• [EDITED BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 10 July, 2019 07:06 AM | Total Read Count 287
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विपक्षी नेता के अवतार में नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वह काम कर रहे हैं, जो कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी खुल कर नहीं कर पा रही हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में विपक्ष से ज्यादा मुखर नीतीश हैं, जबकि वे बिहार में भाजपा की मदद से सरकार चला रहे हैं। यह अलग बात है कि उन्होंने केंद्र की सरकार में सांकेतिक प्रतिनिधित्व नहीं लेने की घोषणा करने के साथ ही यह भी ऐलान कर दिया था कि भाजपा से उनका तालमेल सिर्फ बिहार तक है। वे बिहार से बाहर एनडीए का हिस्सा नहीं हैं इसलिए केंद्र की एनडीए सरकार और भाजपा की नीतियों का विरोध करने को स्वतंत्र हैं। 

नीतीश कुमार ने रेलवे के निजीकरण के प्रयास का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों को ट्रेन चलाने की अनुमति देने का सैद्धांतिक फैसला कर लिया है। रेलवे के विकास में निजी भागीदारी की घोषणा बजट में हुई है। नीतीश कुमार रेलवे के विकास में निजी सार्वजनिक भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के विरोधी नहीं हैं पर उन्होंने कहा है कि रेलवे पर नियंत्रण हर हार में सरकार का ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेलवे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। नीतीश ने कहा कि जब देश छह सौ रियासतों में बंटा था तब भी रेलवे के जरिए ही देश एकजुट था। जाहिर है उनकी पार्टी रेलवे के निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी। 

सोमवार को जिस दिन पटना में नीतीश कुमार ने रेलवे के निजीकरण का सवाल उठाया उसी दिन नई दिल्ली में उनकी पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगर ये दोनों अनुच्छेद हटाने का प्रयास करती है तो जदयू उसका विरोध करेगी। ध्यान रहे जनता दल यू ने एक साथ तीन तलाक बोलने को अपराध बनाने वाले विधेयक का भी विरोध किया है और वह राज्यसभा में इसका समर्थन नहीं करेगी। नागरिकता कानून को लेकर भी जनता दल यू का विरोध रहा है। नीतिगत मामलों में केंद्र सरकार के फैसलों का विरोध करने के साथ ही जनता दल यू ने बिहार से बाहर दूसरे राज्यों में अलग रास्ता पकड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। जदयू ने झारखंड मे नए नेताओं को आगे किया है और चुनाव तैयारी शुरू कर दी है। इसी तरह दिल्ली और हरियाणा के चुनाव की तैयारी भी पार्टी कर रही है। पिछले दिनों नीतीश कुमार ने दिल्ली पार्टी की प्रदेश ईकाई के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। झारखंड, हरियाणा और दिल्ली इन तीनों राज्यों में नीतीश कुमार वोट प्रभावित कर सकते हैं और भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। झारखंड में उनकी तैयारियों को देख कर लग रहा है कि भाजपा भी उनसे तालमेल की बात कर सकती है। वैसे उनकी नजर भाजपा से निकले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी पर है। 

 

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