• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 16 July, 2019 07:02 AM | Total Read Count 140
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भारत में तेजी से घट रही है जनसंख्या वृद्धि दर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित नए वैश्विक जनसंख्या अनुमानों के अनुसार भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आ रही है और इसका वैश्विक जनसांख्यिकी पर ठोस प्रभाव पड़ रहा है। सन 2019 के जनसंख्या अनुमान की तुलना पिछले वर्षों से करने पर पता चलता है कि आने वाले समय में भारत की जनसंख्या के बारे में लगाए गए अनुमानों में संशोधित कमी किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है। वहीं चीन की जनसंख्या वृद्धि को लेकर इन अनुमानों को हर बार संशोधित कर बढ़ाया गया है।

भारत कब चीन को जनसंख्या के मामले में पीछे छोड़ देगा, इस अनुमान में भी हर साल उतार-चढ़ाव होता रहा है। 2019 के अनुमान के मुताबिक भारत जनसंख्या के मामले में चीन को 2027 में पीछे छोड़ देगा। 2008 में यह अनुमान 2028 का था। वहीं 2015 के अनुमान के मुताबिक भारत ऐसा 2022 में करने वाला था। भारत की जनसंख्या वृद्धि को लेकर किए जा रहे इन संशोधनों ने वैश्विक उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया है। इन संशोधनों में भारत की जनसंख्या वृद्धि दर को लगातार घटता हुआ दिखाया गया है। जनसंख्या अनुमान पूरी तरह से इस तथ्य पर आधारित होते हैं कि एक देश में जन्म और मृत्यु दर की दशा क्या है। 

भारत में जन्म दर अंतराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान के मुकाबले बहुत तेजी से घटी है। खासकर भारत के गरीब राज्यों में इसमें अभूतपूर्व कमी आई है। उच्च जन्म दर के लिए जाने जाने वाले समुदाओं में भी इस ओर ठोस कमी हुई है।

जनसांख्यिकी ट्रेंड्स के आधार पर 2.1 की जन्म दर को जनसंख्या वृद्धि दर के लिए स्थिर दर माना जाता है। मतलब अगर एक महिला औसतन 2.1 बच्चों को जन्म देती है, तो भविष्य में जनसंख्या उसी समान आकार की बनी रहेगी जितनी की वर्तमान में है। 2013 में भारत में जन्म दर 2.3 थी। 2012 में यह 2.4 थी। वर्तमान समय की अगर बात करें तो बिहार और मेघालय में ही जन्म दर 3 है। बाकी सभी राज्यों में जन्म दर 2.1 के नीचे है। नए आंकड़ों से पता चला है कि भारत के गरीब राज्यों में जन्म दर बहुत तेजी से घटी है। खासकर पढ़ी-लिखी महिलाओं के बीच यह कमी सर्वाधिक है।

समुदायों की अगर बात करें तो हिंदुओं के मुकाबले मुसलमानों में जन्म दर अधिक है, लेकिन मुसलमानों में जन्म दर हिंदुओं के मुकाबले तेजी से घट रही है। इस प्रकार दोनों समुदायों के बीच जन्म दर का अंतर तेजी से घटता जा रहा है। 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 1992-93 में यह अंतर जहां 30 फीसदी का था, वहीं 2015-16 में यह अंतर 23.8 फीसदी का रह गया है।

जनसांख्यिकी विशेषज्ञों के अनुसार जो राज्य समृद्ध, शिक्षित और स्वस्थ होते जा रहे हैं, वहां जन्म दर लगातार कमी होती जा रही है। इन राज्यों में रहने वाली सभी महिलाएं कम बच्चों को जन्म दे रही हैं। इस हिसाब से दक्षिणी राज्यों में रहने वाली | मुस्लिम महिलाओं में जन्म दर उत्तर भारत में रहने वाली हिंदू महिलाओं के मुकाबले कम है।

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