• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 11 May, 2019 11:23 AM | Total Read Count 192
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भारत भा रहा है हॉलीवुड को

श्रीशचंद्र मिश्रः हॉलीवुड स्टार विल स्मिथ ने अक्तूबर में हरिद्वार प्रवास के दौरान शिव मंदिर में पूजा अर्चना की और शाम की गंगा आरती में हिस्सा लिया। ‘रैंबो’ और ‘रॉकी’ सीरिज की फिल्मों से विख्यात हुए सिलवेस्टर स्टेलोन छह साल से अपने बेटे की बरसी मना रहे हैं। पहली बरसी पर वे खुद हरिद्वार आए थे और विधि विधान से अनुष्ठान कर गौदान किया था। 2015 में श्राद्ध के दिनों में उनके परिजन आए और कनखल में उन्होंने पिंडदान किया। मेल गिब्सन, कियानु रीव्स, शर्ले मैक्लीन आदि सितारे भी आध्यात्मिक शांति के लिए भारत आ चुके हैं।

सिर्फ योग और आध्यामत्मिकता के प्रचार-प्रसार ने ही हॉलीवुड की हस्तियों में भारत के प्रति मोह बढ़ाया है। फिल्मों और उससे जुड़े व्यावसायिक फायदे का भी इसमें बड़ा योगदान है। टाम क्रूज ‘मिशन इम्पासिबल-6’ की शूटिंग के लिए भारत नहीं आ पाए। हालांकि उन्होंने इसका वादा किया था। वादे से वे मुकरे नहीं हैं। बस पहले तो शूटिंग की अनुमति पाने की जद्दोजहद और हरी झंडी मिल जाने के बाद शूटिंग के दौरान भीड़ के बवाल का खतरा अलग, सो फिल्म की यूनिट ने भारत आने का इरादा टाल दिया।

हालांकि टाम क्रूज ने फिर कहा है कि स्थितियां अनुकूल हुईं तो वे निश्चित रूप से भारत में शूटिंग करना पसंद करेंगे। पिछले साल आगरा में ब्रिटिश फिल्म यूनिट के साथ हुई बदसलूकी से हालांकि विदेशी कलाकारों के मन में थोड़ी आशंका पैदा हुई है लेकिन इससे हॉलीवुड या अन्य देशों के भी कलाकारों, फिल्मकारों का भारत के लिए मोह कम नहीं हुआ है।

जैकी चैन फिल्म ‘कुंग फू योगा’ की शूटिंग के लिए पिछले दिनों भारत आए और फराह खान के निर्देशन में मुंबइया स्टाइल के ठुमके भी लगाए। इससे पहले फिल्म ‘द मिथ’ की कुछ शूटिंग उन्होंने भारत में की थी। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी पर बनी फिल्म ‘भोपाल ए प्रेयर फॉर रेन’ के लिए मार्टिन शीन, कॉल पेन मीशा बर्टन आदि कलाकारों ने भारत आने में कोई हिचक नहीं दिखाई।

यह सही है कि विदेशी फिल्मों में काम करने का जो पागलपन भारतीय कलाकार बरसों से दिखाते रहे हैं वैसा क्रेज कुछ समय पहले तक विदेशी कलाकारों में नहीं था। भारत को लेकर पश्चिम में फैला दी गई भ्रांतियां इसकी वजह थी लेकिन अब स्थितियां बदल रही है। फिलहाल भारत में हॉलीवुड की फिल्मों के लिए खासे मुनाफे का बाजार विकसित हुआ है। इसे देखते हुए कई दिग्गज कलाकार अपनी फिल्मों का प्रमोशन करने भारत आ रहे हैं। 2017 में ‘स्मर्फ्शः द लॉस्ट विलेज’ के कलाकार आए।

विन डीजल अपनी फिल्म ‘ट्रिपल एक्सः द रिटर्न ऑफ जेंडर’ के प्रमोशन के सिलसिले में भारत आए। लगातार वे भारतीय लिबास में रहे और फिल्म की अपनी नायिका दीपिका पादुकोण के साथ लुंगी डांस भी किया। ह्यू जैकमैन ने अपनी फिल्म ‘लोगन’ की रिलीज से पहले भारत में अपने प्रशंसकों को सोशल मीडिया पर नमस्ते कहा। यही एमा वाटसन ने किया। अपनी फिल्म ‘ब्यूटी एंड बीस्ट’ की रिलीज से पहले एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने लोगों की हिंदी में होली की बधाई दी। ‘बेवाच’ के नायक ड्वेन जॉनसन प्रियंका चोपड़ा के साथ फिल्म का प्रमोशन करने भारत आए। ब्रेडन प्रेजर ने फिल्म ‘द फील्ड’ की शूटिंग पिछले दिनों की दिल्ली में की।

