• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 14 August, 2019 06:30 AM | Total Read Count 536
  • Tweet
वैदिकजी को नहीं भारत ‘सत्य’ को कोसें!

अपने वैदिकजी ने कल ‘नए कश्मीर का सूत्रपात’ में लिखा कि गजब हुआ जो कश्मीर खोल दिया गया और लोग बाजारों में खरीदी कर रहे है, मस्जिदों में जाकर नमाज़ पढ़ रहे हैं! कहीं से कोई तोड़-फोड़ या मार-पीट की खबर नहीं है। इसे पढ़ एमआर शर्मा जैसे अपने सुधी पाठकों ने फोन कर कहा- वैदिकजी को यह क्या हो गया जबकि ‘द हिंदू’ अखबार की लीड खबर में समाचार ब्यौरा उलटा है! मैं क्या कहता। मैंने ही कॉलम पढ़ कर उसे छापने के लिए भेजा था। ऐसे ही मैंने शाम को एजेंसी की खबरें देख कर अखबार के पेज पर पहली लीड बनवाई कि ‘घाटी में सुकून से मनी ईद।‘ हालांकि नया इंडिया की लीड के इंट्रो में ‘छिटपुट विरोध प्रदर्शनों’ व कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगे होने के कारण सड़कों से त्योहार की रौनक गायब’ जैसे वाक्य थे। लेकिन लबोलुआब वही जो वैदिकजी ने लिखा या देश के लोगों ने पूरे दिन मीडिया से जो सुना। 

सोचें, वैदिकजी ने टीवी चैनल देखे, मैंने भारत की समाचार एजेंसियां देखी जबकि हम दोनों मानते-जानते हंै कि कश्मीर घाटी के अस्सी लाख मुसलमान सुरक्षा प्रबंधों के जैसे घेरे में हैं, जैसे कर्फ्यू  में हंै, बड़ी मस्जिदों पर जो ताला लगा हुआ है तो श्रीनगर में ईद वैसे कतई नहीं मन सकती जैसे पहले मनती थी। पर उस सत्य को बताने, दिखलाने और लिखने के लिए वैदिकजी के पास या मेरे पास सोर्स तब कहां है जब सब बंद है? फिर भारत में ‘सत्य’ को आज कौन जानना या पढ़ना चाहता है? अपने को अहसास है कि भारत राष्ट्र-राज्य ने जैसे पिछले 72 साल कश्मीर घाटी के लोगों के साथ साझे चुल्हे का झूठ, स्वांग बनाया वैसे मोदी-अमित शाह भी मजबूर है जो नया स्वांग बना रहे है कि कश्मीर घाटी को हमने सामान्य बना दिया। जो समस्या 72 साल अनुच्छेद 370 के पुचकारे से नहीं सुलझ पाई वह भला डंडे या सैनिक बाहुबल से दस-पंद्रह दिन या दस-पंद्रह साल में सुलट जाए यह संभव ही नहीं है लेकिन मोदी-शाह को स्वांग तो बनाना है।

तभी अपनी थीसिस है कि पांच अगस्त 2019 का अनुच्छेद-370 खत्म करने का फैसला कश्मीर समस्या में पकने वाले हिंदू-मुस्लिम रिश्तों में वह नई शुरूआत है जिसमें भारत के नागरिकों को लगातार तंत्र के इस नए झूठ में जीते रहना है कि हमारे बाहुबल ने उन्हे ठोक कर ठीक कर दिया है। डा वैदिक या मैं या समझदार हिंदू के लिए न पहले हकीकत छुपी हुई थी और न अब छुपी हुई है लेकिन भारत राष्ट्र-राज्य का तंत्र तब भी झूठा था और अब भी झूठा है। 

क्या गजब बात है कि भारत की सरकार, उसका तंत्र अनुच्छेद-370 के रहते भारत की जनता और खासकर हिंदूओं को यह झूठ परोसता रहा कि कश्मीर घाटी के लोग भारत में मिल रहे है और अब अनुच्छेद-370 को खत्म करने के बाद तंत्र का नया झूठ है कि हमने पांच दिन में सब ठिक कर दिया। अजित डोवाल एक वक्त 370 पर अमल करवाते थे और अब वे उसके हटने के साथ शांति की रिपोर्ट भेज रहे हंै। 

