चलने वाले इस मेले में अब हर रोज कावंड़ियों की भीड़ लाख की संख्या पार कर जाती है। यह किसी महाकुंभ से कम नहीं है। झारखंड के देवघर में लगने वाले इस मेले का सीधा सरोकार बिहार के सुलतानगंज से है। यहीं गंगा नदी से जल लेने के बाद 'बोल बम' के जयकारे के साथ कांवड़िये नंगे पाँव देवघर की यात्रा आरंभ करते हैं। ऐसे में देवघर स्थित शिवलिंग का अपना खास महत्व है क्योंकि शास्त्रों में इसे मनोकामना लिंग कहा गया है। यह देश के 12 अतिविशिष्ट ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह वैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है।

प्रत्येक वर्ष श्रावण के पावन महीने में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला अवधि में सुल्तानगंज की महिमामयी उत्तर वाहिनी गंगा तट पर स्थित अजगैबीनाथ धाम से लेकर देवघर के द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम के करीब 110 कि.मी. के विस्तार में मानों शिव का विराट लोक मंगलकारी स्वरूप साकार हो उठता है और समस्त वातावरण कांवरियां शिव भक्तों के जयकारे से गूंजायमान रहता है। श्रावण मास के दिनों में भगवान शंकर बैधनाथ धाम और अजगैबीनाथ धाम में साक्षात विद्यमान रहते हैं जहाँ उनकी अर्चना द्वादश ज्योतिर्लिंग और अजगैबीनाथ महादेव के रूप में होती है। यही कारण है कि औघड़दानी शिव के पूजन हेतु लाखों भक्त सुल्तानगंज अजगैबीनाथ धाम और देवघर बैद्यनाथ की ओर उमड़ पड़ते हैं। सुल्तानगंज में गंगा उत्तरवाहिनी है, जिसका विशेष महात्म्य है। भगवान शंकर को गंगा का जल अत्यन्त प्रिय है।

किंवदंती कहती है कि जब देवों और असुरों द्वारा समुद्र का मंथन - समुंद्र मंथन - श्रावण के हिंदू महीने में मंदरा पर्वत और वासुकी सर्प को रस्सी के रूप में किया जाता है, तो कल से चौदह अलग-अलग प्रकार के माणिक सामने आए। हलाहल को छोड़कर, राक्षसों के बीच वितरित किए गए थे। भगवान शिव ने हलाहल को पी लिया और उसे अपने गले में जमा लिया, जो घातक जहर के प्रभाव के कारण नीला हो गया। इसलिए, नीलकंठ नाम (जिसका अर्थ है नीला कंठ) शिव को माना जाता है। विष के प्रबल प्रभाव को कम करने के लिए, उसके बाद सभी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाना शुरू कर दिया।

मान्यता यह है कि श्रावण मास में भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाने से उनकी मनोकामना पूरी होती है। श्रावण मास के सोमवार या सोमवर को विशेष रूप से तपस्या की जाती है। भारत, नेपाल और दुनिया भर के अन्य देशों से हजारों शिव भक्त सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक की यात्रा करते हैं।वे बाबा बैद्यनाथ मंदिर में 108 किमी तक पैदल चलते हुए रास्ते में बोल बम का पाठ करते हैं। बाबाधाम पहुंचने पर, कांवरिया पहले खुद को शुद्ध करने के लिए शिवगंगा में डुबकी लगाते हैं और फिर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश करते हैं, जहां ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल चढ़ाया जाता है।

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