• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 11 July, 2019 06:55 AM | Total Read Count 176
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नेता विपक्ष के लिए कांग्रेस कब अदालत जाएगी?

कांग्रेस लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। उसके 52 सांसद हैं पर अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से उसे मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा नहीं मिला है। संसदीय नियमों और कानूनों के आधार पर कांग्रेस ने कई बार यह बताया है कि मुख्य विपक्षी पार्टी बनने के लिए किसी भी पार्टी को दस फीसदी सीट लाने की बाध्यता नहीं होती है। कांग्रेस के प्रवक्ता और मशहूर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि दस फीसदी सीट का नियम सासंदों के बैठने की व्यवस्था और बोलने के लिए दिए जाने वाले समय को व्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है। 

सिंघवी ने कहा था कि अगर सरकार कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा और लोकसभा में उसके नेता को नेता विपक्ष का दर्जा नहीं देती है तो कांग्रेस अदालत जा सकती है। सवाल है कि पहला सत्र आधे से ज्यादा बीत गया है तो कांग्रेस क्यों नहीं अदालत जा रही है? अगर कांग्रेस को लग रहा है कि नेता विपक्ष के वेतन, भत्तों के नियम में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि उसे कम से कम दस फीसदी सीट वाली पार्टी का नेता होना अनिवार्य है तो वह क्यों नहीं अदालत में जाकर इसका फैसला कराती है? 

कांग्रेस के एक जानकार नेता के मुताबिक इसके दो कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि कांग्रेस को अब भी लग रहा है कि सरकार की ओर से इस बार सद्भाव दिखाया जाएगा और कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा मिल जाएगा। ऐसा सोचने का एक आधार यह भी है कि राहुल गांधी लोकसभा में कांग्रेस के नेता नहीं बने हैं। उनकी बजाय कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को नेता चुना है। इसलिए भाजपा को उन्हें नेता विपक्ष का दर्जा देने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इस बीच आरएसपी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने सरकार से कहा है कि वह अगर अपने को लोकतांत्रिक मानती है तो सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा दे। 

वैसे भी सरकार ने अभी कई संसदीय नियुक्तियां नहीं की हैं। लोकसभा के उपाध्यक्ष का फैसला भी सरकार ने नहीं किया है। सो, कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि इस सत्र के बाद और अगले सत्र से पहले सरकार जब उपाध्यक्ष का फैसला करेगी तभी कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी बनाने का फैसला किया जा सकता है। इसलिए अदालत जाने से पहले थोड़ा और इंतजार करने की रणनीति बनी है। दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि कई नेता अदालत के रवैए को देख कर आशंकित हैं। उनको लग रहा है कि अगर कांग्रेस संसदीय लड़ाई को अदालत में ले जाए और वहां से भी उसको नेता विपक्ष का पद नहीं मिले तो लोकसभा में उसकी राजनीति कमजोर होगी। इसलिए बहुत से नेता पिछली लोकसभा की तरह ही यथास्थिति बने रहने की सोच में हैं। उनका मानना है कि विपक्ष के साथ ऐसा बरताव करके सरकार अपने को एक्सपोज कर रही है।

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