• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 28 June, 2019 06:56 AM | Total Read Count 796
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राहुल का कांग्रेसियों पर अच्छा थप्पड़!

कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों के लिए चुल्लू भर पानी में डुब मरने वाली बात है। कांग्रेस मुख्यालय याकि 11 अकबर रोड के कांग्रेस दफ्तर के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों, वेबसाइट को संभालने वालों से ले कर मीडिया टीम, महासचिवों सबको बुधवार शाम को खबर लग गई होगी कि राहुल गांधी ने उनको ले कर क्या कहा? वे उनसे क्या अपेक्षा कर रहे है? बावजूद इसके इन पंक्तियों के लिखने तक कांग्रेस के एक भी पदाधिकारी, मुख्यमंत्री, महासचिव या प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफा भेजने की खबर नहीं है। 

हां, बुधवार को राहुल गांधी का कहा वाक्य कांग्रेसियों में निश्चित ही आग की तरह फैला होगा। उनसे बुधवार को यूथ कांग्रेस की कार्यकारिणी के नेता मिले थे। इन नेताओं ने राहुल गांधी से कहां- सर (राहुल गांधी) यह सामूहिक हार है सबकी जिम्मेदारी बनती है तो सिर्फ इस्तीफा आपका ही क्यों? इसी पर राहुल गांधी ने मार्मिक जवाब देते हुए कहा- मुझे इसी बात का दुख है कि मेरे इस्तीफे के बाद किसी मुख्यमंत्री, महासचिव या प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद राहुल ने दो टूक अंदाज में कहा वे आज नहीं तो कल अध्यक्ष पद छोड़ेंगे।

सोचें, राहुल गांधी क्या गजब हंै। कांग्रेस को बदलने की कैसी जिद्द लिए हुए हंै! नरेंद्र मोदी ने लुटियन दिल्ली में राजनीति करने वाले भाजपाईयों से मुक्ति पाई तो राहुल गांधी भी दिल्ली के खान मार्केट की अड्डेबाजी वाले और सालों से एआईसीसी पर कुंडली मारे मैनेजरों से मुक्ति चाहते हैं। राहुल गांधी को उम्मीद थी कि उन्होने हार की जिम्मेवारी मानते हुए इस्तीफा दिया तो उनके बाद पदाधिकारियों की लिस्ट के नंबर दो कोषाध्यक्ष, नंबर तीन महासचिवों, फिर इंचार्जो, सचिवों, संयुक्त सचिवों के क्रम के सब लोगों में इस्तीफा देने की होड़ लगेगी और कांग्रेसी मन से नए अध्यक्ष, नई टीम, पार्टी के कायाकल्प का रास्ता बनवाएंगे। अहमद पटेल, अंबिका सोनी, अविनाश पांडे, दीपक बाबरिया, वेणूगोपाल, गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक, प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रणदीप सूरजेवाला आदि से लेकर प्रदेशों के  तमाम पदाधिकारी इस्तीफा देंगे। 

लेकिन सब बेशर्म! एक का भी इस्तीफा नहीं। सोचें भला क्यों? क्या ये पदाधिकारी कांग्रेस की हार के लिए कम जिम्मेवार हंै? यदि राहुल गांधी ने अपने को जिम्मेवार माना है, जिम्मेवारी ली है तो प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योतिरादित्य, अहमद पटेल, वेणूगोपाल, मुकुल वासनिक, गुलाम नबी आजाद आदि को यूपी, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि में हार की जिम्मेवारी लेते हुए क्यों नहीं राहुल गांधी को फोलो करना चाहिए? क्या वे उपयोगी है और राहुल गांधी नहीं? राहुल गांधी हटे तो चलेगा लेकिन इनका पद पर बना रहना कांग्रेस के लिए जरूरी या मजबूरी!

सो एक महीने से कांग्रेस के तमाम पदाधिकारी, प्रदेशों के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बेशर्मी से पद पर बैठे है। राहुल गांधी की भावना की रत्ती भर कद्र नहीं। तभी बुधवार को राहुल गांधी का बोला यह वाक्य निर्णायक है कि -मुझे इसी बात का दुख है कि मेरे इस्तीफे के बाद किसी मुख्यमंत्री, महासचिव या प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया।‘

आश्चर्य जो इस बात के बाद भी कांग्रेस में हलचल जीरो। हिसाब से अहमद पटेल को कमान संभाल पूरी एआईसीसी का इस्तीफा करवाना चाहिए। पदाधिकारियों की लिस्ट में वे ही नंबर दो पर हंै। उनका दायित्व है कि राहुल गांधी को उनकी मन की करने देने के लिए वे सभी पदाधिकारियों के इस्तीफे कराएं। प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफे मंगवाएं और मुख्यमंत्रियों के भी इस्तीफे ले कर राहुल गांधी को सौंपे। महिने की कोशिश के बावजूद यदि राहुल गांधी टस से मस नहीं हंै, और जनता के आगे, सार्वजनिक तौर पर वे अब पदाधिकारियों के इस्तीफे न देने पर क्षोभ प्रकट कर रहे है तो पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों को शर्म कर कांग्रेस में सचमुच के कामराज प्लान के जरिए कायाकल्प के इरादे में इस्तीफे देने चाहिए। इससे कांग्रेस का भला होगा। देश की राजनीति का भला होगा और नेहरू-गांधी खानदान के इतिहास में राहुल गांधी के प्रयोग से नया आयाम बनेगा। 

देखते है कांग्रेस पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्रियों में राहुल गांधी का संदेश पैठता है या नहीं?

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