विदेशी कलाकारों की हिंदी फिल्मों में काम करना एक समय भले ही विशेष घटना रही हो, पिछले कुछ सालों में कई देशों के कलाकार, खास तौर पर अभिनेत्रियां, हिंदी फिल्मों की महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हैं। एरिका कारकुजेत्स्का पोलैंड की हैं। सितंबर 2014 में अजय देवगन ने अपनी फिल्म ‘शिवाय’ के लिए वारसा में विदेशी चेहरे की तलाश की। ऑडिशन में एरिका भी शामिल हुई। हिंदी बोलने की बाध्यता नहीं थी फिर भी एरिका ने कोशिश करके हिंदी सीखी और कुछ संवाद हिंदी में बोले। वे चुन ली गईं। एरिका इस नए अनुभव से बेहद रोमांचित हैं और भविष्य में भी हिंदी फिल्मों में काम करना चाहती हैं। कैटरानी मुरिनो इटली की हैं। जेम्स बांड की फिल्म ‘कसिनो रोयाल’ में वे काम कर चुकी हैं। ‘फीवर’ से उन्होंने हिंदी फिल्मों में दस्तक दे दी। विदेशी हीरोइनों के लिए हिंदी फिल्मों के दरवाजे खुलने की सिर्फ यही दो मिसाल नहीं है। पिछले दो दशक में हिंदी फिल्मों में दर्जन से ज्यादा विदेशी हीरोइनें दिखाई दी हैं।

भारतीय कलाकारों को सही भूमिका देने में विदेशी फिल्मकारों ने भले ही उदासीनता बरती हो, भारत में विदेशी कलाकारों और खास कर हीरोइनों का इस्तेमाल करने का उत्साह कभी नहीं थमा। इसका इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है। हालांकि बीते सालों में इस तरह कोशिश छिटपुट ही हुई। 1954 में किशोर साहू ने ‘मयूर पंख’ बनाई। इसमें विवाहित राज कुमार एक विदेशी लड़की से प्यार करने लगता है। ओडेट फर्ग्युसन वह विदेशी लड़की थीं। राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में रूस की बैले नर्तकी रॉबिन किना नजर आईं तो देव आनंद ‘स्वामी दादा’ के लिए अमेरिका की क्रिस्टीन ओ नील को ले आए।

पिछले कुछ समय से हिंदी फिल्मों में विदेशी हीरोइनों को प्रमुख भूमिकाओं में लेने का रिवाज कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। कुछ तो कथित रूप से कहानी की मांग के हिसाब से किया गया तो कुछ फिल्म में अतिरिक्त आकर्षण जोड़ने की नीयत से। ‘लगान’ में आमिर खान की टीम को क्रिकेट सिखाने वाली रैशेल शैली स्वीडिश थीं। ‘रंग दे बसंती’ में आईं एलिस पैटन ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और हांगकांग के अंतिम गवर्नर क्रिस पैटन की बेटी थीं। अमेरिकी अभिनेत्री एली लॉटर ‘मैरी गोल्ड’ में सलमान खान की नायिका बनीं। ऋतिक रोशन के साथ ‘काइट्स’ में मुख्य भूमिका करने वाली बारबरा मोरी मैक्सिको से आईं। तो सैफ अली खान की ‘लव आजकल’ में खालिस पंजाबी लड़की लगने वाली जिसेली मांटिरियो ब्राजील से। कनाडा मूल की लीसा रे को सबसे पहले महेश भट्ट ने ‘कसूर’ में लिया और फिर दीपा मेहता ने ‘वाटर’ में।

इन सभी हीरोइनों में यह समानता रही कि एक फिल्म के बाद वे फिर नजर नहीं आईं। टेक्सास (अमेरिका) में जन्मीं लिंडा आर्सेन्को भी लंबी पारी खेलने के मूड में हैं। देखना है कि ‘काबुल एक्सप्रेस’,‘आलू चाट’ व ‘मुंबई सालसा’ के बाद उन्हें और फिल्में मिल पाती हैं या नहीं। यही सवाल एरिका व कैटरीना के सामने उनकी पहली फिल्म के बाद खड़ा हो गया है। तत्कालीन चेकोस्लोवाकिया की याना गुप्ता और इटली की रोजा कैटिलानो फिलहाल आइटम नंबर करने तक सीमित हैं।

