• [EDITED BY : नया इंडिया टीम] PUBLISH DATE: ; 01 March, 2019 07:33 AM | Total Read Count 350
  • Tweet
शहादत के नाम पर राजनीति और सवाल

भारत और पाकिस्तान के बीच इस वक्त तनावपूर्ण हालात हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच एक दूसरे पर आरोपों-प्रत्यारोपों का जो दैर चल रहा है। विपक्ष ने हाल में कुछ मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी आपत्तियां रखीं तो सरकार ने भी विपक्ष की भूमिका और उसके रवैऐ को लेकर उसे कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद से ही राजनीति का ऐसा दौर शुरू हो गया था। शोक और दुख के इस अवसर को लोगों की भावनाओं के साथ जोड़ने और उसे भुनाने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी का नतीजा था कि दस दिन के भीतर उग्र-राष्ट्रवाद का ऐसा चेहरा देखने को मिला, जिसकी पऱिणति देशभर में कश्मीरियों पर हमलों के रूप में सामने आई। कश्मीरी छात्रों को हॉस्टलों से निकालने, उन्हें प्रताड़ित करने, कश्मीरी व्यापारियों को पीटने, सोशल मीडिया पर कश्मीरियों के खिलाफ अभियान चलाने की घटनाएं पुलवामा के हमले से ज्यादा घातक और चिंताजनक रूप धारण कर गईं। शहादत की आड़ में राजनीति का यह पहला नमूना था।

जाहिर है, ऐसी घटनाएं पर विपक्ष कैसे चुप रह सकता है। पुलवामा की घटना के बाद विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्षी नेता चाहते थे कि प्रधानमंत्री की ओर से ऐसी बैठक बुलाई दाए और विपक्ष से जानकारियां साझा कर उसे भरोसे में लिया जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सर्वदलीय बैठक गृहमंत्री राजनाथ की ओर से बुलाई गई। ऐसे मेंम विपक्ष को यह सवाल उठाने का मौका मिला कि आखिर प्रधानमंत्री खुद क्यों बच रहे हैं सर्वदालीय बैठक बुलाने से, क्या विपक्ष के सवालों से बचना चाह रहे हैं। इसलिए विपक्ष ने प्रधानमंत्री के इस कदम को लोकतांत्रिक परिपाटी के विरुद्ध करार दे डाला।

पाकिस्तान पर कार्रवाई के बाद बुधवार को संसद भवन परिसर में विपक्षी दलों ने बैठक की। इसमें पहले से निर्धारित विषयों पर कोई चर्चा नहीं हुई, बल्कि सारे दलों ने साझा बयान जारी कर पाकिस्तान की कड़ी निंदा की। लेकिन साथ ही सरकार से भी कहा कि जवानों की शहादत का राजनीतिकरण करने से बाज आए। इसके बाद तो सरकार की ओर से दो वरिष्ठ मंत्रियों- वित्त मंत्री अरुण जेटली और मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बयान आ गए। दोनों मंत्रियों ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने बैठे-बिठाए पाकिस्तान को यह मुद्दा दे डाला कि भारत में शहीदों के नाम पर राजनीति हो रही है। सरकार का कहना है कि विपक्ष के इस तरह के बयानों का इस्तेमाल पाकिस्तान यह बताने के लिए के लिए करता रहेगा कि आतंकवाद को लेकर भारत के राजनीतिक दलों में ही एकजुटता नहीं है। हालांकि विपक्ष ने पिछले पंद्रह दिन में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ हर तरह से खड़े रह राष्ट्र की एकजुटता का परिचय दिया है।

शहीदों के नाम पर राजनीति कौन कर रहा है, कौन नहीं यह अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। हाल में दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करने को मौके पर प्रधानमंत्री ने जो भाषण दिया था उसमें उन्होंने शहीदों को श्रद्धाजंलि देने के साथ बोफोर्स तोप सौदे से लेकर उन तमाम हथियार सौदों को लेकर कांग्रेस पर हमले किए जो कांग्रेसी राज में हुए थे। उन्होंने यह भी कह डाला कि सैनिकों और शहीदों के साथ जितना अन्याय कांग्रेस के राज में हुआ, उतना किसी ने नहीं किया। चूंकि वक्त चुनाव का है इसलिए शहीदों को भी भुनाने का कोई मौका प्रधानमंत्री हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे। क्या यह शहादत पर राजनीति नहीं थी?  

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories