• [EDITED BY : Awdhesh Kumar] PUBLISH DATE: ; 02 September, 2019 09:03 PM | Total Read Count 21
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पंचांग 02 सितम्बर सोमवार

आज श्रीगणेश चतुर्थी विघ्नराज, मंगल कारक, प्रथम पूज्य, एकदंत भगवान गणपति के जन्म  का उत्सव पर्व है।  आज भगवान श्रीगणेश की आराधना श्रद्धानिष्ठ होकर करने से गणपति की कृपा से देवता व पित्र प्रसन्न होते हैं। शिव-शक्ति के पुत्र, रिद्धि-सिद्धि के पति, शुभ-लाभ एवं सदा सुख शांति देने वाली माता संतोषी के पिता श्रीगणेश की कृपा से ही मनुष्य को संसार में संपदा प्राप्त होती है।व्यापारी को व्यापार लाभ के लिए, कर्मचारी को पदोन्नति के लिए, गृहस्थी को घर में सुख, शांति के लिए भगवान श्रीगणेश की ही आराधना चाहिए।  

आइये अब  पहले जान लेते है की श्री गणेश चतुर्थी पर गणेश स्थापना और पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त ...

गणेश पूजन के लिए शास्त्रों में मध्यान्ह काल श्रेष्ठ माना गया है

मध्यान्ह काल का समय - दोपहर 11-11  से दोपहर 1-42 तक रहेगा |

गणेश जी की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय - मध्यान्ह काल (वृश्चिक लग्न सहित ) दोपहर 11- 51 से दोपहर 1-42  तक रहेगा

चौघड़िया के अनुसार गणेश पूजन का समय -

प्रातः 6:10  से 07:44 मिनट तक अमृत का चौघड़िया रहेगा | 

प्रातः 9-18 से पूर्वाह्न 10-52 तक  शुभ का चौघड़िया रहेगा |

दोपहर 2-01 मिनट से सायंकाल 6-43 मिनट तक चर,लाभ,अमृत  के  चौघड़िया रहेंगे  जिसमे भगवान गणेश जी का पूजन किया जा सकता है ।

तो गणेश पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त मध्यान्ह काल मे अभिजीत मुहूर्त और वृश्चिक लग्न में माना गया है जो इस बार दिनांक 2 सितम्बर 2019 सोमवार को  दोपहर  11  बजकर 51 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक वृश्चिक लग्न मे श्री गणेश जी का पूजन  सबसे शुभ रहेगा . । इन लग्नों में किया गया कोई भी शुभ कार्य स्थाई होता है।इस दौरान भगवान का विधि-विधान से पूजन करें। गणपति की कृपा से दुखों व तकलीफों का निवारण होगा। आप इस का ध्यान रखे और लाभ उठाये।

आइये अब जान लेते  है की गणेश पूजा किस तरह से की जाये .....

किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी की स्मरण किया जाता है जिस कारण इन्हें विघ्नेश्वर, विघ्न हर्ता कहा जाता है. भगवान गणेश समस्त देवी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं. इनकी उपासना करने से सभी विघ्नों का नाश होता है तथा सुख-समृद्ध व ज्ञान की प्राप्ति होती है.सुबह जल्दी उठकर स्नान एवं नित्यकर्म से शीघ्र निवृत्त हों। अपने सामथ्र्य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। संकल्प मंत्र के बाद षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। गणेश पूजा के दौरान गणेशजी की प्रतिमा पर चंदन मिश्रण, केसरिया मिश्रण, इत्र, हल्दी, कुमकुम, अबीर, गुलाल, फूलों की माला खासकर गेंदे के फूलों की माला और बेल पत्र को चढ़ाया जाता है। धूप, दीप,नारियल फल,ताम्बूल और नैवेध अर्पण करे . मंत्र बोलते हुए 21 दुर्वा-दल चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास चढ़ाएं और 5 ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद रूप में बांट दें।

भगवान गणेश  जी की अपने परिवार सहित आरती करे . और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करे .ब्राह्मण भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात् संध्या के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें। पूजन के समय यह मंत्र बोलें...ऊँ गं गणपतये नम: इस तरह पूजन करने से भगवान श्रीगणेश अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं। श्रद्धा के साथ चतुर्थी के दिन व्रत रखे . इसके व्रत से सभी संकट-विघ्न दूर होते हैं.  चतुर्थी का संयोग गणेश जी की उपासना में अत्यन्त शुभ एवं सिद्धिदायक होता है. चतुर्थी का माहात्म्य यह है कि इस दिन विधिवत् व्रत करने से श्रीगणेश तत्काल प्रसन्न हो जाते हैं. चतुर्थी का व्रत विधिवत करने से व्रत का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त हो जाता है.इस दिन विधि अनुसार व्रत करने से वर्ष पर्यन्त चतुर्थी व्रत करने का फल प्राप्त होता है. चतुर्थी के शुभ फलों द्वारा व्यक्ति के किसी भी कार्य में कोई विघ्न नहीं आता उसे संसार के समस्त सुख प्राप्त होते हैं भगवान गणेश उस पर सदैव कृपा करते है

एक विशेष बात जो आज मै आपको बताना चाहूँगा की गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र दर्शन को निषेध माना गया है . इस दिन चन्द्र दर्शन नहीं करना चाहिए .

'जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है | इस दिन चन्द्र दर्शन करने से भगवान श्री कृष्ण को भी मणि चोरी का कलंक लगा था ।

आइये अब जान लेते है द्वार गणपति की पूजा विधि -

आज घर के मुख्य द्वार पर विराजित द्वार गणपति  का जल,कच्चे दूध ,पंचामृत से अभिषेक करके द्वार गणपति को सिंदूर का चोला चढ़ाये | चांदी का वर्क चढ़ाये | पुष्पमाला अर्पण करे | द्वार गणपति के दोनों तरफ केले के पत्ते पर मिटटी के दीपक में शुभ देशी घी का दीपक जलाये , बेसन के लड्डू का प्रसाद रखे | घर के मुख्य द्वार पर गणपति को चढ़ाए गए सिंदूर से दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं।अब अपने पूजा स्थान पर भगवान गणेश के समक्ष बैठें उनके सामने घी का चौमुखी दीपक जलाएं.अपनी उम्र के बराबर लड्डू रखें फिर एक एक करके सारे लड्डू चढ़ाएं और हर लड्डू के साथ "गं" मन्त्र जपते रहें.  गणपति के  समक्ष खड़े हो गणेश जी की आरती करे,पुष्पांजलि करे ,क्षमाप्रार्थना करे | इसके बाद बाधा दूर करने की प्रार्थना करें और एक लड्डू स्वयं खा लें और बाकी लडडू बांट दें. भगवान् गणेश रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ समेत स्वम् आपके घर में ,आपकी तिजोरी में ,आपके व्यापार में परमानेंट निवास करने लगेंगे |  गणपति महाराज करेंगे आपके सभी विघ्नो ,कष्टों को दूर ,घर में होगी शांति ,बरकत चारो और

 

गणेश चतुर्थी पर करें करें ये 11 उपाय में से कोई भी एक खुल जाएगा किस्मत का ताला, ये हैं श्रीगणेश को प्रसन्न करने के 11 उपाय, आज कोई भी 1 करें,  

 

1.शास्त्रों में भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने का विधान बताया गया है। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश का गन्ने के रस से अभिषेक करने से विशेष लाभ होता है। साथ में गणपति अथर्व शीर्ष का पाठ भी करें। बाद में लड्डुओं का भोग लगाकर भक्तों में बांट दें।

2 यंत्र शास्त्र के अनुसार, गणेश यंत्र बहुत ही चमत्कारी यंत्र है। गणेश चतुर्थी पर घर में इसकी स्थापना करें। इस यंत्र की स्थापना व पूजन से बहुत लाभ होता है। इस यंत्र के घर में रहने से किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं करती।

3. अगर आपके जीवन में बहुत परेशानियां हैं, तो आप गणेश चतुर्थी पर हाथी को हरा चारा खिलाएं और गणेश मंदिर जाकर अपनी परेशानियों का निदान करने के लिए प्रार्थना करें। इससे आपके जीवन की परेशानियां कुछ ही दिनों में दूर हो सकती हैं।

4.अगर आपको धन की इच्छा है, तो इसके लिए आप  गणेश चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीगणेश को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो सकता है।

5. गणेश चतुर्थी पर किसी गणेश मंदिर जाएं और दर्शन करने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार गरीबों को दान करें। कपड़े, भोजन, फल, अनाज आदि दान कर सकते हैं। दान के बाद दक्षिणा यानी कुछ रुपए भी दें। दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान श्रीगणेश भी अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।

6. गणेश चतुर्थी पर पीले रंग की गणेश प्रतिमा अपने घर में स्थापित कर पूजा करें। पूजा में श्रीगणेश को हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं। इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं। यह उपाय लगातार 10 दिन तक करने से नौकरी में तरक्की ,प्रमोशन होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

7. गणेश चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद समीप स्थित किसी गणेश मंदिर जाएं और भगवान श्रीगणेश को 21 गुड़ की गोलियां बनाकर दूर्वा के साथ चढ़ाएं। इस उपाय से भगवान आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

8.यदि बिटिया का विवाह नहीं हो पा रहा है, तो  गणेशचतुर्थी पर विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाएं व व्रत रखें। शीघ्र ही उसके विवाह के योग बन सकते हैं।

9. गणेश चतुर्थी को दूर्वा (एक प्रकार की घास) के गणेश बनाकर उनकी पूजा करें। मोदक, गुड़, फल, मावा-मिष्ठान आदि अर्पण करें। ऐसा करने से भगवान गणेश क़र्ज़ से मुक्ति प्रदान करते है  ।

10.यदि लड़के के विवाह में परेशानियां आ रही हैं, तो वह गणेश चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। पीले डोरे को गणपति के चरणों में रख कर सिंदूर लगाकर अपने गले में बांध ले  इससे उसके विवाह के योग बन सकते हैं।

11. जीवन में सम्पूर्ण सुखो  की प्राप्ति के लिए गणेश चतुर्थी पर व्रत रखें। शाम को घर में ही गणपति अर्थवशीर्ष का पाठ करें। इसके बाद भगवान श्रीगणेश को मूंगकी दाल से बने लड्डुओं का भोग लगाएं। इसी प्रसाद से अपना व्रत खोलें और भगवान श्रीगणेश से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

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