सो कश्मीर वह उदाहरण है जिससे पता पड़ता है कि भारत राष्ट्र-राज्य और खासकर हिंदू मुगालतों और झूठ में चौबीसो घंटे जीते हैं। नेहरू के आईडिया ऑफ इंडिया के बुद्धीजन, सुधीजन और लेफ्ट-प्रगतिशील-सेकुलर 72 साल इस झूठ में जीये कि अनुच्छेद-370 से जम्मू-कश्मीर की भावनाएं, उनका दिल भारत में मिल रहा है तो आज मोदी-शाह के आईडिया ऑफ इंडिया के लंगूर हो या पढ़े-लिखे हिंदू राष्ट्रवादी सभी इस गलतफहमी में है कि अनुच्छेद -370 की समाप्ति ने श्रीनगर के मुगल गार्डन की अंतरधारा दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के पिछवाड़े के मुगल गार्डन के फव्वारों मे फूट पड़ेगी। 

कतई नहीं। उलटे नई हकीकत जोरजबरदस्ती है। नरम से क्रूर और क्रूरतम बन कर, बंदूक से एकता-अंख़डता को सींचने का संकल्प है। मोदी-शाह व हिंदू ऑईडिया ऑफ इंडिया का संकल्प अल्पमत की सांप्रदायिक विषबेल को सूखाना है। तभी अपना मानना है कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह व्यर्थ में हकीकत दबाने में शक्ति जाया कर रहे है। आप इंटरनेट, फोन, आवाजाही, सूचना माध्यमों, मीडिया और कम्युनिकेशन को कितना ही खत्म कर दें लेकिन लोगों के दिल-दिमाग की धारणाओं, उसकी तंरगों को कैसे रोक सकते है?  मतलब सख्ती कीजिए, घाटी को जेल में बदल दीजिए लेकिन व्यर्थ इस झूठ को प्रचारित करने की भला क्या जरूरत कि घाटी में खुशी से ईद मनी! 

यह बात शायद ही किसी के गले उतरी होगी। उन लोगों के गले तो कतई नहीं जिनका आपको दिल जीतना है।(या जिन्हे ठोकना है।) भारत के हम लोगों को नोट रखना चाहिए कि कश्मीर घाटी के दस जिलों की अस्सी लाख मुसलमान आबादी कम नहीं होती। इन अस्सी लाख की दशा-दिशा शेष भारत के मुस्लिम दिमाग से जुड़ी हुई है। मसला पांच-दस-पंद्रह साल के मोदी-शाह राज का नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों का है। उस नाते पहली अनिवार्य जरूरत है कि जो भी हो सच्चेपन से हो। ऐसे मामले में सच्चापन क्या होता है, इसके उदाहरण में इजराइल बनाम फिलीस्तीनी मसले को हमेशा ध्यान रखें। हां, इस ईद के दिन भी अल जजीरा, बीबीसी पर मैं फुटैज के साथ खबर देख रहा था कि इजराइली पुलिस ने पूर्वी येरूसलम की अल अक्सा मसजिद को मुसलमानों से खाली कराने के लिए अश्रु गैस, रबर गोली चलाई। वहा मुसलमान ईद की नमाज के लिए इकठ्ठा हुए थे लेकिन यहूदियों के लिए वहा वह पूजा का समय था। इसलिए बवाल हुआ। यह मस्जिद दुनिया के मुसलमानों के लिए तीसरे नंबर का तीर्थ है। रोजाना वहां मुसलमान नमाज के लिए इकठ्ठे होते हंै और इजराइली राष्ट्र-राज्य की नाक, जिद्द से भिड़ते है। लेकिन इजराइली सरकार मीडिया को हटा कर, कर्फ्यू लगा कर शांति-सुकून से ईद की नमाज होने का झूठा प्रोपेगेंडा नहीं बनवाती है। 

पर हम भारतीय ‘सत्य’ में जीना नहीं चाहते। हमारा जीना भगवान विष्णु के अवतारी राजा की वाणी और चाहना में है। जबकि आज, नई एप्रोच अपनाने के बाद वक्त का तकाजा है जो भारत राष्ट्र-राज्य का तंत्र लोगों में सत्य दर्शन की आदत बनवाए। यदि मोदी-शाह अपने आपको सत्य रास्ते पर चलने, भारत को सही दिशा में ले जाने का संकल्प लिए हुए है तो उन्हे हिंदू और मुसलमान दोनों को सत्य का सामना करने का आदि बनाना चाहिए। क्या नहीं?

 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories