• [WRITTEN BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 30 August, 2019 06:51 AM | Total Read Count 718
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ईश्वर के लिए सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस को बनाए रखें लिबरल!

क्या‍ सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर के हालातों, फैसलों का गौर नहीं करना चाहिए? अदालत भी क्या वैसे ही सोचे जैसे सरकार में अमित शाह या सतपाल मलिक सोचते हैं? क्या कांग्रेस भी वैसी ही बने जैसी भाजपा है? क्या राहुल गांधी वैसे ही बोलें जैसे गिरिराज सिंह, प्रज्ञा ठाकुर, प्रकाश जावडेकर बोलते हैं? क्या विरोधी नेताओं को, अदालत को, मीडिया को जम्मू-कश्मीर पर इसलिए मौन रहना चाहिए क्योंकि दुनिया को पता न पड़े? हमें दुनिया की पहले चिंता करनी चाहिए या अपने नागरिकों की होनी चाहिए? फिर भले वे नागरिक कश्मीर घाटी के 70-80 लाख मुसलमान क्यों न हों? ये सवाल इसलिए है क्योंकि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के नोटिस जारी हुए तो सीमा पार प्रतिक्रिया होगी। अदालत की कही हर बात को संयुक्त राष्ट्र के सामने पेश किया जा सकता है। ऐसे ही जम्मू-कश्मीर को ले कर राहुल गांधी के बयानों पर भाजपा ने, केंद्रीय  मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि उनकी बातों का पाकिस्तान इस्तेमाल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की अर्जी में उनका इस्तेमाल है। लगता है वायनाड (मुस्लिम बहुल सीट) से चुनाव जीतने से उनकी सोच बदली है। वे वोट बैंक की ओछी राजनीति करते हुए देश को शर्मसार कर रहे हैं। 

आलोचना इस बात पर भी है कि विपक्ष के नेता क्यों श्रीनगर जा कर आग में घी डाल रहे हैं? क्यों सीताराम येचुरी को वहा जाने की इजाजत है या कि क्यों विपक्ष कश्मीर घाटी के लोगों की चिंता कर रहा है? जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने इस सबको इस जुमले में व्यक्त किया कि राहुल (विपक्ष) लोगों से इतना कहें कि वे 370 के समर्थक है तो लोग जूतों से मारेंगे। सोचें इस वाक्य को कहते हुए सत्यपाल मलिक ने यह भी नहीं सोचा कि उनकी इस बात का घाटी के उन नागरिकों (मुसलमानों) पर क्या असर होगा, जहां उन्हें गवर्न करना है! 

मैं अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का पुरजोर समर्थक चार दशक से हूं। पर इसके साथ घाटी के मुसलमानों का भारत में ही मरना-खपना भी मानता हूं। उन्हें शेष भारत की मुस्लिम आबादी का ही हिस्सा मानता हूं। भारत राष्ट्र-राज्य के लिए कश्मीर का मुसलमान हो या केरल के वायनाड का या असम का मुसलमान सभी समान हैं। इन सबको संविधान, सुप्रीम कोर्ट, अदालत, मीडिया से सुनवाई या रोने का वह न्यूनतम कंधा मिला हुआ है, मिला हुआ होना चाहिए, जिससे इनका देश की व्यवस्था, संविधान पर भरोसा बना रहे। यह तब संभव है जब सुप्रीम कोर्ट या मीडिया या राजनीतिक दलों में (भले सभी में न हो) यह उदार, लिबरल भाव हो कि मुसलमान की भी उसी शिद्दत से रक्षा होगी, जैसी हिंदू की या अन्य समुदाय की है। 

मतलब हिंदुवादी, अनुदारवादी धारा के साथ वह उदारवादी, वे सेकुलर कंधे, वह सेकुलर राजनीति जरूरी है, जिससे कभी कोई समुदाय अपना विकल्प खत्म हुआ न माने। मान लें बुधवार को सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार के असर में दो टूक अंदाज में राज्यपाल सत्यपाल मलिक जैसी जुमलेबाजी में कहता कि हम अनुच्छेद 370 का हटाने के फैसले पर सुनवाई नहीं करेंगे। ऐसा करेंगे तो जनता जूते मारेगी तब देश के मुसलमानों पर क्या असर होता? 