‘बाबू जी जरा धीरे चलो’ गीत से विख्यात हुई याना इन दिनों योग गुरु की भूमिका में हैं। पिछले कुछ समय से फिल्मों के समूह नृत्यों में विदेशी बालाओं की मौजूदगी बढ़ती जा रही है। ये ज्यादातर विघटन की शिकार हुए पूर्वी यूरोप के देशों की है। गोरा रंग, नाचने की अनुभव और जिस्म उघाड़ने में कोई संकोच नहीं। लिहाजा आईपीएल में चीयर्स लीडर्स के अलावा टीवी शो व फिल्म पुरस्कार समारोह आदि में उनकी मांग बढ़ती जा रही है। और उन्हें अंधाधुंध पैसा भी दिया जा रहा है।

पिछले कुछ सालों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग देने के लिए कई हस्तियां भारत आई हैं। हॉलीवुड की कुछ हस्तियों ने इन उद्देश्यों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए फाउंडेशन बना रखे हैं। भारत में उन्हें खासा समर्थन मिल जाता है। इस नाते भारत उनका प्रिय गंतव्य बन गया है। ऑस्कर विजेता मैट डेमन की फाउंडेशन ने स्वच्छ जल अभियान की शुरुआत हालांकि अफ्रीका से की लेकिन 2009 में भारत की पहली यात्रा में उन्हें अपने अभियान की सफलता की ज्यादा गुंजाइश दिखी। लिहाजा अगस्त 2013 में वे फिर भारत आए। पुडुचेरी, चेन्नई व बंगलूर में लोगों से मिले। उनकी राय जानी। उनके अनुभव साझा किए और अब उनकी योजना एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने की है। उनका कहना है कि भारत आकर उन्हें काफी सुकून मिलता है।

जैकी चैन ‘रश आवर’ से चर्चित हुए और कई फिल्मों में मार्शल आर्ट्स का हुनर दिखाने के बाद खुद भी फिल्में बनाने लगे। अपनी फिल्म ‘द मिथ’ में उन्होंने न सिर्फ मल्लिका सहरावत को लिया बल्कि कुछ दृश्य भारत में फिल्माए भी। जून 2013 में वे भारत आए। युवा लड़कों व लड़कियों को मार्शल आर्ट्स के गुर सिखाने के अलावा स्माइल फाउंडेशन के बच्चों को अपना सपना पूरा करने की दिशा दी। खुद अभावग्रस्त बचपन बिताने वाले जैकी चैन ने उस मौके पर एक प्रेरणादायक भाषण दिया जिसमें उन्होंने अगली पीढ़ी को उनके बेहतर और सम्मानजनक भविष्य के लिए शिक्षित व प्रशिक्षित करने को सबकी जिम्मेदारी बताया। लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।

रिचर्ड गेरे को भारत ने खींचा महात्मा बुद्ध के प्रति उनके आकर्षण ने। बौद्ध धर्म को जानने के बाद उसमें उनकी इतनी गहरी आस्था हो गई कि उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। इस सिलसिले में वे कई बार भारत आए और उन्होंने हर बार स्वीकार किया कि भारत आकर उन्हें सबसे ज्यादा आत्मिक शांति मिली। रिचर्ड गेरे अरसे से तिब्बत की आजादी की आवाज उठा रहे हैं। जनवरी 2015 में उन्होंने बौद्ध धर्म, दलाई लामा और तिब्बत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब एक घंटे तक विचार विमर्श किया। मिशेल येहों सड़क सुरक्षा अभियान की वैश्विक एंबेसडर के रूप में 2008 में भारत आईं और चार दिन सड़कों पर घूम कर उन्होंने सुझाया कि बढ़ते सड़क हादसों से बचने के उपाय कैसे किए जाएं। 2013 में हॉलीवुड की दो अभिनेत्रियों शैरन स्टोन व हिलेरी स्वाक मुंबई आईं। मकसद लोगों को एड्स के लिए जागरूक करना और साधनविहीन मरीजों को इलाज के लिए मदद मुहैया कराना। उन्होंने ही यह तथ्य सामने रखा कि एड्स के इलाज की ज्यादातर दवाइयां भारत में बनने के बावजूद पचास फीसद से ज्यादा मरीजों को अपने देश में बनी दवाएं ही उपलब्ध नहीं हो पातीं।

यह सही है कि किसी फाउंडेशन या अभियान के तहत ही आम तौर पर हॉलीवुड की ज्यादातर हिस्तयां पिछले कुछ सालों में भारत आई हैं। यह उनकी मानवीय व सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा रहा और इसके लिए किसी ने भी भारत आने में हिचक नहीं दिखाई। भारत प्रवास के बाद सभी ने इस देश और लोगों के बारे में फैलाई गई भ्रांतिपूर्ण धारणाओं को उन्होंने गलत पाया। भारत आकर उन्हें लगा कि वे अपने देश में अपने लोगों के बीच ही हैं। पॉप गायिका व अभिनेत्री मैंडी मूर, सात साल से लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ अभियान चला रही धर्मार्थ संस्था ‘पापुलेशन सर्विस इंटरनेशनल’ से जुड़ी हुई हैं। सितंबर, 2015 में वे भारत आईं। न भाषण दिया और न ही किसी सेमिनार का हिस्सा बनीं। पटना और लखनऊ के आसपास के गांवों का उन्होंने दौरा किया। दिल्ली की स्लम बस्तियों में भी वे गईं।

फिल्में तो संबंध सुधारने और किसी देश के लिए आकर्षण जगाने का सबसे मजबूत माध्यम रहा है। इसके जरिए भी हॉलीवुड की हस्तियों का भारत से नाता जुड़ा है। यह जरूर है कि हॉलीवुड की फिल्मों में काम करने का भारतीय कलाकारों का इतिहास जितना पुराना है, वैसा लंबा और व्यापक सिलसिला वहां के कलाकारों का हिंदी फिल्मों से जुड़ने का नहीं बना पाया। इसके व्यावसायिक कारण शायद उतने नहीं थे जितना वहां के कलाकारों का संकोच था। हिंदी फिल्मों के स्तरहीन और विषयहीन होने के बारे में जो धारणा प्रचारित कर दी गई थी उसमें यह स्वाभाविक भी था।

सालों पहले देव आनंद ने शर्ले मैक्लीन को और राज कपूर ने सोफिया लारेन को अपनी फिल्म में लेने की इच्छा जाहिर की लेकिन बात नहीं बन सकी। इस मामले में हॉलीवुड के कलाकारों ने अनिवासी भारतीयों की हिंदी फिल्मों पर ज्यादा भरोसा किया। ऐसी ही एक फिल्म ‘शालीमार’ कृष्ण शाह ने बनाई। उसकी शूटिंग भारत में हुई। रैक्स हेरिसन, जॉन सेक्सन व सिल्विया माइल्स सरीखे सितारे इस सिलसिले में भारत आए। जेम्स बांड की फिल्म ‘ऑॅक्टोपसी’ की काफी शूटिंग उदयपुर में हुई। पिछले दो दशक में एक दर्जन से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग भारत के विभिन्न शहरों में हुई है। खास कर वाराणसी व हरिद्वार की लोकेशन हॉलीवुड के फिल्मकारों को कुछ ज्यादा ही भायी है।

हॉलीवुड की फिल्में पहले भी भारत में पसंद की जाती थीं। पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में अपार संभावना भांप कर हिंदी, तमिल व तेलुगू में डब कर के फिल्मों को रिलीज करने का जो नया दांव खेला गया है वह काफी फायदेमंद साबित हुआ है। ‘अवतार’, ‘जुरासिक वर्ल्ड’, ‘टाइटैनिक’, ‘फास्ट एंड फ्यूरियस-8’, ‘ट्रांसफार्मर्स’ आदि कई फिल्मों ने सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार कर भारत के प्रति नए सिरे से रूचि जगा दी है। इसी का नतीजा है कि सिल्वेस्टर स्टेलोन ‘कमबख्त इश्क’ में और जॉनी डीप ‘हे बेबी’ में दिखे। अब साजिद नाडियावाला सलमान खान और स्टेलोन को लेकर फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।

फिल्म के प्रमोशन के लिए हॉलीवुड के कलाकारों व फिल्मकारों का भारत आने का सिलसिला बढ़ रहा है। ‘मिशन इंपासिबल’ के लिए आए। स्टीवन स्पील बर्ग अपनी फिल्म ‘ब्रिज आफ स्पाइस’ की रिलीज के मौके पर भारत में रहने की है। 2013 में पहले भी अपनी फिल्म ‘लिंकन’ का प्रमोशन करने स्पील बर्ग भारत आए थे। फिल्म ‘टाइटैनिक’ के नायक लियोनार्दो द कैप्रियो एक वृत्त फिल्म के निर्माण के सिलसिले में भारत आए। पर्यावरण परिवर्तन पर यह फिल्म है। आठ साल पहले बाल तस्करी पर वृत्त फिल्म बनाने के लिए लिंडसे लोहान भारत आई थीं। दिल्ली और कोलकाता में उन्होंने फिल्म की शूटिंग की। यह अलग बात है कि अपनी गतिविधियों वीजा नियमों का उल्लंघन करने और समस्या का विकृत रूप दिखाने के विरोध व विवाद का उन्हें सामना करना पड़ा।

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