• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 16 July, 2019 05:30 PM | Total Read Count 188
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ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े लक्षण, कारण, प्रकार एंव बचाव

ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली एक भयावह बीमारी है। शरीर के किसी अंग में होने वाली कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर का प्रमुख कारण होती है। शरीर की आवश्यकता अनुसार यह कोशिकाएं बंट जाती है, लेकिन जब यह लगातार वृद्धि करती हैं तो कैंसर का रूप ले लेती हैं। इसी प्रकार स्तन कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि, स्तन कैंसर का मुख्य कारण है। कोशिकाओं में होने वाली लगातार वृद्धि एकत्र होकर गांठ का रूप ले लेती है, जिसे कैंसर ट्यूमर कहते हैं। स्तन कैंसर होने पर पहले या दूसरे चरण में ही इसका पता चल जाने से सही समय पर इसका इलाज संभव है। लेकिन इस बारे में पता चलना भी आपकी जागरूकता पर निर्भर करता है। यदि आप स्तर कैंसर के प्रति जागरूक हैं, तो इसके लक्षणों को पहचानकर आप इसका इलाज सही समय पर करवा सकते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

  • ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए स्तन कैंसर के लक्षणों को स्तन को देखकर और महसूस करके पता लगाया जा सकता है।
  • किसी ब्रेस्ट में या बाहों के नीचे गांठ
  • स्तन के आकार में परिवर्तन, मोटापा, संकुचन या स्तन में सूजन स्तन कैंसर के मुख्य लक्षण हैं।
  • ब्रेस्ट या निप्पल का लाल हो जाना
  • ब्रेस्ट से साफ या ब्‍लड जैसे द्रव का बहना
  • ब्रेस्ट के टिश्यू या त्वचा का ज्यादा समय तक सख्त बने रहना
  • ब्रेस्ट या निप्पल की त्वचा पर कुछ अलग दिखना या अनुभव होना
  • ब्रेस्ट का कोई हिस्सा बाकी हिस्सों से अलग दिखाई देना
  • ब्रेस्ट की त्वचा के नीचे कहीं सख्त अनुभव होना

ब्रेस्ट कैंसर के कारण 

  • पारिवारिक इतिहास का रिस्क फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण है। ब्रेस्ट कैंसर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता है। अगर फस्ट डिग्री रिलेटिव यानी सगे रिश्ते में किसी को ब्रेस्‍ट कैंसर हो तो ऐसी महिला में ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका अन्य की तुलना में करीब दोगुनी ज्यादा हो जाती है। दो जीन बीआरसीए1 और बीआरसीए2 इस बीमारी को आगे की पीढ़ी में ले जाते हैं और इनकी जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी महिला में पारिवारिक इतिहास के कारण ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा है नहीं।
  • ब्रेस्ट कैंसर ही नहीं, परिवार में किसी को किसी भी अन्य प्रकार का कैंसर हो, तब भी सतर्क रहना चाहिए।
  • 50 साल से ज्यादा की उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है।
  • स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजन का ज्यादा स्राव ब्रेस्‍ट कैंसर होने की आशंका बढ़ा देता है। गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने वाली और मेनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापा और शराब का सेवन भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ा देता है।

ब्रेस्ट कैंसर के प्रकार 

इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा- ब्रेस्ट कैंसर का ये रूप मिल्क डक्ट्स में विकसित होता है। इतना ही नहीं महिलाओं में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर 75 फीसदी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा ही होता है। इस प्रकार का कैंसर डक्ट वॉल से होते हुए स्तन के चर्बी वाले हिस्से में फैल जाता है।

इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमाये ब्रेस्ट कैंसर बहुत ही कम देखने को मिलता है। यानी 1 फीसदी भी इस प्रकार का कैंसर नहीं होता। दरसअल इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा का उपचार बहुत मुश्किल होता है। इतना ही नहीं ब्रेस्ट कैंसर का ये रूप शरीर में तेजी से फैलता है। जिससे महिलाओं की मौत का जोखिम भी बना रहता है।

पेजेट्स डिज़ीज़- इन्फ्लेमेटरी कार्सिनोमा की ही तरह पेजेट्स डिजीज भी लगभग 1 फीसदी ही महिलाओं में पाया जाता है। ये निप्पल के आसपास से शुरू होता है और इससे निप्पल के आसपास रक्त जमा हो जाता है जिससे निप्पल और उसके चारों और का हिस्सा काला पड़ने लगता है। ब्रेस्ट कैंसर का ये प्रकार भी इन्वेसिव डक्टल कार्सिनोमा की तरह निप्पल के मिल्क डक्ट्स से शुरू होता है। इस प्रकार का ब्रेस्ट कैंसर आमतौर पर उन महिलाओं को होता है जिन्हें ब्रेस्ट से संबंधित समस्याएं होने लगे। जैसे- निप्पल क्रस्टिंग, ईचिंग होना, स्तनों में दर्द या फिर कोई इंफेक्शन होना।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव

  • शराब के कम सेवन से व्यायाम और स्वस्थ भोजन निश्चित रूप से कैंसर फैलने के खतरे को कम कर सकते हैं।
  • मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में प्रयोग होने वाली दवा एविस्टा (रेलोक्सिफिन) का इस्तेमाल भी ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए किया जाता है।
  • टेमोक्सीफेन का उपयोग स्तन कैंसर के उच्च जोखिम कारक वाली महिलाओं में किया जाता है।
  • विटामिन सी भी आपको स्तन कैंसर से बचाता है। यह आपके प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत करके कैंसर कोशि‍काओं को बढ़ने से रोकता है। 
  • ग्रीन टी सेवन भी स्तन कैंसर से रक्षा करने में सहायक है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-इन्फ्लैमेटरी गुण स्तन कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं। 
  • कैंसर कोशि‍काओं की वृद्ध‍ि रोकने के लिए गेहूं के जवारे भी बेहद कारगर उपाय है। 
  • उच्च जोखिम वाली महिलाओं में कैंसर के प्रसार को रोकने के लिए, स्तन को ऑपरेशन द्वारा हटा दिया जाता है।
  • हाई रिस्क वाली महिलाओं में कैंसर के प्रसार को रोकने के लिए ऑपरेशन के जरिये ब्रेस्ट हटा दिया जाता है। 

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