तभी तमाम तरह के हिंदू राष्ट्रवादियों से अनुरोध है कि अनुच्छेद 370 हटाने, बांग्लादेशी घुसपैठियों में मुसलमानों को खदेड़ने, अयोध्या-मथुरा-काशी में मंदिर बनाने, समान नागरिक संहिता लागू करने के तमाम एजेंडे के बीच भी यह ध्यान रहे कि मुसलमानों को भारत में ही रहना है। इनके लिए विश्वास, सुनवाई वाली संस्थाओं का, राजनीतिक पार्टियों का कंधा कभी खत्म न होने दें। यदि राहुल गांधी मुस्लिम बहुल वायनाड सीट के मुस्लिम वोटों की चिंता में भी राजनीति कर रहे हैं तो उसका स्वागत होना चाहिए। राहुल गांधी, येचुरी मुसलमानों के नेता रहें तो देश का भला है। नहीं तो इनकी जगह ओवैसी, आजम खान एंड पार्टी यदि नेता बन गए तो 1947 से पहले वाली राजनीति लौटेगी और  लेने के देने पड़ेंगे।

सो, मुसलमान को जब यहीं रहना है और अनुच्छेद 370 खत्म करके कश्मीर घाटी के लोगों को देश की मुख्यधारा में एकीकृत करना है तो उनके भरोसे, उनके रोने के लिए कांग्रेस या संस्थाओं के कंधे, एक के बाद एक ऑप्शन, विकल्प होने चाहिए या नहीं? भारत का मुसलमान यदि कांग्रेस और राहुल गांधी के कंधे पर सिर रख कर रोए या कांग्रेस और लेफ्ट अपना कंधा उन्हें दे रहे हैं तो भाजपा को, मोदी-शाह को उसका चुपचाप समर्थन करना चाहिए। खास कर तब जब मोदी-शाह ने हिंदू वोटों को सौ टका भक्त वैसे ही बना रखा है। 

यहां राजनीतिक नफे-नुकसान की बात नहीं है, बल्कि देश की एकता-अखंडता में 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों की सहभागिता, साझेदारी का सवाल है। सुप्रीम कोर्ट से तीन फैसले हो रहे हैं। जम्मू कश्मीर के मामले की सुनवाई के साथ अयोध्या और एनआरसी के तीन अहम मामलों में यदि सुप्रीम कोर्ट दिखावे के लिए भी लिबरल, पक्षपातरहित नहीं हुआ तो 20-25 करोड़ अल्पसंख्यक आबादी को क्या मैसेज जाएगा? इसकी चिंता समझदारी के साथ प्राथमिकता से होनी चाहिए। यह चिंता बेतुकी है कि विपक्ष, राहुल गांधी घाटी में अशांति, पाबंदी, सरकार विरोधी बयानबाजी से पाकिस्तान को कुप्रचार का मौका दे रहे हैं। यह देशहित में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जब सुनवाई होगी और कहा जाएगा कि इतने दिनों, महीनो से इंटरनेट, आवाजाही रूकी हुई है या जनजीवन घरों में बंद है, ओपन जेल वाली दशा है तो दुनिया में पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बल मिलेगा। 

अब यह बात वैश्विक जमात के उन राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, ओपिनियन मेकरों, नियंताओं के लिए बेमतलब है, जिन्हें अपने सेटेलाइट से पल-पल की खबर रहती है कि कश्मीर घाटी के या दुनिया के किसी भी कोने में कहां जीवन आजाद है और कहां बाड़े वाला है। सुरक्षा परिषद् के सभी सदस्य देशों को पता है कि घाटी में क्या स्थिति है? भारत के लोग भले भारतीय मीडिया के झूठ में जी रहे हों लेकिन वैश्विक मीडिया दुनिया को हकीकत बताता रहता है।

वैश्विक स्तर पर यदि एकजुटता दिखानी है तो प्रधानमंत्री मोदी अपने साथ राहुल गांधी को, येचुरी को संयुक्त राष्ट्र ले जाएं। इनसे वहां यह लॉबी हो कि लोकतांत्रिक देश में सत्तारूढ़ पार्टी ने घोषणापत्र के अनुसार वादा पूरा किया है तो यह लोकतंत्र में गलत नहीं होता। श्रीनगर में विपक्ष के नेता घूमें, लोगों से मिलें, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करे और साथ ही संयुक्त राष्ट्र में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाए तो सच्चे लोकतांत्रिक देश के फैसले से पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को काटा जा सकता है। क्या नहीं? 

  • केरल का एक मुस्लिम कश्मीर में अपने लिए जगह जमीन नहीं ले सकता असम का एक मुस्लिम कश्मीर में अपने लिए जमीन नहीं ले सकता ऐसा प्रावधान था 370 में राज्यपाल को हिंदूवादी कहना अति होगा धारा 370 हटने से देश की पूरी जनता को हक मिला है कि कश्मीर में अपने लिए जमीन खरीदें कश्मीर वासियों को हक मिला है भारत में कहीं भी बसने का पहले कश्मीर की बेटियों को आजादी नहीं थी अन्य प्रांतों में शादी करने की आज वह अपने मनपसंद साथी से शादी कर सकती है और भारत में कहीं भी बस सकती है राज्यपाल का कहने का मतलब आप मुसलमानों से मत जोड़िए उन्होंने पूरे देश के संदर्भ में कहा है आप अपनी तीखी भाषा को थोड़ा मीठा बनाइए

    on 10:56 AM | August 31

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