• [EDITED BY : नया इंडिया टीम] PUBLISH DATE: ; 19 December, 2018 09:04 AM | Total Read Count 297
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सोलर परियोजना की वकालत

ग्रीनपीस इंडिया के द्वारा जारी विश्लेषण में यह सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर से सटे उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर में प्रस्तावित खुर्जा सुपर पावर प्लांट लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक रुप से भी जोखिम भरा है और अक्षय ऊर्जा अपनाकर इससे ज्यादा सस्ती बिजली हासिल की जा सकती है। प्रस्तावित खुर्जा सुपर थर्मल पावर प्लांट 1,320 मेगावाट का है जो उत्तर प्रदेश सरकार और टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड का सयुंक्त उपक्रम है। इसमें बताया गया है कि  नया कोयला थर्मल पावर प्लांट लगाने से ज्यादा सस्ता और स्वच्छ सोलर, वायु जैसे अक्षय ऊर्जा के विकल्प मौजूद हैं, जो पहले से ज्यादा आसानी से और सस्ते में उपलब्ध हैं। अक्षय ऊर्जा निवेशकों के लिये भी निवेश के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित हैं।

ग्रीनपीस इंडिया की कैंपेनर पुजारिनी सेन के मुताबिक “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि क्षेत्र में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण और अक्षय ऊर्जा की अर्थव्यवस्था में बदलाव के बावजूद वित्त मंत्रालय ने सिद्धांतः खुर्जा कोयला पावर प्रोजेक्ट में निवेश के लिए हरी झंडी दे दी है। यह साफ है कि नया कोयला पावर परियोजना निवेश या फिर पर्यावरण के लिहाज से कोई अर्थ नहीं बना रहा है।” एक उदाहरण के रूप में खुर्जा सुपर थर्मल पावर प्लांट के भूमि पदचिह्न का उपयोग करते हुए, विश्लेषण में यह बताने की कोशिश की गयी है कि खुर्जा एसटीपी के आकार और पैमाने का एक सौर संयंत्र आवश्यक निवेश जैसे नौकरी के विकास, नौकरी की वृद्धि, इक्विटी पर वापसी, बिजली उत्पादन आदि में थर्मल पावर प्लांट से ज्यादा फायदेमंद साबित होगा और इससे प्रदूषण से भी बचा जा सकता है।

इस थर्मल पावर प्लांट के लिये आवंटित 1200 एकड़ में ही 240 मेगावाट सोलर बिजली पैदा किया जा सकता है। इतना ही नहीं खुर्जा पावर प्लांट को 3,378 एकड़ वन भूमि की भी खनन के लिये आवश्यकता पड़ेगी, जो सिंगरौली में स्थित है। (2) (इसमें 9 लाख पेड़ों का काटा जाना भी शामिल है)। इतनी ही जमीन (खनन के लिये 3378 एकड़) में बिना किसी जंगल को काटे 675 मेगावाट उत्पादन करने वाला सोलर परियोजना लगाया जा सकती है। मतलब खुर्जा जितनी बड़ी परियोजना से 915 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा सकता है। इस तरह के सोलर परियोजना से 8,341 नौकरियां बनायी जा सकती हैं और इस परियोजना की कुल लागत अनुमानतः 3,204 करोड़ (3.5 करोड़ प्रति मेगावाट) होगा, जबकि थर्मल पावर प्लांट के लिये 12,676 करोड़ निवेश की जरुरत होगी। यह सालाना 1.2 मिलियन टन कार्बन डॉक्साइड को ऑफसेट भी करेगी।

उत्तर प्रदेश में स्वच्छ वायु और ऊर्जा के मुद्दे पर काम कर रहे क्लाइमेट एजेंडा के रवि शेखर कहते हैं, “उत्तर प्रदेश के लोगों को सस्ती बिजली और स्वच्छ हवा चाहिए, खुर्जा थर्मल पावर प्लांट से उनको दोनों में से कुछ भी नहीं मिलेगा। ये राय एनजीओ सेक्टर की है, जो कई बार एकतरफा भी होती है। यह जरूरी है कि सरकार ऐसी तमाम आलोचनाओं और राय पर गौर करे, मगर यह भी जरूरी है कि फैसला सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए पूरे विवेक के साथ लिया जाए।

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