• [WRITTEN BY : News Desk] PUBLISH DATE: ; 11 September, 2019 07:11 AM | Total Read Count 185
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कन्हैया मामले में केजरीवाल की दुविधा

दिल्ली में जनवरी-फरवरी में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं उससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने एक बड़ी दुविधा आ गई है। उनकी सरकार को कन्हैया के मामले में फैसला करना है। दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस से कहा था कि वह जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी राज्य सरकार से लें। राज्य सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी है। राज्य सरकार ने इतना कहा है कि वह न कन्हैया के देशद्रोही या देशभक्त होने पर कोई राय नहीं रखती है। यानी देशद्रोही भी नहीं मानती है और देशभक्त होने का सर्टिफिकेट भी नहीं दे रही है। 

भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। भाजपा के नेता रोज केजरीवाल से पूछ रहे हैं कि वे कन्हैया कुमार के बारे में अपनी राय स्पष्ट करें। मुश्किल यह है कि सोशल मीडिया में भाजपा के समर्थकों ने कन्हैया कुमार को जेएनयू के कथित टुकड़े टुकड़े गैंग का सरगना घोषित किया हुआ है और उनके देशद्रोही होने का प्रचार किया हुआ है। ऐसे में केजरीवाल खुल कर उनका समर्थन करते हैं तो उनको भी टुकड़े टुकड़े गैंग का नेता बता दिया जाएगा और चुनाव से ऐन पहले उनको देशविरोधी बताने का प्रचार होगा।

दुविधा यह है कि अगर उनकी सरकार कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मंजूरी दे देती तो केजरीवाल की अपनी प्रगतिशीलता पर सवाल खड़ा होता और युवाओं का एक बड़ा वर्ग उनसे नाराज होता। कांग्रेस पार्टी इसका फायदा उठाने के लिए बैठी है। ध्यान रहे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने आप को पीछे छोड़ कर दिल्ली की पांच सीटों पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया था। तभी केजरीवाल की सरकार के प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला। पर भाजपा के नेता इतने पर चुप नहीं रहेंगे। वे केजरीवाल से निजी तौर पर राय जाहिर करने का दबाव बनाएंगे। इस बीच केजरीवाल अपने को देशभक्त और धार्मिक हिंदू साबित करने के प्रयास में लगे हैं। उन्होंने मंगलवार को सभी अखबारों में बड़े विज्ञापन दिए, जिसमें भगवा चुनरी गले में लपेटे वे गणपति की पूजा करते दिख रहे हैं। 

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